चरण सिंह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के मामले में राजनीति के जानकार पहले से ही कहते रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश में कोई विकल्प नहीं है। केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक जो कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लामबंदी कर रहे हैं वह अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। वैसे भी योगी आदित्नयाथ हर मामले में अव्वल रहे हैं। लोकसभा चुनाव का ठीकरा उनके सिर फोड़ा जाए, यह न तो भाजपा कार्यकर्ता मानने को तैयार हैं और न ही आम लोग। योगी आदित्यनाथ का चेहरा भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे नंबर का माना जाता है। ऐसे में यदि उत्तर प्रदेश के दो उप मुख्यमंत्री उनके खिलाफ लामबंदी करें तो उसे या तो बचकानी हरकत कहा जाएगा या फिर केंद्रीय नेतृत्व के शह पर इस कृत्य को करना। दिल्ली भी योगी के पक्ष में होगी, यह अंदाजा राजनीतिक पंडित लगातार लगा रहे थे।
देखने की बात यह है कि अपने दम पर दोबारा बीजेपी की सरकार उत्तर प्रदेश में बनवाने वाले योगी आदित्यनाथ का चेहरा बीजेपी में ऐसा है जो न केवल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बल्कि गृहमंत्री अमित शाह पर भी भारी पड़ रहा है। ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की क्या बिसात कि योगी आदित्यनाथ का कुछ बिगाड़ सकें। वैसे भी योगी आदित्यनाथ २०१७ में बिना पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के चाहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। जब पीएम मोदी और गृहमंत्री फुल पॉवर में थे तब योगी आदित्यनाथ दबाव में नहीं आये अब क्या दबाव में आएंगे जबकि अब तो भाजपा को अपने दम पर बहुमत भी नहीं मिला है।
यह योगी आदित्यनाथ की रणनीति ही है कि जो संजय निषाद उनके खिलाफ लामबंदी में केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ खड़े हो रहे थे अब वह योगी आदित्यनाथ को अपना मार्गदर्शक बता रहे हैं। जो ओपी राजभर केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर योगी के खिलाफ होने का संकेत दे रहे थे अब वह योगी आदित्यनाथ के पुलिस भर्ती के फैसले की सराहना कर रहे हैं। विधायक फतेह बहादुर सिंह भी योगी की फतेह के रास्ते खोल रहे हैं। भूपेंद्र सिंह चौधरी पहले ही कह चुके हैं कि यह जो मुख्यमंत्री को हटाने की बात चल रही है यह गलत है।
आज की तारीख में योगी आदित्यनाथ का चेहरा बीजेपी में इतना बड़ा हो गया है कि उन पर हाथ डालना नामुमकिन है। उत्तर प्रदेश में चुनाव किसने हरवाया, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है। योगी आदित्नयाथ का प्लस प्वाइंट यह है कि आरएसएस उनके साथ खड़ा है। मोहन भागवत उत्तर प्रदेश में गांव-गांव शाखा लगाने की बात कर चुके हैं। मतलब योगी को मजबूत बनाना है। कांवड़ मामले में भले ही सुप्रीम कोर्ट ने योगी के फैसले पर कैंची चला दी हो पर योगी लगातार हिन्दुत्व का संदेश रहे हैं।








