विनाश की नींव पर खड़ी…

पेड़ के कटने का मतलब है, अपने पैरों पर कुल्हाड़ी…!!

धरती की चिंता है व बेचारे चीखते..!!

 

आज भी पेड़ों के कटने की रफ्तार कम नहीं हो रही! विकास से किसे इनकार होगा? जो भी व्यक्ति प्रगतिशील दुनिया की अपेक्षा करता है, उसका हिस्सा बनना चाहता है, वह कभी विकास विरोधी नहीं हो सकता। बल्कि वह पर्यावरण का बेहतर और संवेदनशील प्रेमी हो सकता है, जो विकास और पर्यावरण, दोनों के बीच जरूरी संतुलन के बारे में सोचता है!धरती का एक पेड़ कटता है, तो न जाने कितने पंछी इधर से उधर हो जाते हैं। एक पेड़ के कटने का मतलब है धरती की एक बड़ी छाया लुप्त हो गई। एक पेड़ काटने का मतलब है पर्यावरण का बड़ा नुकसान। एक पेड़ के कटने का मतलब है, अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना। मगर दुर्भाग्य की बात है कि विकास के नाम पर वर्षों से लगे हरे-भरे पेड़ काट दिए जाते हैं। कुछ पेड़ तो सदियों पुराने होते हैं। विकास से किसे इनकार होगा, लेकिन पर्यावरण-प्रेमी समझ नहीं पाते कि यह विकास की कैसी इमारत है, जो विनाश की नींव पर खड़ी हो रही है।कभी पर्यावरण संरक्षण की खूब बातें होती थीं लेकिन अब विकास तो हो रहा है लेकिन पर्यावरण समाप्त होता जा रहा है!देश के अन्य हिस्सों में भी लोग अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है। सवाल है कि क्या ऐसे लोग विकास की इच्छा नहीं रखते। जहां अफसरशाही राजनीति के सिर पर सवार हो जाती है, वहां विनाश ही नजर आने लगता है। ज्यादातर मामलों में यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि पेड़ों की कटाई या पहाड़ों की खुदाई के पीछे सरकार वे अफसरों का बड़ा हाथ होता है! ये सरकार व उनके अफसर वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर पर्यावरण की चिंता तो करते हैं, मगर बाद में अजीबोगरीब निर्णय लेकर पर्यावरण का सत्यानाश करने पर तुल जाते हैं। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं कि पर्यावरण का जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई कैसे होगी। आज पूरे देश का ऋतु चक्र गड़बड़ाया हुआ है। दुर्भाग्य की बात है कि वर्षों से यह खेल चल रहा है। पेड़ों की निरंतर कटाई हो रही है। सड़को व पहाड़ों की निरंतर खुदाई हो रही है। विकास के नाम पर कुछ चौड़ी सड़कें बन रही हैं। कुछ कारखाने स्थापित हो रहे हैं, लेकिन इसके एवज में जो बड़ा नुकसान हो रहा है, वह पता नहीं क्यों, किसी को दिख नहीं रहा। यह हरी-भरी उपजाऊ धरती पेड़ों से जितनी भरपूर रहेगी, उतना ही पर्यावरण स्वस्थ रहेगा। पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा। पेड़, नदी, पहाड़- ये सभी पर्यावरण का संतुलन कायम करते हैं। पेड़ कट रहे हैं और नदियां प्रदूषित हो रही हैं। पहाड़ की छाती पर हथौड़े चल रहे हैं, जिसके कारण प्रकृति की आत्मा आहत हो रही है। यह बुनियादी बात है, लेकिन इसे समझने वाले लोग कम होते जा रहे हैं। यही कारण है कि बिना किसी झिझक या हिचक के, एक नहीं, सैकड़ों, और हजारों पेड़ काट दिए जाते हैं। यह देख कर धरती चीत्कार उठती है, लेकिन उसके आर्तनाद को सुनने वाले कहीं और मस्त रहते हैं!जिन्हें इस धरती की चिंता है, वे बेचारे चीखते रह जाते हैं। मुट्ठी भर लोग आंदोलन करते हैं। डंडे खाते हैं, और हताश होकर बैठ जाते हैं। पर्यावरण के विनाश के विरुद्ध आवाज उठती रहती है, लेकिन वे आवाजें नक्कारखाने की तूती की तरह होती है। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। ये आवाजें उठती हैं और धीरे-धीरे खामोश हो जाती हैं।

  • Related Posts

    दलित चेतना और लोकतंत्र का संकट

    मुदनाकुडु चिन्नस्वामी   चुनाव चाहे कितनी भी नियमितता…

    Continue reading
    गाली गलौज, बदजुबानी क्या आंदोलन के लिए सेहतमंद है?

    दिल्ली शहर में नौजवान पीढ़ी जुल्म ज्यादती, गैर…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    SIR रद्द करो, मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दो !

    SIR रद्द करो, मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दो !

    प्रदर्शन के बीच हिरासत में Ex-CM ममता, केजरीवाल और विजयन, BJP बोली- अराजकता की कोशिश

    प्रदर्शन के बीच हिरासत में Ex-CM ममता, केजरीवाल और विजयन, BJP बोली- अराजकता की कोशिश

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाभियोग की मांग को लेकर किसान सभा व किसान एकता संघ का प्रदर्शन

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाभियोग की मांग को लेकर किसान सभा व किसान एकता संघ का प्रदर्शन

    सुनो ए ताना शाह

    सुनो ए ताना शाह

    ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए’, CJP प्रोटेस्ट से पहले SC की टिप्पणी

    ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए’, CJP प्रोटेस्ट से पहले SC की टिप्पणी

    ट्रेनें रद्द होने पर चिराग पासवान बोले, ‘युवाओं को कोई नहीं रोक सकता प्रभु’

    ट्रेनें रद्द होने पर चिराग पासवान बोले, ‘युवाओं को कोई नहीं रोक सकता प्रभु’