जिद्दीपन के चलते खुद भी बे मौत मरा और सहारा कर्मचारियों-निवेशकों को मरने के लिए छोड़ गया सुब्रत रॉय! 

चरण सिंह 
यह फोटो गौर से देखिये। फोटो सहारा के सरगना सुब्रत राय की है। इस फोटो में यह कितना बेबस, कमजोर, अकेला और मजबूर दिखाई दे रहा है। इसकी यह स्थिति जिद्दीपन नीयत खराबी के चलते हुई। इस व्यक्ति को जिसने करीब से देखा है वह इसके बारे में भलीभांति जानता है कि इसने कैसे जनता के पैसे पर अय्याशी की और दूसरों को कराई। आज़ादी के बाद यदि भारत की धरती पर सबसे अधिक मौज मस्ती किसी ने की है। सबसे अधिक रूतबा किसी ने दिखाया है। सबसे अधिक पैसा किसी ने उड़ाया है तो वह सुब्रत राय था। जनता की गाढ़ी कमाई को सुब्रत राय ने पानी की तरह बहा दिया। बे मौत मरे सुब्रत राय को अंत समय में बेटों के कंधे भी नसीब न हुए। निवेशकों और कर्मचारियों को भी दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ गया।
यह भी जमीनी सच्चाई है कि कोई कितना भी बड़ा शातिर हो पर उसे अपने कर्मों की सजा यहीं पर भुगतनी पड़ती है। सुब्रत राय के अंतिम दिनों में कोई उसे पूछने वाला नहीं था। वह बहुत बेबस, लाचार हो चुका था। सुब्रत राय को ईमानदार आदमी पसंद न था। उसके भ्र्ष्ट सिपहसालारों ने ही उसे और सहारा को गर्त में धकेल दिया। वैसे तो देश में कितने लोग ऐसे हुए हैं जो अपने को भगवान मानने लगे थे पर सहारा का मुखिया सुब्रत राय तो सहारा में भगवान ही बन बैठा था। सुब्रत राय वैसे तो अपने को मुख्य अभिभावक बताता था अपर जिस तरह की उनकी गतिविधियां ऐसी थी की उनको देखकर लगता था कि वह अपने को भगवान् की श्रेणी रखते हैं। सहारा में उनका अपना अभिवादन था। पहले गुड सहारा और फिर सहारा प्रणाम कहा जाने लगा था। उनके सबसे करीबी और सबसे बड़े चमचे ओपी श्रीवास्तव ने उसको सहारा श्री की उपाधि दी थी।
सहारा में उसको बड़े साहब या फिर सहारा श्री कहा जाता था। ये दो तस्वीर देखिये। एक उनके रुतबे के समय की है तो दूसरी गर्दिश के दिनों की। मतलब जिस परमात्मा ने उनको फर्स से अर्स पर बैठाया। उसी परमात्मा ने उनको जमीनी हकीकत भी एहसास करा दिया।
आज भले ही सहारा के निवेशक और कर्मचारी अपने पैसे के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हों। कितने कर्मचारियों और निवेशकों ने आत्महत्या कर ली हो पर सुब्रत राय ने गरीबों की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाया। यह पैसा उन्होंने बॉलीवुड पर, खेल जगत पर नेतागिरी पर और अय्याशी में उड़ाया। जिद्दीपन इतना की कि किसी की सुननी ही नहीं थी। नौटंकी तो बहुत थी।
सहारा में न्याय दिलाने के लिए उन्हने कर्तव्य काउंसिल भी बनाई गई पर इससे किसी कर्मचारी को कोई खास फायदा नहीं हुआ। मतलब यह कर्तव्य काऊंसिल किसी को न्याय न दिला सकी। एक समय था कि सहारा से अमर सिंह, अमिताभ बच्चन, कपिल देव, राज बब्बर, जय प्रदा, तीन शेषन, नामवर सिंह जैसे दिग्गज जुड़े हुए थे। 2004 में जब सुब्रत राय अपने दोनों बेटों सीमांतो राय और सुशांतो राय की शादी कराई तो इसी सहारा शहर में जिसमें उत्तर प्रदेश का विधानसभा भवन बनने जा रहा है वहां पर देश के एक से बढ़कर एक दिग्गज पहुंचे थे। यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी पहुंचे थे।
आज की स्थिति यह है कि नोएडा के मीडिया परिसर में कर्मचारियों का धरना चल रहा है। सहारा शहर उत्तर प्रदेश सरकार ने कब्ज़ा लिया है। ओपी श्रीवास्तव जमानत पर बाहर आया है। सुब्रत राय के बेटे भगोड़े घोषित हो चुके हैं। छोटा भाई जयब्रत राय दुबई में रह रहा है। सहारा के डायरेक्टर अपनी गर्दन बचाने में लगे हैं और कर्मचारी और निवेशक अपने पैसों के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं।
यह सुब्रत राय का जिद्दीपन ही था कि उनको सलाह देनी की औकात सहारा में किसी की नहीं थी। सबको आदेश का पालन करना था। हां हम लोग न केवल सुब्रत राय को सलाह देकर आए बल्कि ललकार कर भी आए।  दरअसल जब 2015-16 में सहारा मीडिया में बकाया वेतन को लेकर आंदोलन हुआ तो सुब्रत राय ने 12 आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल तिहाड़ जेल बुलाया। सुब्रत राय निवेशकों से ठगी के मामले में तिहाड़ जेल में बंद थे। उस समय मैंने खुद सुब्रत राय से कहा था कि आपको सेबी को 500 करोड़ रुपए देने हैं। और आपके एक पत्र पर 1250 करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं तो 500 करोड़ रुपए सेबी को दे क्यों नहीं देते ?
दरअसल सुब्रत राय जब निवेशकों से ठगी के मामले में तिहाड़ जेल भेजे गए तो उन्होंने अपने सभी कर्मचारियों और निवेशकों को एक पत्र लिखा कि उनको जेल से छुड़ाने में उनका आर्थिक सहयोग दें। उस समय सहारा में सुब्रत राय के प्रति ऐसी अंधभक्ति थी जैसे कि आज की तारीख में एक बड़े तबके में पीएम मोदी के प्रति है। किसी ने अपना और अपने बच्चों का पेट काटकर, किसी ने अपने बच्चों की फीस रोककर, किसी ने  अपनी पत्नी के जेवर बेचकर सुब्रत राय की आर्थिक मदद की। सुब्रत राय के उस पत्र पर 1250 रुपए जमा हुए थे।
सेबी को 500 करोड़ रुपए देने के नाम पर उन्होंने कहा कि उन्हें सेबी को पैसे देने नहीं बल्कि लेने हैं। 1250 करोड़ रुपए कर्मचारियों की ओर से मिलने पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी और मद में जरूरत थी। इसलिए उन्हें यह पत्र लिखना पड़ा। मतलब सुब्रत राय ने जेल में छुड़ाने के नाम पर अपने ही कर्मचारियों और निवेशकों को ठग लिया। खैर आंदोलन और चला। उसके बाद पैराबैंकिंग में भी आंदोलन चला। ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार, ऑल इंडिया जन सघर्ष न्याय मोर्चा, ठगी पीड़ितों की आवाज के साथ ही तमाम संगठन बने आंदोलन भी किया। कर भी रहे हैं। लीगली लड़ाई भी लड़ी जा रही है। निवेशकों के लिए सहारा रिफंड पोर्टल भी खुला। अडानी ग्रुप  बात भी सामने आई। कितनी प्रॉपर्टी की कुर्की की बात भी सामने आ रही है। सब कुछ हो रहा है पर पैसा नहीं मिल रहा है।
  • Related Posts

