अमेरिकी संसद में पास हुआ क्वाड बिल! सदमें में चीन

अमेरिकी संसद में पास हुआ क्वाड बिल ,क्या चीन है खतरे में ,भारत को इस बिल से कैसे हो सकता है फायदा , क्यों पड़ी इस बिल की जरूरत?

हिंद-प्रशांत क्षेत्र यानि Indo-Pacific region में चीन के बढ़ते दबदवे को रोकने के लिए चार देशों के क्वाड गठबंधन ने सक्रिय रूप से काम शुरू कर दिया है। शुक्रवार को अमरीकी प्रतिनिधि सभा ने 39(उनतालीस) के मुकाबले 379(उनासी) वोटों से क्वाड विधेयक पारित कर दिया। Quadrilateral Security Daftang(क्वाड) bill में अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के बीच संयुक्त सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई है। बिल में अमरीकी विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वो बिल के पेश होने के 180 दिन के भीतर क्याड के साथ कामकाज और सहयोग बढ़ाने की रणनीति कांग्रेस में शामिल करे और 60 दिन के अंदर क्वाड अंतर-संसदीय कार्य समूह के गठन के लिए जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के साथ बातचीत करे। बिल पेश करते हुए सांसद घेगरी मीक्स ने कहा कि अमरीका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच Quadrilateral Security वार्ता एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। क्वाड का गठन 2007 में हुआ था, लेकिन यह 2017 में सक्रिय हुआ।

बता दे की अब सालाना ऑडिट होगा

इस खास वर्किंग ग्रुप में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक अमेरिकी समूह की भी स्थापना होगी जिसमें कांग्रेस के Maximum 24 सदस्य होंगे. ये annual meetings और team leadership के लिए guidance भी तय करेगा. bill में कहा गया है कि इस समूह को कांग्रेस की विदेश मामलों की committees को एक annual report प्रस्तुत करनी होगी.

भारत विरोधी मुस्लिम सांसद Ilhan Umar ने किया विरोध

डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सांसदों ने बिल के विरोध में vote किया. उनमें से एक minneapolis से कांग्रेस महिला इल्हान उमर हैं. आपको बताते चलें कि उमर पहली सांसद हैं जो अमेरिका की संसद में हिजाब पहनकर गई थीं. भारत के अविभाजित हिस्से जम्मू कश्मीर और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आने वाले उनके बयान लगातार सुर्खियां बटोरते हैं. सांसद ग्रेगरी मीक्स द्वारा पेश किए गए इस bill में यह भी कहा गया है कि विदेश मंत्रालय को क्वाड के साथ कामकाज और सहयोग को मजबूत करने की रणनीति के बारे में भी कांग्रेस को जानकारी देनी होगी. प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य मीक्स ने कहा कि अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है.

भारत के लिए क्वाड के मायने समझिए-

इसी महीने की 10 फरवरी को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में कहा था कि उन्हें विश्वास है कि ‘क्वाड’ (चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद) समूह की प्रासंगिकता बढ़ेगी और यह क्षेत्रीय तथा क्षेत्र से परे राजनीति व नीति में एक बड़ा कारक बनेगा. जयशंकर ने हिंद महासागर सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया की अपने समकक्ष पेनी वोंग के साथ एक चर्चा के दौरान ये टिप्पणियां कीं. वह दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां आए हुए हैं. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया वाले ‘क्वाड’ समूह के बारे में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह समूह प्रमुख शक्तियों की बदलती क्षमताओं और पूरी दुनिया पर उसके असर का परिणाम है. क्वाड का गठन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख से निपटने के लिए 2017 में किया गया था. जयशंकर ने कहा, ‘यह हमारे लिए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के साथ तीन बहुत important relationship को भी दर्शाता है जो cold war खत्म होने के बाद बदल गए हैं.’

चारों देश इस समुद्री क्षेत्र के चार कोनों पर स्थित

क्वाड देश उस समुद्री क्षेत्र पर साथ काम करेंगे, जहां चीन खतरा बनकर उभरा है. ऐसे में जयशंकर ने कहा था- ‘वो पूरे विश्वास के साथ यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि क्वाड की योग्यता बढ़ेगी और ये बड़े area और क्षेत्र से राजनीति और नीति में एक बड़ा कारक बनेगा.’

ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय संबंधों के बारे में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि इसके बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम व्यापार व आर्थिक क्षेत्र में और ज्यादा कर सकते हैं.’ जयशंकर ने पर्थ में भारतीय मूल के सैनिक नैन सिंह सैलानी के नाम पर रखे गए सैलानी एवेन्यू का भी दौरा किया था. रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने सात फरवरी 1916 को पर्थ में ऑस्ट्रेलियन इम्पीरियल फोर्स में शामिल होने से पहले एक ‘मजदूर’ के रूप में काम किया था.

शिमला में जन्मे नैन सिंह उस समय 43 वर्ष के थे जब उन्हें ऑस्ट्रेलियन और न्यूजीलैंड आर्मी कोर की 44वीं इंफेंट्री बटालियन में शामिल किया गया था. वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी द्वारा चलाए एक आक्रामक अभियान में मारे गए थे. उन्हें ब्रिटिश वॉर मेडल, विक्ट्री मेडल और 1914/15 स्टार से सम्मानित किया जा चुका है.

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