श्रीलंका में चल रही ट्राई सीरीज में श्रीलंका ए के खिलाफ भारत के मैच के बाद हुई एक घटना की वजह से 15 साल के शानदार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी चर्चा में आ गए हैं। मैच के बाद श्रीलंका के खिलाड़ी के साथ हुई धक्का मुक्की ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। इस विवाद के बीच आइए जानते हैं कि वैभव सूर्यवंशी के पिता क्या करते हैं और वे क्रिकेटर क्यों नहीं बन पाए।
एक किसान का सपना
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी मुख्य रूप से एक किसान हैं और उन्होंने पहले एक छोटी सी दुकान भी चलाई थी। अपने बेटे के क्रिकेट स्टार बनने से काफी पहले संजीव ने खुद भी इस खेल में बड़ा नाम कमाने का सपना देखा था. उन्हें क्लब स्तर का एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर माना जाता था और उन्हें उम्मीद थी कि वे मैदान पर अपना प्रोफेशनल करियर बना पाएंगे।
हालांकि हालात ने उन्हें अपनी ख्वाहिश को आगे बढ़ाने से रोक दिया। परिवार की आर्थिक तंगी की वजह से उनके लिए बेहतर कोचिंग और कॉम्पिटिटिव क्रिकेट से जुड़े खर्च उठाना नामुमकिन था। साथ ही बिहार में क्रिकेट का इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित था और राज्य के क्रिकेट एसोसिएशन को बीसीसीआई से पूरी मान्यता नहीं मिली थी. इस वजह से स्थानीय खिलाड़ियों के आगे बढ़ने का मौका कम हो गया था।
संजीव के क्रिकेट सफर में सबसे बड़ी बाधा आर्थिक तंगी ही थी। क्रिकेट में कोचिंग, सामान, यात्रा और टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है और उनके परिवार के लिए इन सब का खर्च उठाना मुश्किल था। इसके अलावा उनकी जवानी के दिनों में बिहार में सही पहचान और क्रिकेट के मौकों की कमी ने भी उनके ऊंचे स्तर तक पहुंचने की संभावना को कम कर दिया था।
बेटे के सपने को मिशन में बदला
अपनी खुद की क्रिकेट की ख्वाहिशों को पूरा न कर पाने की वजह से संजीव ने खुद को पूरी तरह से वैभव की सफलता में मदद करने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने बेटे के विकास और ट्रेनिंग पर ध्यान देने के लिए अपना काम और बिजनेस छोड़ दिया। जो एक पिता के सहयोग के तौर पर शुरू हुआ था वह धीरे-धीरे एक फुल-टाइम मिशन बन गया।
वैभव को अच्छी कोचिंग मिल सके इसके लिए संजीव ने परिवार की पुश्तैनी खेती की जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया। उस पैसे का इस्तेमाल एकेडमी की फीस, यात्रा के खर्च और क्रिकेट ट्रेनिंग से जुड़े दूसरे खर्चों को पूरा करने में किया गया।
आज वैभव सूर्यवंशी भारत के सबसे होनहार युवा क्रिकेटरों में से एक बनकर उभरे हैं। एज ग्रुप क्रिकेट में उनके आगे बढ़ना, आईपीएल इकोसिस्टम में उनकी मौजूदगी और भारत के टी20 सेटअप से उनका जुड़ाव यह सब उनके परिवार की हिम्मत और कुर्बानी का फल है।






