ऊषा शुक्ला
हर इंसान के पास पूर्वजन्म से अर्जित कुछ पुण्य/पाप होते हैं जो कि इस जन्म में फलित हो रहे होते हैं।। जीवन के चक्र में दुःख सुख बारी -बारी आते है। जीवन सदा एक जैसा नहीं रहता है । हर मनुष्य के जीवनशैली में कभी अच्छा तो कभी बुरा समय आता है। बुरा समय हर मनुष्य को और हिम्मती और शक्तिशाली बनाने के लिए आता । भगवान देखना चाहते हैं कि बुरा समय में या व्यक्ति कौन से ग़लत क़दम उठाता है । समझदार व्यक्ति शांति से और धैर्य से अपने बुरे समय को पार करता है बल्कि बेवकूफ़ और अनपढ़ आदमी अपने बुरे समय में ग़लत रास्ते पर चलना शुरू कर देता है और दूसरों पर इल्ज़ाम लगाते हैं ।कुछ लोगों का बचपन अच्छा गुजरता है कुछ की जवानी अच्छी गुजरती है तो कुछ लोगों का बुड़ापा अच्छा गुजरता है । जीवन मे हमेशा अच्छा नहीं होता है । जिनका बचपन अच्छा होता है वह उनके बड़ों की मेहनत का फल होता है । जवानी मे जो मेहनत करता है उसको अच्छे फल मिलते है । जीवन मे किए गए कर्मो का फल इंसान को भोगना पड़ता है ।इस जीवन में कोई भी चीज़ स्थाई नहीं है सुख और दुख जीवन के दो पहलू हैं तो उसी प्रकार अच्छा समय और बुरा समय भी जीवन के दो चक्र है । हर मनुष्य का धर्म है कि वह बुरे समय में किसी भी ग़लत रास्ते पर न जाये ।बुरा वक़्त आना भी ज़रूरी है। जब भी कभी बुरा वक़्त आता है तो इंसान की औक़ात पता चल जाती है । कौन आपके बुरे समय मैं आपका साथ देता है और कौन पीठ दिखाकर ग़ायब हो जाता है । हर व्यक्ति को अपने जीवन में बुरे समय का अनुभव आवश्यक होता है । ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई भी मन से धरती पर ऐसा हो जिसके जीवन में कभी कोई बुरा समय ना आया हो । जब कभी बुरा समय आए तो हिम्मत नहीं हार नहीं चाहिए । भगवान पर विश्वास दृढ़ करना चाहिए और निवारण का उपाय सोचना चाहिए ।बुरा वक्त एक ना एक दिन के जीवन में आता है और चला भी जाता है | कुछ का बुरा वक्त बहुत आसानी से गुजर जाता है क्योंकि वो बुरे वक्त में धैर्य से काम लेते हैं | लेकिन कुछ भी है जो अपने बुरे वक्त में गलत रास्तो में पडकर अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं | अंधेरे के बाद उजाला अवश्य आता है इसलिए हमें बुरे वक्त में धैर्य से काम लेकर अपने सभी कार्य पूर्ण करते रहना चाहिए एक दिन उजाला अवश्य आएगा |वक्त ईश्वर का दूसरा नाम है जो किसी के भी कन्ट्रोल में नहीं होता । ईश्वर पर भरोसा रख अपना कर्म करते रहें चाहे अच्छा वक्त है या बुरा । वास्तव में अच्छा बुरा हमारे लिए है, ईश्वर के लिए नहीं। हां समय बदलता जरूर है, ऊपर नीचे यही प्राक्रतिक प्रक्रिया है।किसी भी व्यक्ति का बुरा वक्त तब तक चलता है जब तक वह अपना कोई उद्यम नही करता और वह अपनेआप को ईश्वर को समर्पित नहीं कर देता। हर मनुष्य को अपने बुरे समय में शांति से काम लेना चाहिए उसे सोचना चाहिए कि उसे कौनसा सही निर्णय लेना चाहिए ।