अमेरिका से ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान
नई दिल्ली। 10 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और विभिन्न श्रमिक संगठनों द्वारा देशव्यापी ‘जेल भरो’, ‘सड़क रोको’ और ‘चक्का जाम’ आंदोलन का आह्वान किया गया है। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने, सभी फसलों पर C2+50% फॉर्मूले के तहत कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने, व्यापक कर्ज माफी और श्रम संहिताओं को रद्द करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर किया जा रहा है। इस आंदोलन का निर्णय 28 जुलाई को दिल्ली आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा के और 29 को ट्रेड यूनियनों के सम्मेलन में लिया गया था।
इस आंदोलन की प्रमुख मांगें एमएसपी (MSP) कानून मतलब सभी कृषि उपजों पर सी2+50% फॉर्मूले के साथ खरीद की कानूनी गारंटी। व्यापक कर्ज माफी मतलब किसानों के पूर्ण ऋण माफी और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा। भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अमेरिका के साथ हुई मुक्त व्यापार और ट्रेड डील का विरोध। बिजली और बीज विधेयक: प्रस्तावित बिजली निजीकरण विधेयक 2025 और बीज विधेयक को वापस लेने, श्रमिक अधिकार: चार श्रम संहिताओं को रद्द करना और मनरेगा (MGNREGA) के तहत मजदूरी व दिनों की संख्या बढ़ाने की हैं। 10 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर देश भर में प्रदर्शन और जेल भरो/सड़क रोको आंदोलन होगा। 17 अगस्त को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दरअसल मोदी सरकार अमेरिका के दबाव में भारत का कृषि क्षेत्र अमेरिका के किसानों के लिए खोलने जा रही है। इस ट्रेड डील से भारत का किसान तबाह हो जाएगा, क्योंकि अमेरिका के किसान हजारों एकड़ जमीन हैं। ऐसे में अमेरिका के किसान शुरुआत में सस्ते उद्पाद देश में देंगे। इससे भारत का किसान दम तोड़ने लगेगा। मोदी सरकार अमेरिका के दबाव में जो निर्णय ले रही है उससे किसान संगठनों में आक्रोश है।






