आर्य ईश्वर की संतान है

वेद ईश्वर की वाणी है ।
यह पृथ्वी बनाकर ईश्वर ने आर्यों ( सत्य- आचरण शुद्ध- आचरण करने वाले लोगों को) को दी थी। यह अलग विषय है कि आज पृथ्वी पर अनेक मत- मतांतर फैले हुए हैं। जिनमें भिन्नता है। अशुद्धता है। मूर्खता है।
प्रारंभ में एक ही सब की भाषा संस्कृत थी।प्रारंभ में सबका एक ही वैदिक धर्म था।
ईश्वर की वाणी वेद ही सत्य है।

सत्य को प्रस्तुत करना, सत्यग्राही होना, सत्य को उद्घाटित करना ,सत्य को अंगीकार करना, सत्य को स्थापित करना, सत्य को सिद्ध करना, सत्य का आचरण करना, सत्य को अपने व्यवहार में धारण करना, उतारना आर्यों का परम धर्म है और उनके गुण है। आर्य समाज के नियम बनाते हुए महर्षि स्वामी दयानंद महाराज सरस्वती जी ने लिखा था कि असत्य को छोड़ने सत्य को स्वीकार करने में सर्वदा उद्यत (तत्पर अथवा तैयार) रहना चाहिए। महर्षि दयानंद के बनाए गए नियमों का पालन आर्य समाज के लोग नित्य निरंतर करते चले आ रहे हैं।
आज मैं आपको एक सत्य से अवगत कराने जा रहा हूं।
लोक में प्रचलित है कि लंका विजय करने के उपरांत तथा लंका का वैभव और सौंदर्य को देखकर लक्ष्मण जी का जब मन मचल गया तो लक्ष्मण ने राम से लंका में रहने का निवेदन किया था और श्री राम ने लक्ष्मण को निम्न प्रकार उपदेश किया था।

“अपि स्वर्णमई लंका न मे लक्ष्मण रोचते।
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।
अर्थात (हिंदी अनुवाद)
हे लक्ष्मण! यह सोने की लंका भी मुझे पसंद नहीं है क्योंकि माता और मातृभूमि यह दोनों स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।
परंतु यह श्लोक हमें रामायण के किसी भी संस्करण में उपलब्ध नहीं हुआ हो सकता है हमारे पढ़ने अध्ययन करने और देखने में त्रुटि रह गई हो यह श्लोक रामायण में हो अथवा न हो इससे यह तो स्पष्ट होता है कि राम ने लंका पर जो आक्रमण किया था उसका कारण राज्य लिप्सा नहीं था। इसलिए राम का आदर्श-शील दर्शनीय है।
यदि आपने कहीं रामायण में, विशेष रूप से महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में किसी भी संस्करण में ऐसा पढा हो तो कृपया मुझे भी बताने का और मार्गदर्शन करने का कष्ट करें।
परंतु यदि नहीं मिलता है तो फिर इस शब्द को ग्रहण करने का कष्ट करें कि राम ने कदापि ऐसा नहीं कहा बल्कि यह एकमात्र प्रक्षेप है। आप सब विचारशील लोग भविष्य में कभी इस प्रकार का श्लोक बोलकर भ्रांति को नहीं फैलाएंगे ऐसा मुझे विश्वास है।
(बाल्मीकि रामायण पृष्ठ संख्या 556 ,युद्ध -कांड सर्ग 62) परमहंस स्वामी जगदीश्वरानंद सरस्वती अनुवादक, संपादक एवं टिप्पणी कर्ता की टिप्पणी के आधार पर लिखा गया है।
आप सुदी जनों की शंका के समाधान के लिए मैं संबंधित प्रसंग की छाया प्रति भी साथ में नत्थी कर रहा हूं।
देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट 

  • Related Posts

    पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त की तारीख तय!
    • TN15TN15
    • March 11, 2026

    नई दिल्ली। देश भर के करोड़ों किसानों के…

    Continue reading
    Sahara : निष्ठा और लगन की एक पहचान बनकर आए हैं ?
    • TN15TN15
    • March 10, 2026

    एक सहारा सबका सहारा सामूहिक उन्नति का नारा।…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!

    ना गैस, ना चूल्हा-इंडक्शन पर फूली-फूली, रुई जैसी नरम रोटी बनाएं!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    ना गैस, ना चूल्हा-इंडक्शन पर फूली-फूली, रुई जैसी नरम रोटी बनाएं!

    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज

    • By TN15
    • March 12, 2026
    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज

    विनाश की नींव पर खड़ी…

    • By TN15
    • March 12, 2026
    विनाश की नींव पर खड़ी…

    THE WHITE MEN’S BURDEN

    • By TN15
    • March 12, 2026
    THE WHITE MEN’S BURDEN

    न बचेगी ट्रम्प शाही …

    • By TN15
    • March 11, 2026
    न बचेगी ट्रम्प शाही …