बेदम सड़के – बेहाल जनता! जब निकलेगा दम तब जागेगा प्रशासन?

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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की देख रेख में मटियाला विधानसभा की मुख्य एवम व्यस्तम सड़के खस्ताहाल, जनता की जान की कोई परवाह नही: रणबीर सिंह सोलंकी

केंद्र व राज्य सरकार के वर्चस्व की लड़ाई, दिल्ली बना लापरवाह/भ्रष्ट अधिकारियों की राजधानी 

नई दिल्ली: मटियाला विधानसभा की सड़के खस्ताहाल है लेकिन प्रशासन सो रहा है, क्या दिल्ली की जनता की जिंदगी इतनी सस्ती है की कोई सुध नहीं ले रहा है।

इस विधानसभा की मुख्य एवम वयस्तम सड़को का जब यह हाल है तो बाकी रास्तों का तो भगवान ही मालिक है सही सुना, आजकल दिल्ली की जनता भगवान भरोसे ही जिंदगी जी रही है। क्योंकि दिल्ली का हर विभाग बंदर बांट कहानी का किरदार बंदर बना हुआ है और अधिकारी मलाई खा रहे है।

दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर डालने के लिए रोड कटिंग के बाद मटियाला विधानसभा की कई सड़को पर रेस्ट्रोटेशन के लिए एक करोड़ से अधिक पैसा कई विभागों को दिया गया जिसमे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को लगभग 27 लाख (2021- 2022) में, पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) को 5 लाख से अधिक (2022) में तथा दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को लगभग 83 लाख (2021- 2022) में दिया जा चुका है लेकिन इन सभी विभागो ने इतने साल बीत जाने के बाद भी उन सड़कों की सुध नहीं ली है।

रणबीर सोलंकी, समाजसेवी व चेयरमेन (फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रीक्ट वेलफेयर फोरम, दिल्ली) ने डीडीए को शिकायत पत्र दिया जिसमे द्वारका डाबरी रोड डीटीसी बस डिपो द्वारका से. 2 के साथ, ग्रेट मिशन स्कूल, द्वारका से. 5, तथा मधु विहार (आदर्श अपार्टमेंट द्वारका से. 3) बस स्टैंड से आकाश हॉस्पिटल, द्वारका से. 3 तक की सर्विस रोड कदम कदम पर गड्ढों से भरी पड़ी है, सड़को का हाल बयां किया और कहा की अगर किसी सड़क का पुनर्निर्माण या मरम्मत होती भी है तो वोह सड़के एक महीने के भीतर दम तोड देती है और फिर सड़को का हाल जर्जर हो जाता है इसलिए उन्होंने मुख्य अभियंता, जिला अधिकारी, उपराज्यपाल से मांग की है जब भी रोड बनाने वाला मैटेरियल बने उसकी जांच हो, वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए एवम संबधित विभाग के अधिकारी मौके पर अपने पर्यवेक्षण में काम करवाए और उनकी जवाबदेही तय हो साथ ही तीनों विभागो को जो सालों पहले डीजेबी अधिशाषी अभियंता (सी) डीआर XIV द्वारा 1 करोड़ से अधिक पैसा सड़क के रेस्टोरेशन के लिया मिला उसकी एसीबी जांच की जाए।
– महेश मिश्रा

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