दिल्ली में पड़ रही भीषण गर्मी (Heatwave) और लगातार बढ़ते तापमान ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जलीय जीवों का भी हाल बेहाल कर दिया है. पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित प्रसिद्ध कृत्रिम ‘संजय झील’ (Sanjay Lake) में सैकड़ों की तादाद में छोटी-बड़ी मछलियां मर गई हैं.
पानी की सतह पर तैरती और किनारों पर लगी इन मरी हुई मछलियों के कारण पूरे इलाके में भयंकर बदबू फैल गई है. इस झील के रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की है, लेकिन प्रशासन इस त्रासदी से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है.
सुपरवाइजर राम बरन बोले- पानी कम और गर्म होने से मरीं मछलियां
संजय झील की देखरेख में लगे गार्डन सुपरवाइजर राम बरन ने इस भयावह स्थिति की असल वजह बताई है. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि चिलचिलाती गर्मी के कारण झील में पानी लगातार कम होता जा रहा है. तेज धूप में जो थोड़ा पानी बचा है, वह भी बहुत ज्यादा गर्म हो गया है. इसी उबलते पानी और घटते जलस्तर के कारण मछलियां तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा रही हैं.
सूख रही है झील, बोरिंग की हालत भी खस्ता
संजय झील में पिछले कई महीनों से पानी का स्तर लगातार घट रहा है. एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, तो दूसरी तरफ झील को पानी की आपूर्ति करने वाले आसपास के बोरिंग (ट्यूबवेल) भी पूरी तरह खस्ताहाल पड़े हैं. बोरिंग खराब होने से न तो झील में नया पानी आ पा रहा है और न ही आसपास लगे पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है. पानी के अभाव में झील का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बुरी तरह चरमरा गया है.
DDA अधिकारियों ने मूंदी आंखें, उठ रहे गंभीर सवाल
जब इस कृत्रिम झील का निर्माण किया गया था, तो इसके संरक्षण और देखरेख की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को दी गई थी. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में मछलियों के मरने और चारों तरफ बदबू फैलने के बावजूद अब तक कोई भी बड़ा अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं पहुंचा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अधिकारी समय रहते यहां आते और पानी की व्यवस्था करते, तो शायद मछलियों को मरने से बचाया जा सकता था. DDA अधिकारियों की इस लापरवाही ने उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर बढ़ती गर्मी में झील में पल रही मछलियों की मौत को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?






