सत्यम वर्मा व आकृति को रिहा करो

नोएडा के मजदूर आंदोलन में दर्ज हुई करीब 15 प्राथमिकी में कम से कम 60 लोग जेल में हैं। इनमें से पत्रकार सत्यम वर्मा व छात्रा आकृति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। शेष लोगों जिनमें सृष्टि गुप्ता, रूपेश राॅय, आदित्य आनंद, हिमांशु ठाकुर, मजदूर अमित कुमार व पंकज कुमार शामिल हैं। इनमें से कुछ छात्र, शोध छात्र व कुछ सामाजिक कार्यकर्ता हैं। कुछ मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़े हैं तो कुछ नौजवान भारत सभा से और शेष स्वतंत्र हैं। जिन आरोपों में ये बंद हैं उनमें हत्या का प्रयास, दंगा भड़काना, अवैध रूप से एकत्रित होना, जन सेवकों पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना, उनके काम में बाधा डालना, और आपराधिक साजिश शामिल हैं।
मजदूर आंदोलन मजदूरों के कुछ मौलिक मुद्दे उठा रहे हैं जिनका समाधान जरूरी है। न्यूनतम मजदूरी की मांग मासिक रु. 20,000 से रु. 26,000 तक की हो रही है जब कि अभी तो कुछ जगहों पर इसकी आधी मिल रही है। काम के घंटे एक लम्बे आंदोलन के बाद 8 निश्चित किए गए थे लेकिन अब उसे बढ़ाने की कोशिश हो रहीे है। हम मांग करते हैं कि काम के 8 घंटे के साथ कोई छेड़-छाड़ न हो और यदि मजदूर अतिरिक्त समय काम करना चाहे तो से बढ़े हुए घंटे की दोगुना मजदूरी दी जाए। ठेका व संविदा श्रेणी खत्म की जानी चाहिए व सभी भर्तियां नियमित रोजगार के लिए होने चाहिए। एक काम के लिए एक मजदूरी दर का सिद्धांत लागू किया जाए। कर्मचारी भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा की सुविधा हरेक मजदूर को मिलनी चाहिए ताकि उसे काम की जगह एक सुरक्षा का एहसास हो। मजदूरों के अधिकारों के साथ छेड़-छाड़ करते हुए जो चार मजदूर संहिताएं लाई गई हैं उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।
वर्तमान आंदोलन में जो उपर्युक्त कार्यकर्ता व मजदूर गिरफ्तार किए गए हैं उनका दोष सिर्फ इतना है कि वे मजदूरों की जायज मांगों के पक्ष में खड़े हुए। कई बार को सरकारी कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, भूतपूर्व सैनिक, आदि भी ऐसी ही मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं। अपने अधिकारों के लिए लड़ना तो हमारा संवैधानिक अधिकार है। यदि हम मजदूरों की जायज मांगों को नहीं मानेंगे और उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर करेंगे तो आंदोलन में होने वाली हिंसा के लिए सरकार ही दोषी मानी जाएगी।
हमारी मांग है कि सत्यम वर्मा, आकृति चैधरी समेत उन सभी लोगों को तुरंत रिहा किया जाए जो मजदूर आंदोलन में जेल भेजे गए हैं और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। बेहतर होगा यदि सरकार मजदूर आंदोलन को कानून और व्यवस्था की समस्या न मानते हुए मजदूरों द्वारा उठाए गए उपर्यक्त मुद्दों को हल करे।
मुन्नालाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सोशलिस्ट मजदूर सभा, 9452755765, अशोक, अध्यक्ष, बालागंज वार्ड, 9794644255, अमित मौर्य, अध्यक्ष, बाराबंकी, 9793125579, सलाहुद्दीन शिबू, प्रदेश अध्यक्ष, 7905817351, 9415462144, जगरूप प्रसाद, सदस्यता प्रभारी, 9125963622, संदीप पाएडेय, प्रधान महासचिव, सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया), 0522 2355978, 3564437
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