वैचारिक समाजवादी तैयार करने की ओर बड़ा कदम है युवा सोशलिस्ट सम्मेलन 

समाजवादी विचारधारा से ही हो सकता है देश में बदलाव

जेपी की भूमिका में आना होगा डॉ. प्रेम सिंह को

विभिन्न कॉलेजों में तैयार करने होंगे युवा आंदोलनकारी

आत्मसात करना होगा महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, अशफाक उल्ला खां, डॉ. लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, अब्दुल गफ्फार खान के विचारों को

युवा सोशलिस्ट पहल के अंतर्गत दिल्ली के राजेंद्र भवन में हुए दो दिवसीय युवा सोशलिस्ट सम्मेलन ने देश और समाज के लिए काम करने वाले युवाओं में उत्साह पैदा करने का काम किया है। जिस तरह से विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों, सोशल एक्टिविस्टों, पत्रकारों, शिक्षकों, वकीलों वैचारिक समाजवादियों और दूसरे प्रबुद्ध लोगों ने उत्साहपूर्वक सम्मेलन में भाग लिया और देश और समाज के प्रति समर्पण की भावना दिखाई उसके आधार पर कहा जा सकता है कि देश में अब सोशलिस्टों का एक वैचारिक आंदोलन खड़ा हो सकता है।

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह के मार्गदर्शन में हुए युवा सोशलिस्ट सम्मेलन में जिस तरह से शिक्षा नीति, चिकित्सा नीति, रोजगार, विकास नीति, संस्कृति नीति और अर्थ नीति पर चर्चा की गई। युवाओं ने खुलकर प्रश्न किए और विद्वान साथियों ने जवाब दिए। निश्चित रूप से समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा मिला है। ऐसे दौर में जब राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के नेताओं में डर का माहौल देखा जा रहा है। ऐसे में युवा सोशलिस्ट सम्मेलन में आए युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया।
सम्मेलन में जिस तरह से 10 साल के आंदोलन के रोडमैप की शुरुआत हुई है। उससे समाजवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा रास्ता बना। निश्चित रूप से मौजूदा सरकार लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखती है। अंग्रेजी हुकूमत की तरह आंदोलन को कुचलने में विश्वास रखती है पर मेरा मानना यह है कि सत्ता में बैठे लोग आंतरिक से कमजोर हैं। राजनीतिक नुकसान होता देख ये लोग बैकफुट पर भी आ जाते हैं। जैसा कि तीन काले कृषि कानूनों के मामले में किसान आंदोलन के सामने घुटने टेके थे। मेरा मानना है कि यदि युवा साथियों को विश्वास में लेकर इच्छाशक्ति के साथ आंदोलन हुआ तो यह आंदोलन देश को एक दिशा देने का काम भी कर सकता है।
जो लोग आंदोलन करने से बचते हैं। डरते हैं वे यह भी सोच लें कि आंदोलन के नाम पर देश के राजनीतिक दलों का एक भी नेता जेल में बंद नहीं है। जेल तो समाजवादियों का घर माना गया है। जिन समाजवादियों के नाम पर हम अपने पर समाजवादी होने पर गर्व करते हैं वे तो आज़ाद भारत में कई बार जेल गए।
डॉ. सुनीलम, प्रशांत भूषण, मेधा पाटकर, योगेंद्र यादव, अशोक वानखेड़े समेत कितने सोशलिस्ट एक्टिविस्ट खुलकर सरकार को ललकारते हैं। क्या इन लोगों को गिरफ्तार किया गया ? एक तो डरा हुआ आदमी समाजवादी नहीं हो सकता। दूसरा समाजवादी जेल जाने और डंडे खाने से नहीं डरते हैं। इसमें दो राय नहीं कि आज की तारीख में समाजवाद के नाम पर राजनीति करने वाली पार्टियों ने सबसे अधिक नुकसान समाजवाद का ही किया है। इन दलों ने कार्यकर्ता नहीं गुलाम तैयार किए हैं। जो जितनी बढ़िया चाटुकारिता कर ले वह इनके लिए उतना ही बड़ा कार्यकर्ता। यदि कोई युवा अच्छा बोल ले तो अगले दिन उसको मंच पर ही नहीं चढ़ने देंगे। इन दलों ने राजनीति से विचार को ख़त्म कर भेड़ चाल कार्यकर्ता तैयार किए हैं।
युवा सोशलिस्ट पहल के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रमों में युवाओं को न केवल मंच दिया जाएगा बल्कि उनको आगे भी बढ़ाया जाएगा। देश में वैचारिक सोशलिस्ट तैयार होंगे। हम लोग युवा साथियों के मान सम्मान और अधिकार के लिए लड़ेंगे। देश का सबसे अधिक नुकसान जाति और धर्म की राजनीति कर रही है। यह भी जमीनी हकीकत है कि समाजवादी विचारधारा से ही जाति-धर्म की राजनीति खत्म की जा सकती है। क्या भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस, अशफाक उल्ला खां, अब्दुल गफ्फार खान, डॉ. राम मनोहर लोहिया, लोक नायक जयप्रकाश, किशन पटनायक और आज़ादी की लड़ाई में अहम् भूमिका निभाने वाले दूसरे क्रांतिकारी अंग्रेजों के किसी दमन के आगे झुके थे ? क्या इन लोगों ने किसी जाति धर्म विशेष के लिए आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी ? क्या इन नेताओं की पहचान जाति-धर्म विशेष से थी ?
भले ही गलत ढंग से की हों पर बीजेपी ने अपनी जड़ें बहुत मजबूत कर ली हैं। चांदी की चम्मच लेकर पैदा होने वाले नेताओं से बदलाव होने वाला नहीं है। वैचारिक युवा समाजवादी ही बदलाव कर सकते हैं। जेपी आंदोलन वाला माहौल बनाना होगा। प्रेम सिंह जी को जेपी की भूमिका में आना होगा। सड़कों पर उतरे बिना कुछ नहीं होने वाला है। सभी साथियों को बैठकर प्रभावी रणनीति पर काम करना होगा। यदि इच्छाशक्ति के साथ हम लोग आंदोलन कर ले गए तो निश्चित रूप से हम लोग सफल होंगे।
इंकलाब जिंदाबाद
चरण सिंह
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