सीतापुर। सहारा इंडिया में फंसी जमाकर्ताओं की जमा पूंजी को लेकर आजाद अधिकार सेना के जिला अध्यक्ष नवल किशोर मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सहारा इंडिया परिवार समय-समय पर रियल एस्टेट, हाउसिंग स्कीम, क्यू शॉप, यूनिक प्रोडक्ट रेंज लिमिटेड तथा विभिन्न सोसाइटियों के नाम पर अपनी योजनाओं का स्वरूप बदलता रहा, लेकिन सरकार और जिम्मेदार एजेंसियां वास्तविक स्थिति का पता नहीं लगा सकीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सहारा इंडिया परिवार की संपत्तियां लगातार बिकती रहीं, लेकिन सहारा-सेबी खाते में धन जमा नहीं कराया गया और गरीब जमाकर्ताओं को उनकी मेहनत की कमाई वापस नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि प्रभावशाली और काले धन से जुड़े लोगों ने अपना पैसा निकाल लिया, जबकि छोटे निवेशक आज भी भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं। नवल किशोर मिश्रा ने कहा कि देश के राजनीतिक दल चुनाव के समय केवल वोट मांगने का कार्य करते हैं, लेकिन करोड़ों जमाकर्ताओं की पीड़ा और उनके भुगतान के मुद्दे पर गंभीर चर्चा नहीं करते। सांसदों और विधायकों की चुप्पी आम जनता के साथ अन्याय को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र आम आदमी की अपेक्षाओं से दूर होकर पूंजीपतियों और परिवारवाद की राजनीति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां आम नागरिक के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि जमाकर्ताओं को न्याय नहीं मिला तो आम लोगों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। आजाद अधिकार सेना के जिला अध्यक्ष ने कहा कि देश के करोड़ों सहारा पीड़ित निवेशक वर्षों से अपनी जमा पूंजी वापस पाने की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं और सरकार को इस मामले में पारदर्शी एवं कठोर कार्रवाई करते हुए पीड़ितों का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।








