सपा के सामने बीजेपी के कार्यक्रम से बड़ी रैली करने की चुनौती
28 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन तो 29 को दादरी में अखिलेश यादव की रैली
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी हैं रैली के संयोजक, देखने को मिलेगी गुर्जरों की ताकत
चरण सिंह
नई दिल्ली/नोएडा। गौतबुद्धनगर में यूपी विधानसभा चुनाव का पहला शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है। 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेवर आ रहे हैं और सीएम योगी भी उनके साथ होंगे। दूसरी ओर अगले ही दिन 29 मार्च को सपा प्रमुख अखिलेश यादव की दादरी में रैली है। बीजेपी के शक्ति प्रदर्शन में खुद सांसद महेश शर्मा और सभी विधायकों के साथ ही पूरी बीजेपी लगी है तो सपा की ओर से रैली के संयोजक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी, पूर्व जिलाध्यक्ष वीर सिंह यादव, फ़क़ीर चंद्र , नोएडा से प्रत्याशी रहे सुनील चौधरी और अध्यक्ष आश्रय गुप्ता के साथ सपा के सभी नेता लगे हैं। मतलब साफ है सपा के सामने बीजेपी से बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने की चुनौती है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने गौतमबुद्ध नगर से विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकने का निर्णय लिया है। महेंद्र भाटी और नरेंद्र भाटी की कर्मस्थली मानी जानी वाली दादरी में अखिलेश यादव की पहली रैली है। रैली के संयोजक सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी हैं। रैली की सफलता के लिए राजकुमार भाटी ने जान लगा दी है। चुनाव की पहली रैली में ही समाजवादी पार्टी के नेताओं के सामने बड़ी चुनौती यह है कि एक दिन ही पहले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम है और क्षेत्र में सांसद से लेकर विधायक तक सभी बीजेपी से हैं। महेंद्र भाटी के पुत्र समीर भाटी राजनीति छोड़कर अपने कारोबार में लग गए हैं तो नरेंद्र भाटी बीजेपी में हैं।
हालांकि यह रैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मानी जा रही है पर राजकुमार भाटी का प्रयास यह है कि इस रैली में गुर्जरों की ताकत दिखाई जाए। राजकुमार भाटी काफी समय से गुर्जर समाज को एकजुट कर रहे हैं। सपा द्वारा गुर्जरों को दिए गए सम्मान के साथ ही उनकी भागीदारी की भी बात कर रहे हैं। देखने की बात यह है कि लोकसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद अखिलेश यादव पीडीए को लेकर बहुत उत्साहित हैं। पीडीए से ही बीजेपी को चुनौती पेश कर रहे हैं। वह बात दूसरी है सपा पर विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं। सपा संगठन चलाने का तरीका भी बदल गया है। देखने में मिल रहा है कि बीएसपी की तर्ज पर सपा संगठन चल रहा है। सपा भी बीएसपी की तरह आंदोलन से परहेज करती दिखाई दे रही है। उधर विभिन्न समस्याओं को लेकर लोग योगी सरकार से नाराज भी बताए जा रहे हैं। सपा के सामने यह भी चुनौती है कि वह योगी सरकार से नाराजगी को कितना भुना पाती है।
दरअसल अखिलेश यादव पीडीए मतलब पिछड़ा, अल्पसंख्यक और दलित बता रहे हैं। कहीं कहीं पर उनके कार्यकर्ता अल्पसंख्यक की जगह अगड़ा भी बोल देते हैं। जैसा क्षेत्र वैसा ही नाम। यदि अखिलेश यादव के भाषणों और बयानों की समीक्षा करें तो समाजवाद और समाजवादी पार्टी कम और पीडीए ज्यादा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को यह बात समझ की जरूरत है कि लोकसभा चुनाव में संविधान और आरक्षण का मुद्दा ज्यादा उभर कर सामने आया था। विधानसभा चुनाव में ये मुद्दे प्रभावी नहीं हो सकते। वैसे भी विधानसभा उप चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने 10 में से 9 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम किया था। कहा जाता है कि फर्स्ट इम्प्रेशन इस लास्ट इम्प्रेशन। ऐसे में समाजवादी पार्टी के सामने बड़ी चुनौती यह है कि रैली को बीजेपी के कार्यक्रम से बड़ा कैसे किया जाए।







