दरसअल इस मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य सभा सांसद सुशील मोदी ने खुलकर विरोध जाहिर किया है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा है कि उससे भारतीय संस्कृति का स्वरूप बिगड़ेगा। और आने वाली पीढ़ी पर गलत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजो के जमाने से ही होमो सेक्स को अपराध समझा जाता है। सुशील मोदी शून्यकाल के दौरान उन्होंने कहा, “भारत में विवाह एक पवित्र संस्था है, और एक बायोलॉजिकल मेल और एक बायोलॉजिकल फीमेल के बीच का संबंध है। ” एक पुरुष और एक स्त्री की शादी होती है। विवाह दो पुरुषों के बीच में नहीं होता है।
हर धर्म में, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एक स्त्री और एक पुरुष का ही विवाह होता है। किसी भी धर्म में सेम सेक्स मैरिज का कोई प्रावधान नहीं है।’ सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने होमो सेक्स को मान्यता दे दी है। इस संबंध में दो पुरुष आपस में या फिर दो स्त्री आपस में संबंध बनाते हैं तो वह crime (अपराध) की श्रेणी में नहीं आता है। 2018 के फैसले ने उनको अधिकार तो जरूर दिए लेकिन अभी भी वो विवाह के अधिकार से वंचित हैं जो आम तौर पर सभी जोड़ों को मिला हुआ है। अब सवाल ये है कि यदि होमो सेक्स लीगल (legal) है तो शादियों को लेकर ये लीगल क्यों नहीं किया जा रहा ?