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    CJP Parliament March: सीजेपी के प्रदर्शन और सोनम वांगचुक पर BJP का बड़ा बयान, ‘भविष्य में…’

    • By TN15
    • July 20, 2026
    CJP Parliament March: सीजेपी के प्रदर्शन और सोनम वांगचुक पर BJP का बड़ा बयान, ‘भविष्य में…’

    ‘चलो संसद’ मार्च के बीच दिल्ली में नहीं हैं अरविंद केजरीवाल, पंजाब से बोले- ‘ये हमारे बच्चे हैं, PM इनसे बात करें’

    • By TN15
    • July 20, 2026
    ‘चलो संसद’ मार्च के बीच दिल्ली में नहीं हैं अरविंद केजरीवाल, पंजाब से बोले- ‘ये हमारे बच्चे हैं, PM इनसे बात करें’

    कारपोरेट घरानों के ताबेदारों के खिलाफ सोशलिस्टों की ललकार

    • By TN15
    • July 20, 2026
    कारपोरेट घरानों के ताबेदारों के खिलाफ सोशलिस्टों की ललकार

    जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज से दिल्ली पुलिस ने किया इनकार, प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजने के आए थे कई वीडियो

    • By TN15
    • July 20, 2026
    जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज से दिल्ली पुलिस ने किया इनकार, प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजने के आए थे कई वीडियो

    कमिश्नरी रीवा में सोनम वांगचुक के अलोकतांत्रिक हिरासत के विरोध में धरना

    • By TN15
    • July 18, 2026
    कमिश्नरी रीवा में सोनम वांगचुक के अलोकतांत्रिक हिरासत के विरोध में धरना

    सोनम वांगचुक का अनशन को भ्रमजाल का हिस्सा? केशव प्रसाद मौर्य बोले- जनता भ्रम में नहीं आएगी

    • By TN15
    • July 18, 2026
    सोनम वांगचुक का अनशन को भ्रमजाल का हिस्सा? केशव प्रसाद मौर्य बोले- जनता भ्रम में नहीं आएगी