चरण सिंह
वक्फ संसोधन बिल का असर सबसे अधिक बिहार पर पड़ेगा। क्योंकि इस साल बिहार विधानसभा चुनाव हैं। इसलिए ध्यान भी बिहार में ही सबसे अधिक दिया जा रहा है। जिस तरह से जदयू ने मुस्लिम नेता नाराज हैं तो यह माना जा रहा है कि यह बिल सबसे अधिक असर जदयू पर डालने वाला है। क्योंकि नीतीश कुमार का चेहरा सेकुलर है और यह बिल सीधे मुस्लिमों से जुड़ा है और जदयू मुस्लिम नेता नीतीश कुमार से नाराज बताए जा रहे हैं। क्योंकि जदयू के सेकंड लाइन के नेता नीतीश कुमार की सुन नहीं रहे हैं। इसलिए नीतीश कुमार पूरी तरह से बेबस नज़र आ रहे हैं।
गुलाम गौस पहले ही आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद से मिल चुके हैं तो जमा खान नीतीश कुमार से बहुत खफा हैं। इन नेताओं का कहना है कि भले ही ललन सिंह और संजय झा बीजेपी के सुर में सुर मिला रहे हों पर नीतीश कुमार के स्टैंड लेने पर ये नेता भी कुछ नहीं कर पाते। मतलब इन चुनाव में मुस्लिमों की नाराजगी का खामियाजा नीतीश कुमार को उठाना पड़ सकता है। ऐसे में नीतीश कुमार से मुस्लिमों की नाराजगी का फायदा तेजस्वी यादव उठा सकते हैं। क्योंकि जदयू से नाराज मुस्लिमों का रुख आरजेडी की ओर ही देखा जा रहा है। वैसे भी माई समीकरण के बल पर ही लालू ने बिहार पर 15 साल राज किया। इस बार तो नीतीश कुमार के प्रति नाराजगी कुछ ज्यादा ही है।
वक्फ संसोधन बिल पर दूसरा पहलू यह भी है कि एनडीए नेताओं का कहना है कि वक्फ बोर्ड का फायदा प्रभावशाली उठाते रहे हैं। आम आदमी को इसका फायदा नहीं मिल पाता है। वक्फ बोर्ड के बारे में यह कहा जाता है कि करोड़ों रुपए का किराया वक्फ बोर्ड के पास आता है तब भी मुसलमान शिक्षा में पिछड़े हुए हैं ही साथ ही आर्थिक रूप से भी उनका उत्थान नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार यह भी कह रही है कि संशोधन के बाद अब इसका फायदा इन प्रभावशाली लोगों को नहीं बल्कि आम मुस्लिमों को मिलेगा।
मतलब आम लोगों के लिए दान दी गई जमीन का लाभ अब आम लोगों को ही मिलेगा। इसमें दो राय नहीं कि वक्फ बोर्ड के पास बड़े स्तर पर सम्पत्ति तो है ही पर इस पर कब्ज़ा करने वाली की भी कमी नहीं है। अब तक यह माना जाता है कि वक्फ बोर्ड का फायदा प्रभावशाली लोग ही उठाते रहे हैं। इसमें नेता और ब्यूरोक्रेट्स भी हैं। बीजेपी इस बात को ही भुनाना चाहती है कि वह तो आम मुसलमानों के लिए काम करना चाहती है।