भारत पर भी होंगे नेपाल क्रांति के साइड इफेक्ट!
चरण सिंह
क्या नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की तरह हमारे प्रधानमंत्री भी इस तरह के क्रांतिकारी कदम उठा पाएंगे ? क्या मोदी के कुछ वादे जमीनी हकीकत भी बनेंगे ? देखने की बात यह है कि जो क्रांतिकारी कदम नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह उठा रहे हैं। ऐसे ही कुछ वादे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले जनता से किये थे। 2014 के चुनाव प्रचार में ऐसे वादे कर रहे थे कि जैसे देश की कायापलट कर देंगे। उनके वादे में मुख्य रूप से दो करोड़ युवाओं को प्रति वर्ष रोजगार देना। इतना ब्लैकमनी देश में ले आऊंगा कि प्रत्येक भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए आ जाएंगे। संसद को दागीमुक्त कर रहे थे।
हिन्दुओं को रिझाने के लिए गो कटान बंद कराने का वादा मुख्य रूप से किया था। क्या इन वादों में से इन साहब ने कुछ किया ? बस बातें ही बनाईं न। शिक्षा और चिकित्सा तो पूरी तरह से धंधे में बदल गई है। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है और सरकारी स्कूल धड़ल्ले से बंद किये जा रहे हैं। उधर नेपाल में प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों पर अंकुश और सरकारी अस्पतालों और स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नेपाल में अब हर किसी के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने जनहित में क्रांतिकारी कदम उठाएं हैं। मुख्य रूप से ये कदम सुधार, भ्रष्टाचार विरोध, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़े हैं। भारत के युवा नेपाल की क्रांति से बहुत प्रभावित हो रहे हैं। नेपाल में हो रहे क्रांतिकारी बदलाव की चर्चा भारत में जोर शोर से हो रही है। नेपाल के काम को गिनाकर मोदी सरकार को नसीहत दी जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार
शिक्षा को राजनीति से दूर रखने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कक्षा 5 तक की परीक्षाएं समाप्त कर दी गई है। विदेशी नाम वाले शैक्षणिक संस्थानों को नेपाली नाम अपनाने का आदेश दिया गया है।
दलितों से ऐतिहासिक माफी
नेपाल सरकार की ओर से दलित समुदाय के खिलाफ ऐतिहासिक भेदभाव और अत्याचार के लिए पहली बार औपचारिक माफी मांगी है। कैबिनेट और प्रतिनिधित्व: 15 सदस्यीय कैबिनेट में 5 महिला मंत्रियों लगभग 33% प्रतिनिधित्व दिया गया है। नेपाल की राजनीति में मील का पत्थर। युवा और गैर-पारंपरिक नेताओं (जैसे पूर्व डीजे) को मौका। भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई: जीरो टॉलरेंस नीति। पूर्व प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसे दिग्गजों पर सख्त कार्रवाई (Gen-Z आंदोलन से जुड़े मामलों में)। सिविल सेवकों और शिक्षकों पर राजनीतिक दल से जुड़ाव प्रतिबंध।
काठमांडू मेयर के रूप में क्रांतिकारी कदम
बालेन्द्र शाह ने काठमांडू का मेयर बनने के बाद भी क्रांतिकारी कदम उठाये थे। उन्होंने शहर सफाई और अवैध निर्माणों पर सख्ती: काठमांडू में कचरा प्रबंधन सुधार, अवैध संरचनाओं (बिल्डिंग्स) को ध्वस्त कर दिया था। सड़क किनारे अतिक्रमण हटवाया और फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए साफ कराई। ये कदम लोकप्रिय हुए लेकिन कुछ मामलों में बेदखली और विक्रेताओं पर कार्रवाई विवादास्पद रही।
पारदर्शिता के उपाय
नगर परिषद की बैठकों को लाइव स्ट्रीम करना, डिजिटल बिल्डिंग परमिट व्यवस्था शुरू करना।सार्वजनिक भूमि और नदी किनारे अतिक्रमण हटाना: बागमती नदी के किनारे स्क्वाटर बस्तियों पर कार्रवाई।
डिजिटल गवर्नेंस बढ़ावा, राष्ट्रीय शिकायत प्रणाली, डिजिटल आईडी।
Gen-Z आंदोलन (2025) में मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरियां दी। बिना गठबंधन की मजबूत सरकार बनाई। दरअसल ये कदम नेपाल में पीढ़ीगत बदलाव (Gen-Z क्रांति) का प्रतीक माने जा रहे हैं, जहां युवा नेतृत्व पुरानी पार्टियों (जैसे नेपाली कांग्रेस, CPN-UML) को चुनौती दे रहा है।
हालांकि जैसे ध्वस्तीकरण, छात्र राजनीति पर बैन को तानाशाही या जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। अधिकार समूहों ने स्ट्रीट वेंडर्स पर कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है गई। विदेश नीति में भारत-चीन संतुलन और “ग्रेटर नेपाल” मानचित्र जैसे पुराने विवाद भी चर्चा में रहे। बालेन शाह का उदय रैप से राजनीति तक की अनोखी यात्रा है, जहां वे भ्रष्टाचार, युवा असंतोष और सुधार पर फोकस करते हैं। उनके कदम अभी प्रारंभिक चरण में हैं, और परिणाम समय बताएगा कि ये नेपाल की राजनीति को कितना बदल पाते हैं।








