संघर्ष का प्रतीक बनीं विनेश फोगाट!

चरण सिंह

अंतरराष्ट्रीय पहलवान विनेश फोगाट आज की तारीख में देश का गौरव बन चुकी हैं। जिस तरह से उनका पूरा जीवन संघर्ष में बीता। जिस तरह से उन्होंने भाजपा के सांसद और कुश्ती फेडरेशन के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह पर लगने वाले यौन शोेषण को लेकर बृजभूषण सिंह के खिलाफ जंतर मंतर पर उनके खिलाफ होने वाला आंदोलन हो। केंद्र सरकार का आंदोलन को खत्म करने वाली रणनीति के खिलाफ खड़ा होना हो, ओलंपिक में अपने वजन की कुश्ती में फाइनल में पहुंचना हो। १०० ग्राम अधिक वजन होने की वजह से फाइनल के लिए डिस्क्वालीफाई करने के खिलाफ लड़ना हो। अब जब विनेश फोगाट सिंधू बोर्डर पर २०० दिन पूरे होने पर किसानों के बीच बैठी हों। ऐसे में कहा जा सकता है कि विनेश फोगाट हर किसी की आवाज बनने का प्रयास कर रही है। देखने की बात यह है कि आंदोलन में जिस तरह से विनेश फोगाट ने किसान आंदोलन में किसानों की पैरवी करते हुए कहा कि कोई शौकिया आंदोलन नहीं करता। मजबूरी में आंदोलन करने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई भी आंदोलन बड़ा चलता है तो लोगों को उम्मीद बंधती है। किसान आंदोलन के २०० दिन पूरे हो गये फिर भी ऐसा लग रहा है कि जैसे आज ही किसान आंदोलन शुरू हुआ हो।
देखने की बात यह है कि जहां दूसरे खिलाड़ी पैसे कमाकर एशोआराम की जिंदगी बिताने लग जाते हैं, ऐसे में विनेश फोगाट संघर्ष में दिखाई देती हैं। जहां उन्होंने दिल्ली जंतर मंतर पर महिला पहलवानों के साथ किये जाने वाले यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाई वहीं किसान आंदोलन में भी वह सक्रिय दिखाई दीं। किसान आंदोलन में जिस गेटअप में विनेश फोगाट गई थीं वह पूरा नेता वाला गेटअप था। विनेश फोगाट जिस तरह से एक आंदोलनकारी के रूप में उभरकर सामने आये हैं उससे यह लगता कि वह उनका चेहरा विधायक या सांसद बनने वाला चेहरा नहीं है बल्कि वह एक क्रांतिकारी क्रांतिकारी का है। देखने की बात यह भी है कि अधिकतर आंदोलन में विनेश फोगाट के साथ बजरंग पूणिया औेर साक्षी मलिक भी रहे हैं। किसान आंदोलन में यह किसान क्यों नहीं पहुंचे क्या ये लोग किसन नहीं हैं ?
वैसे पहलवानों के आंदोलन से लेकर अब तक के विनेश फोगाट के संघर्ष की समीक्षा की जाए तो विनेश फोगाट न तो आंदोलन में झुकीं और न ही आंदोलन को खत्म कराने के लिए किये गये केंद्र सरकार के प्रयास के आगे। उल्टे विनेश फोगाट ने अपने को हर जगह साबित किया। जब गृहमंत्री अमित शाह ने पहलवानों की समस्या को सुनने के लिए बुलाया तो साक्षी मलिक और बजरंग पूणिया ने तो अमित शाह के साथ मीटिंग की पर विनेश फोगाट वहां नहीं पहुंची। ऐसे ही तत्कालन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीटिंग की तब भी विनेश फोगाट ने मीटिंग से दूरी बनाकर रखी। मतलब विनेश फोगाट को अपनी जिंदगी में समझौते नहीं करने हैं।

 

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