सहारा अडानी डील से खुश नहीं हैं निवेशक, आ रहे हैं सुप्रीम कोर्ट पर प्रोटेस्ट करने !

14 अक्टूबर को सहारा-सेबी विवाद की सुनवाई की कर रहा है,इस डील में प्राप्त धनराशि से निवेशकों को अपने पूर्ण मूलधन भी मिलने की संभावना नहीं लग रही है क्योंकि इसका खुलासा सुनवाई के दिन बन्द लिफाफे में दिया जाएगा परन्तु यह गुप्त डील संदेहास्पद है क्योंकि सहारा समूह ने जिन 88 सम्पतियों का जिक्र किया है उसमें से 2 संपत्ति (सहारा शहर और सहारा बाजार, लखनऊ) पर लीज खत्म होने की वजह से उतर प्रदेश सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है, झारखंड की 2 संपत्ति में एक पूर्व में बिक चुका है और दूसरा झारखंड के वन विभाग का है जो अपने कब्जे में ले रखा है,साहिबाबाद की संपत्ति का सेल एग्रीमेंट कुछ माह पहले ही किसी अन्य व्यक्ति के साथ हो चुका है और टोकन मनी भी सहारा समूह ले चुकी है,बड़ोदरा(गुजरात)की जमीन को भी राज्य भूमि विकास नीति के तहत कार्य न करने की वजह से वडोदरा DM ने संपति का रजिस्ट्रेशन को कैंसिल कर दिया है, वर्धमान (प.बंगाल) की संपत्ति भी पूर्व में बेची जा चुकी है जिसमे ख़रीददार द्वारा आंशिक निर्माण किया जा रहा है, मुम्बई की स्टार होटल भी AAI (एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ) द्वारा 29 वर्ष के लिए लीज पर दिया गया था जिसकी समयावधि संभवतः 2031 में पूरी हो रही है, वर्सोवा (महाराष्ट्र) की संपत्ति भी नो डेवलप जोन यानी दलदल की है जिसपर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थानीय विभाग और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के साथ संबंधित मंत्रालय से शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था जिसकी रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हुआ। इन सभी बातों के अलावा अभी अन्य सम्पतियों में भी कुछ विवाद धीरे धीरे खुलने की संभावना है जिससे इस डील को संभावित ही कहा जा सकता है। इस याचिका में सहारा समूह के शीर्ष अधिकारियों द्वारा अपने पास अवैध तरीके से बनाये अकूत संपत्ति का जिक्र नही किया गया है और ना ही समूह की विदेशी सम्पतियों का जिक्र किया गया है मगर समूह को समापक करने का अनुरोध किया गया है जबकि समूह समापक के समय निवेशकों की देनदारी के बराबर जबतक संपति नही दिख जाता है तबतक समूह के शीर्षस्थ अधिकारियों को किसी भी तरह का रियायत देने का प्रावधान नही होता है जैसे कि पूर्व में भी सहारा सेबी विवाद में सहारा समूह में भी देखा गया है कि कर्नल डी एस थापा जो कि एक निदेशक के पद पर थे, की मृत्यु के बाद उनके द्वारा परिवार के नाम पर अवैध तरीके से बनाई गई पूरी संपत्ति को जब्त कर लिया गया था।
इन सभी बातों को संज्ञान में लाते हुए आप सभी से अनुरोध है कि अपने व अपने परिवार की सम्पूर्ण धनराशि प्राप्त होने के प्रयास के लिए 14 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान में इस सभी को लाने के कुछ अपना खास पल का सहयोग देने के लिए 10 बजे सुबह सीधे सुप्रीम कोर्ट पधारें..!
नागेंद्र कुमार कुशवाहा
विश्व भारती जनसेवा संस्थान

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