पुतिन ने उड़ाया परमाणु बम बरसाने वाले बॉम्‍बर Tu-160M, दहशत में नाटो, भारत खरीदेगा रूसी महाविनाशक हथियार?

मास्को। यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को अपने सबसे घातक और आधुनिक सुपरसोनिक परमाणु बॉम्‍बर Tu-160M में उड़ान भरकर दुनिया खासकर पश्चिमी देशों को बड़ा संदेश दिया है। पश्चिमी देशों का दावा था कि रूस के हथियारों का खजाना खाली हो रहा है। अब पुतिन ने अपने सबसे घातक परमाणु बॉम्‍बर में उड़ान भरकर और उसकी फैक्‍ट्री को दिखाकर अपनी परमाणु क्षमता से दुनिया का परिचय कराया है। रूस के इस परमाणु बॉम्‍बर का नाटो का कोडनेम ‘ब्‍लैकजेट’ है। रूस का यह बॉम्‍बर सोवियत जमाने का है लेकिन अब रूस ने इसे एकदम आधुनिक बनाया है। यह रूसी बॉम्‍बर लंबी दूरी तक परमाणु हमला करने वाली मिसाइलों से लैस है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना रखता है लेकिन हमारे पास एक भी रणनीतिक बॉम्‍बर नहीं है। वहीं पूर्व एयरफोर्स चीफ ने पिछले दिनों संकेत दिया था कि चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत रूस से इसे खरीद सकता है।

माना जा रहा है कि पुतिन के इसे उड़ाने का मकसद जहां नाटो को संदेश देना था, वहीं भारत जैसे अपने दोस्‍त देशों को भी इसकी क्षमता से परिचय कराना था ताकि वे इसे खरीदने पर विचार करें। इस उड़ान के बाद पुतिन ने कहा कि यह बहुत ही विश्‍वसनीय और आधुनिक बमवर्षक विमान है जिसे रूसी वायुसेना अपने बेड़े में शामिल कर सकती है। उन्‍होंने कहा, ‘यह एकदम नई मशीन है और इसमें काफी कुछ नया है। यह कंट्रोल करने में आसान है और विश्‍वसनीय है।’ पुतिन ने करीब 30 मिनट तक इस विमान में को पायलट के तौर पर उड़ान भरी। पुतिन ने विमान की सुरक्षा और प्रदर्शन की प्रशंसा की। राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के अनुसार, पुतिन ने उड़ान से पहले किसी भी चिकित्सा जांच से नहीं गुजरे।
इससे पहले कज़ान एविएशन प्लांट की अपनी यात्रा के दौरान पुतिन ने 4 उन्नत टुपोलेव टीयू-160एम रणनीतिक बमवर्षकों का निरीक्षण किया। ये विमान 6,000 किमी दूर के लक्ष्यों पर मिसाइल दागने में सक्षम हैं। यह नाटो और उसके सहयोगियों से जुड़े भविष्य के संकटों या संघर्षों में हस्तक्षेप करने के लिए रूस की ताकत के प्रदर्शित करता है। तातारस्तान में एसपी गोर्बुनोव कज़ान एविएशन प्लांट ने चार टुपोलेव टीयू-160एम रणनीतिक बमवर्षकों को सफलतापूर्वक तैयार किया है। यह युद्ध के दौरान परमाणु और परंपरागत दोनों ही तरह के हमले करने में सक्षम है। इस मॉडल को दुनिया में सबसे तेज और सबसे भारी पेलोड ले जाने वाला बमवर्षक माना जाता है। यह साल 2030 के दशक में PAK-DA बॉम्‍बर के विकास तक रूस के रणनीतिक बमवर्षक बेड़े में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी टीयू-160, टीयू-160एम संस्करण के हैं या पुराने मॉडलों को बड़े पैमाने पर फिर से तैयार किया गया है। हालांकि, विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी बताती है कि कम से कम एक विमान का कारखाने में नवीनीकरण किया गया था। रूस ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में से एक, टीयू-160 व्हाइट स्वान का उत्पादन सफलतापूर्वक फिर से शुरू कर दिया है। अपग्रेड किया गया टीयू-160एम अपने पूर्ववर्ती के समान है और नई तकनीकी प्रगति और डिजिटल तकनीक से लैस है। क्रूज मिसाइलों से लैस यह विमान पश्चिमी देशों के लिए बड़ी चुनौती है।

 

भारत की रूस के परमाणु बॉम्‍बर पर नजर

 

भारतीय वायुसेना के पास अभी एक भी परमाणु बॉम्‍बर नहीं है। भारत का पड़ोसी और लद्दाख में हजारों सैनिक तैनात करने वाला चीन घातक परमाणु बॉम्‍बर बना चुका है। ऐसी अटकले हैं कि चीन के इस खतरे को देखते हुए भारत भी परमाणु बॉम्‍बर को रूस से लेने पर विचार कर रहा है। साल 2022 में पूर्व वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने एक चर्चा के दौरान भारत की एक रणनीतिक बॉम्बर विमान हासिल करने की योजनाओं का संकेत दिया था। राहा ने खुलासा किया था कि भारत रूसी टीयू-160 बॉम्बर पर बारीकी से विचार कर रहा है, जिसका यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से रणनीतिक बमवर्षक अमेरिका, रूस और चीन जैसी प्रमुख विश्व शक्तियों के पास रहे हैं। हालांकि भारत, चौथी सबसे बड़ी वायु सेना, रखता है लेकिन उसके पास केवल लड़ाकू विमान हैं। नवंबर 2021 में गलवान हिंसा के बाद चीनी वायु सेना ने भारतीय सीमा के पास एक लंबी दूरी के एच-6 के बॉम्बर को तैनात किया था। माना जा रहा है कि चीन के खतरे और पाकिस्‍तान के खिलाफ ठोस निरोधक हथियार के रूप में भारत परमाणु बॉम्‍बर खरीद सकता है।

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