चरण सिंह
एक कहावत है कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर यह कहावत सटीक बैठ रही है। जब पर्चे लीक हुए, 22 बच्चों ने आत्महत्या की। जब जेन जी पर लाठियां बरसाई गई। गोलियां चलवाई गई। लड़कियों के साथ बदसलूकी की गई । जेन जी को दहशतगर्द बताया गया। तब मोहन भागवत कहां थे ? सो रहे थे क्या ? अब जब जेन जी ने माहौल बदल ही दिया। लोगों के अंदर का डर निकाल दिया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक की हेकड़ी निकाल दी। बीजेपी बांकीपुर और दतिया दोनों उप चुनाव सीट हार गई तो मोहन भागवत की नींद टूटी है। अब जेन जी और जेन अल्फ़ा की पैरवी करने का दिखावास कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें जेन जी कोई चिंता है। अब भी वह बीजेपी के वोटबैंक के लिए ही कर रहे हैं।
दरअसल बीजेपी और आरएसएस सर्वोच्च नेतृत्व दिल्ली जंतर मंतर पर हुए युवाओं के आंदोलन से सदमे में चला गया है। मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी और अमित शाह की समझ में नहीं आ रहा है कि जो युवा मोदी मोदी के नारे लगाते थकता नहीं था, मोदी की आलोचना सुनना पसंद नहीं करता था। वह इतना नाराज कैसे हो गया कि प्रधानमंत्री को भी भद्दी भद्दी गालियां दे डाली। भले ही पीएम मोदी ने वीडियो जारी कर गाली देने वाले युवाओं को माफ़ कर दिया हो पर वह भी जानते हैं कि उन्होंने इन युवाओं के साथ कैसा व्यवहार किया है। पीएम मोदी को लगता था कि यह युवा तो 5 किलो राशन में ही खुश है। अडानी और अंबानी को साधकर मनमानी करते रहो। लोगों का बेवकूफ बनाते रहो। कुछ भी करते रहो। कोई बोलने वाला नहीं है। सब डर गए हैं। मोदी की परेशानी इस बात को लेकर भी कि उन्होंने तो इस यूथ को रील बनाने में लगा दिया था। इन्होंने तो प्रधानमंत्री की ही रील बना दी।
पीएम मोदी को लगता था कि गृह मंत्री अमित शाह से पुलिस, सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स का डर दिखवाकर लोगों को चुप करते रहो। अमित शाह तो एक बदमाश की तरह गृह मंत्रालय चला रहे थे। जिसे चाहे मरोड़ दिया। मैनेज करने के लिए गोदी मीडिया लगा रखा था। पर यूथ के सामने न तो बीजेपी का आईटी सेल कुछ कर पाया। न पुलिस और न ही मीडिया। अब अमित शाह मुंह दिखाने से बच रहे हैं। अब जब बीजेपी के हाथ से बात निकल गई है तो युवाओं को साधने के लिए आरएसएस को लगाया गया है।
मोहन भागवत बताएं कि आरएसएस ने किसान, मजदूर, हर वर्ग की लड़ाई लड़ने का दावा करते हुए संगठन बना रखे हैं। इन संगठनों ने किस वर्ग के लिए कितनी लड़ाई लड़ी है। किस वर्ग का भला किया है। इन संगठनों का बस एक ही काम है कि बीजेपी के लिए वोटबैंक कैसे तैयार किया जाए। अब भी मोहन भागवत यह सब बीजेपी के वोटबैंक के लिए ही कर रहे हैं। मोहन भागवत भी जानते हैं कि ये युवा ही तो हैं जो सरकार बनाते और बिगाड़ते हैं।
दरअसल मोहन भागवत ने हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘जेन-जी’ (Gen Z) और ‘जेन अल्फा’ पीढ़ी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि विरोध प्रदर्शन करने वाले युवा देश विरोधी (एंटी-नेशनल) नहीं हैं, बल्कि यह संवाद की कमी का परिणाम है। मोहन भागवत ने कहा कि जेन-जी और जेन अल्फा की नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार, देशभक्त और सेवाभाव वाली है।
पुरानी पीढ़ी बड़ों की बात बिना सवाल किए मान लेती थी, लेकिन आज की युवा पीढ़ी हर बात का तार्किक जवाब और अपनापन चाहती है। हालिया छात्र आंदोलनों के संदर्भ में भागवत ने कहा कि यदि युवा सड़कों पर उतर रहे हैं या विरोध कर रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे देश के दुश्मन हैं। इसका अर्थ है कि उनकी बातें पहले नहीं सुनी गईं। अब भागवत को सब समझ में आ रहा है। आंदोलन के बीच भी मोहन भागवत का कोई बयान आया क्या ? क्या उन्होंने प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से बातचीत कर युवाओं से संवाद करने को कहा ? मोहन भागवत आंदोलन हुए लाठीचार्च के खिलाफ गृह मंत्री का इस्तीफा मांगें, युवाओं के लिए सड़कों पर उतरें।