ईश्वरीय शक्ति और स्वयं का उद्यम ही बुरा समय को कम कर सकता है। रात के बाद दिन आता है इसी प्रकार बुरे वक्त के बाद अच्छा समय भी आता है। इसीलिए हमें धैर्य धारण करना चाहिए।कोरोना की आपदा हालांकि अभी गई नहीं है,लेकिन हम सब ने मिल कर धैर्य से लॉकडाउन का पालन किया,तो काफी कुछ नियन्त्रण में आ गया।कई साल पहले एक घटना के बारे में कहीं पढ़ा था,जिस में दो विदेशी पर्वतारोही उनके देश की दुर्गम पहाड़ी चोटी पर चढ़ाई करते समय बर्फीले तूफान में ग्यारह दिन तक फंसे रहे।उन्होने 10 रातें सिर्फ 2–3 मीटर की पहाड़ी सतह पर गुजारीं।बर्फबारी से बचने के लिये खुद को पोलीथिन के एक टुकड़े से ढक लिया था बस! हिन्दू संस्कृति मे पूर्व जन्म को माना जाता है क्योंकि 84 लाख योनियों मे से किसी जन्म के कर्म हमे सुख भी दे सकते है तो कुछ लोगों को पैदा होते ही अनेक तरह के दुखों का सामना करना पड़ता है । इसके लिए मे अनेक जन्मों को भी कारण मान सकती हूँ ।हर इंसान का व्यवहार दूसरे प्राणी के व्यवहार को देखकर बदलता रहता है । जिसके साथ अच्छा होता है वह चतुर होते है जो दूसरों से काम निकलवाने मे निपुण होते है । जिनके साथ बुरा होता है । उनके अंदर जीवन की समझ कम होती है वह इंसान और हालत को सही तरह से समझ नहीं पाते है । वे चाहते है सामने वाला उनके अनुसार काम करे । वे खुद को बदलने की जगह दूसरों को बदलने की कोशिश ज्यादा कर रहे होते है । खुद को बदलना आसान होता है लेकिन वे खुद को बदलने की जगह दूसरों को बदल रहे होते है । इसलिए उन्हे सारी दुनियाँ बुरी लग रही होती है क्योंकि वे किसी से अपने मन माफिक काम नहीं करवा पा रहे होते है ।भगवान अच्छे लोगों को कष्ट क्यों देते हैं? यह एक बहुत प्राचीन प्रश्न है जिसने विचारकों, दार्शनिकों और हम जैसे सामान्य जनों को भी अक्सर गहन सोच के लिए बाध्य किया है। क्यों अच्छे लोगों के साथ बुरी चीजें होती हैं? क्यों नहीं जो लोग अच्छे होते हैं भगवान उनकी हमेशा सहायता करते हैं? जब अच्छे लोगों ने किस के साथ बुरा नहीं किया तो क्यों उनके साथ बुरा होता है? हमें बचपन से ही सिखाया गया कि हम अच्छा करेंगे तो हमारे साथ अच्छा ही होगा। हम दूसरों के लिए अच्छा सोचेंगे तो हमारे लिए भी अच्छा ही होगा। जब हम दूसरो के लिए अच्छा करेंगे उनकी सहायता करेंगे तो हमें भी अच्छे ही मिलेगी। क्या ही अच्छा होता यदि ये सब बातें हमेशा ही सच उतरती जीवन कितना सरल होता और खुशहाल होता। किसी को भी कोई भी कष्ट होता तो बाकी संभाल लेते। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। हम कई बार देखते हैं कि जीवन कि राह में ऐसे कठिन मोड़ भी आते हैं जब संघर्ष और कठिनाइयों के अलावा कुछ भी नहीं सूझ पड़ता। और विशेषतः अच्छे व्यक्ति ही इन कठिनाइयों में झूझते दिखाई पड़ते हैं।