विषय: समस्त कार्यकर्ताओं और निवेशकों के साथ किए गए विश्वासघात, SEBI-पोर्टल के षडयंत्र और तालाबंदी के विरुद्ध 15 दिनों की ‘अंतिम चेतावनी’।
मैं, कन्हाई साह, सोशल और कॉरपोरेट एक्टिविस्ट के नाते, प्रबंधन के शीर्ष नेतृत्व और पूरे बोर्ड को यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि अब हमारे सब्र की सीमा समाप्त हो चुकी है। ढाई साल तक हमने प्रबंधन का पूर्ण साथ दिया, लेकिन आपने केवल विश्वासघात किया है। अतः, निम्नलिखित बिंदुओं पर मैं आपका अंतिम स्पष्टीकरण चाहता हूँ:
मुख्य बिंदु और सवाल:
. २.५ साल का विश्वासघात: आपने ढाई साल तक हमें केवल झूठे आश्वासन दिए। नेतृत्व का बिना किसी संदेश के बाहर निकल जाना सिद्ध करता है कि आप सबको ‘लावारिस’ छोड़ चुके हैं।
2. संपत्ति डील पर स्पष्टता: अडानी ग्रुप के साथ हो रही ८८ संपत्तियों की गुप्त डील और संस्था की तालाबंदी की साजिश पर प्रबंधन तुरंत श्वेत-पत्र (White Paper) जारी करे।
3. शाखाओं का संचालन: भारत की सभी बंद शाखाएं तुरंत चालू की जाएं। फ्रेंचाइजी मैनेजरों की समस्याओं को दूर करें और भ्रष्ट प्रबंधकों को हटाकर नई नियुक्ति करें।
4. सर्वोच्च प्राथमिकता – मृतक कर्मी: आर्थिक तंगी से आत्महत्या करने वाले सहारा कर्मियों के परिवारों को प्राथमिकता पर पूरा भुगतान (मूलधन + ब्याज + बोनस) तत्काल दिया जाए।
5. वरिष्ठ नागरिक और विशिष्ट योजनाएं: MIS, Global Golden, संचय, E-scoot Rental, EdenGuru, Winds, Healthurium और अन्य के निवेशकों का भुगतान तत्काल सुनिश्चित हो।
6. कर्मियों और कार्यकर्ताओं का हक: ऑन-रोल कर्मियों का वेतन, PF बकाया, ग्रेच्युटी और कार्यकर्ताओं का फ्यूचर फंड, कमीशन, बोनस व इंसेंटिव तत्काल प्रभाव से देने की योजना बनाई जाए।
7. CRCS पोर्टल का पर्दाफाश: २०२३ में पोर्टल बनने के बाद भी आपने आज तक इसे चुनौती (Challenge) क्यों नहीं दिया? आपने सुप्रीम कोर्ट में यह यचिका क्यों नहीं लगाई कि पोर्टल विफल है और हमें सीधे शाखाओं (Branch) से भुगतान करने की अनुमति दी जाए? ऐसा प्रतीत होता है कि आप जानबूझकर पोर्टल की आड़ में भुगतान रोककर बैठे हैं। पोर्टल का यह ‘चुहे-बिल्ली का खेल’ अब नहीं चलेगा।
8. SEBI की विफलता: SEBI द्वारा हाल ही में की गई ₹14,106 करोड़ की नई डिमांड का हम कड़ा विरोध करते हैं। प्रबंधन SEBI की १३ वर्षों की विफलता का पर्दाफाश करे और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दे।
निर्णायक अल्टीमेटम और चेतावनी (Final Warning):
मैं प्रबंधन को केवल १५ दिनों (15 Days) का समय दे रहा हूँ। इस अवधि के भीतर चेयरमैन स्वप्ना रॉय जी और अन्य बोर्ड डायरेक्टर्स मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया) के सामने आकर अपना स्पष्ट रोडमैप जनता के सामने रखें।
यदि १५ दिनों के भीतर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई, तो मैं समस्त निवेशकों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रबंधन के विरुद्ध लोकतांत्रिक (Democratic) तरीके से देशव्यापी जन-आंदोलन शुरू करूँगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
“अब और नहीं सहेगा कार्यकर्ता, अब और नहीं रुकेगा निवेशक!”








