सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) गौतम बुध नगर जिला कमेटी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 15 मई को की गई उस टिप्पणी का पुरजोर स्वागत करती है, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि “राज्य का कर्तव्य है कि वह श्रमिकों के लिए जीवन-निर्वाह मजदूरी सुनिश्चित करे, उन्हें ‘आतंकवादी’ न बताए।”
ज्ञात हो कि 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के मजदूरों ने महंगाई और शोषण के खिलाफ अपनी मजदूरी बढ़ाने की जायज मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने आंदोलनकारी मजदूरों को ‘आतंकवादी’ और ‘वामपंथी सहानुभूति रखने वाले’ बताकर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की और कई एफआईआर दर्ज कर उन्हें कसना जेल में बंद कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां शामिल थे, ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए संविधान के अनुच्छेद 43 की याद दिलाई है। यह अनुच्छेद राज्य को सभी श्रमिकों के लिए जीवन-निर्वाह मजदूरी, सभ्य जीवन स्तर और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
सीटू गौतम बुध नगर की मांगें:
1. 13 अप्रैल के आंदोलन में गिरफ्तार सभी मजदूरों को तुरंत बिना शर्त रिहा किया जाए। 2. मजदूरों के खिलाफ दर्ज सभी झूठी एफआईआर और NSA की कार्रवाई तुरंत वापस ली जाए। 3. उत्तर प्रदेश सरकार मजदूरों को ‘आतंकवादी’ कहने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। 4. नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत सभी श्रमिकों के लिए संविधान के अनुसार ‘जीवन-निर्वाह मजदूरी’ तुरंत लागू की जाए। 5. पुलिस हिरासत में मजदूरों के साथ हुई कथित प्रताड़ना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
सीटू जिला कमेटी का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन सभी मेहनतकश मजदूरों की जीत है जो अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार का काम दमन करना नहीं, बल्कि श्रमिकों को उनका संवैधानिक अधिकार देना है। मजदूरों की जायज मांगों को दबाने के लिए उन्हें आतंकवादी बताना लोकतंत्र और संविधान का अपमान है।
सीटू गौतम बुध नगर जिला कमेटी, नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी मजदूरों से अपील करती है कि वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों और 18 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई तक अपना संघर्ष जारी रखें।






