चरण सिंह
तमिलनाडु में डीएमके और प. बंगाल में टीएमसी को शिकस्त देने के बाद बीजेपी का टारगेट सपा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव के सामने बड़ी चुनौती है। अखिलेश यादव हैं कि बचकाना हरकत कर रहे हैं। प. बंगाल में ममता बनर्जी से मिलने के बाद अखिलेश यादव ने एमके स्टालिन और ममता बनर्जी के फोटो के साथ कांग्रेस पर निशाना साध दिया।
दरअसल यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को न तो एमके स्टालिन मजबूती दे सकते हैं और न ही ममता बनर्जी। हां कांग्रेस जरूर मजबूत कर सकती है । क्या जरूरत थी अखिलेश यादव को एमके स्टालिन की फोटो के साथ कांग्रेस पर निशाना साधने की ? जबकि खुद स्टालिन और ममता बनर्जी ने कांग्रेस के डीएमके से अलग होने पर कुछ नहीं बोला। वैसे भी एमके स्टालिन की बयानबाजी यूपी संस्कृति के खिलाफ रही है।
अखिलेश यादव ही नहीं सभी क्षेत्रीय दलों को समझ लेना चाहिए कि कांग्रेस की अगुआई में ही विपक्ष बीजेपी का मुकाबला कर सकता है। नहीं तो अभी तो सत्ता से ही बेदखल हुए हैं। आने वाले समय में वजूद पर भी संकट आ जाएगा। जब राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगा रहे थे तो ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल चुप थे। यदि ये लोग राहुल गांधी का साथ देते तो शायद नजारा कुछ और ही होता। अब जब ममता बनर्जी और एमके स्टालिन की सरकार चली गई तो अब समझ में आया कि वोट की चोरी हुई है।
समझने की बात यह है कि अभी भी एकजुट न हुए तो क्षेत्रीय दल धीरे धीरे आप वजूद खोने लगेंगे। क्या प बंगाल में अब तक बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं हो जाना चाहिए था ? क्या प बंगाल में विपक्ष की एकजुटता दिखाई नहीं देनी चाहिए थी ? आज एमके स्टालिन और ममता बनर्जी का नम्बर आया है तो कल अखिलेश यादव का भी आ सकता है। पंजाब में भी खेल हो सकता है ?नीतीश की तरह चंद्रबाबू नायडू को भी पैदल किया जा सकता है।
बिहार में तेजस्वी यादव, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे की क्या दुर्गति हुई। अभी दिखाई नहीं दे रही है ? अभी भी कांग्रेस को गरियाते रहो। बीजेपी को मनमानी करने देते रहो। अखिलेश यादव को समझ लेना चाहिए कि यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी बीएसपी को आगे बढ़ाने जा रही है। इस बार बीजेपी सपा मुक्त यूपी का नारा भी दे सकती है। यह बात समाजवादी पार्टी के नेताओं को समझ लेनी चाहिए।
अब तक के जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं उनमें सबसे बड़ी चुनौती यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के सामने है। यूपी में अखिलेश यादव का मुकाबला योगी आदित्यनाथ से है। इन्हीं योगी आदित्यनाथ ने उप विधानसभा चुनाव में 10 में से 9 सीटें झटक ली थी। इसलिए अखिलेश यादव को फूंक फूंक कर कदम रखना होगा। आंदोलन का रास्ता ही सपा को मुकाबले में ला सकता है। कितने आंदोलित मजदूर जेल में बंद हैं। कितने मजदूर लापता हैं। यही मुद्दा उठा लो।








