आखिर कंगना राणावत जैसों को क्यों जिता देते हैं लोग ?

चरण सिंह
ये जो राजनीतिक दल किसी को भी को टिकट दे देते हैं। ऐसे दलों को तब समझ में आता है जब ये लोग जीतकर अनाप-शनाप बातें करने लगते हैं। जैसे कि कंगना राणावत को भाजपा के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। अभी हाल ही में कंगना राणावत ने किसान आंदोलन पर उंगली उठाते हुए कहा था कि उग्रवादी आंदोलन कर रहे थे और आंदोलन में रेप और हत्याएं हो रही थीं। बीजेपी ने कंगना राणावत के उस बयान को उनकी निजी बयान बताते हुए किसी तरह से पल्ला झाड़ा था कि कंगना राणावत ने किसानों को लेकर फिर से विवादित बयान दे दिया। बयान भी ऐसा कि राजनीति में भूचाल आ जाये। जिन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का १३ महीने आंदोलन चला। ७५० किसानों ने दम तोड़ दिया। खुद प्रधानमंत्री ने देश से माफी मांगते हुए वे कृषि कानून वापस लिये। अब कंगना राणावत फिर से उन कृषि कानूनों को लागू करने की बात कर रही हैं। हालांकि वह यह भी मान रही हैं कि उनके बयान पर विवाद हो सकता है। मतलब कंगना राणावत ने खुद ऐसा बयान दिया जिस पर विवाद हो। ऐसे में भाजपा कंगना को कितने दिन तक झेलेगी।
दरअसल कंगना राणावत ने कहा है कि नये कृषि कानन वापस आने चाहिए और खुद किसान इन कानूनों की मांग करें। कांग्रेस ने कंगना राणावत के बयान को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अब ये कानून वापस नहीं आएंगे भले ही भाजपा के सांसद इस ओर कितना भी प्रयास कर लें। कांग्रेस ने कहा कि जिन कानूनों के विरोध में ७५० किसान शहीद हो गये उन किसानों को भाजपा फिर से लाना चाहती है। अब ये कानून कभी वापस नहीं आएंगे। दरअसल कंगना राणावत को राजनीतिक बयान के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह तो प्रधानमंत्री की अंध भक्त हैं। इसलिए उनको मंडी से टिकट मिला औेर वह भी जीत गईं। कंगना राणावत जैसे लोगों को टिकट देने वाले दल देश के साथ विश्वास घात करते हैं। जब इन जैसे जनप्रतिनिधियों को कुछ पता ही नहीं है तो ये लोग अपने क्षेत्र के लिए क्या काम करेंगे ? देश और समाज के लिए इनकी क्या भूमिका रहेगी। कंगना राणावत तो देश को आजाद ही नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मान रही हैं। मतलब जिन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया, कुर्बानी दी वह सब कंगना राणावत की नजरों में बेकार है।
दरअसल कंगना राणावत ग्लैमर की दुनिया में रही हैं। उन्होंने लोगों की समस्याओं को करीब से नहीं देखा। उनको राजनीति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में उनकी कोई गलती नहीं है। गलती तो उस व्यक्ति ने की है जो कंगना राणावत को राजनीति में लेकर आया। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिरकार भाजपा ने कंगना राणावत को राजनीति में लाने का भाजपा का क्या मकसद था ? बस इसलिए कि वह मंडी से सीट निकाल लेंगी। ऐसे में उन जैसे लोगों का बहुत बुरा होता है जो जिंदगी भर पार्टी के लिए वफादार बने रहते हैं।

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