नशे में तबाह होते युवा – कौन ज़िम्मेदार?

नशा युवाओं के जीवन का सबसे बड़ा शत्रु बनता जा रहा है।
यह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देता है।
इस समस्या के लिए केवल एक व्यक्ति या संस्था को दोष देना उचित नहीं होगा।
परिवार, समाज, फिल्म उद्योग, सरकार और स्वयं युवा— सभी की कुछ न कुछ ज़िम्मेदारी है।
यदि समय रहते हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ इस विष के कारण खो सकती हैं।
युवाओं को यह समझना होगा कि जीवन बहुत अनमोल है।
उनके सपने, उनका परिवार और उनका भविष्य किसी भी नशे से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लें—
“नशा नहीं, शिक्षा चुनेंगे।
विनाश नहीं, विकास चुनेंगे
स्वस्थ युवा ही मजबूत राष्ट्र की पहचान हैं।”
यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
आज प्रश्न यह उठता है कि आखिर युवाओं को इस विनाशकारी रास्ते पर कौन धकेल रहा है?
क्या इसके लिए परिवार ज़िम्मेदार है?
क्या समाज दोषी है?
क्या फिल्मों और सोशल मीडिया का प्रभाव है?
या फिर स्वयं युवा अपनी कमजोरी के कारण इस दलदल में फँस रहे हैं?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर खोजने का प्रयास इस लेख में किया गया है।
नशे की बढ़ती समस्या—पहले नशा केवल कुछ विशेष वर्गों तक सीमित माना जाता था, परंतु अब स्कूलों और कॉलेजों तक इसकी पहुँच हो चुकी है। छोटे-छोटे बच्चे भी सिगरेट, शराब और नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
आज कई युवा “स्टाइल”, “फैशन” और “मॉडर्न लाइफ” के नाम पर नशा शुरू करते हैं। शुरुआत अक्सर दोस्तों के कहने पर “सिर्फ एक बार” से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत लत बन जाती है।
नशा व्यक्ति के शरीर, मन, बुद्धि और भविष्य— सब कुछ नष्ट कर देता है।
जो युवा कभी माता-पिता के सपनों का आधार होते हैं, वही नशे के कारण अपराध, हिंसा, बेरोज़गारी और मानसिक तनाव की ओर बढ़ने लगते हैं।
युवाओं के नशे की ओर बढ़ने के कारण—गलत संगत
कहा गया है —
“जैसी संगति वैसी रंगति।”
कई युवा केवल गलत दोस्तों की वजह से नशे की शुरुआत करते हैं।
कॉलेज, पार्टियों या दोस्तों के समूह में खुद को आधुनिक और साहसी दिखाने के लिए वे नशा करना शुरू कर देते हैं।
शुरू में उन्हें लगता है कि वे कभी इसके आदी नहीं होंगे, परंतु धीरे-धीरे शरीर और मस्तिष्क इसकी मांग करने लगते हैं।
फिल्मों और सोशल मीडिया का प्रभाव—आज फिल्मों, वेब सीरीज़ और सोशल मीडिया में नशे को अक्सर “कूल” और “स्टाइलिश” दिखाया जाता है।
हीरो सिगरेट पीते हुए, शराब पीते हुए या ड्रग्स लेते हुए दिखाई देते हैं और युवा उन्हें अपना आदर्श मान लेते हैं।
हालाँकि फिल्मों में अंत में चेतावनी लिख दी जाती है*“धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है”*
लेकिन युवा उस चेतावनी से अधिक अभिनेता के स्टाइल को अपनाते हैं।
सोशल मीडिया पर भी कई तथाकथित “इन्फ्लुएंसर” नशे को आधुनिक जीवनशैली की तरह प्रस्तुत करते हैं।
यह युवाओं के मन पर गहरा प्रभाव डालता है।
परिवार की उपेक्षा—परिवार बच्चों का पहला विद्यालय होता है।
यदि माता-पिता बच्चों को समय नहीं देते, उनके मित्रों और गतिविधियों पर ध्यान नहीं देते, तो बच्चे गलत रास्ते पर जा सकते हैं।
कई बार माता-पिता स्वयं शराब या तम्बाकू का सेवन करते हैं। बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं।
यदि घर का वातावरण तनावपूर्ण हो, माता-पिता में झगड़े होते हों या बच्चों को प्रेम और संवाद न मिले, तो वे मानसिक शांति खोजने के लिए नशे की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
मानसिक तनाव और अकेलापन—आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में युवाओं पर पढ़ाई, करियर और सफलता का अत्यधिक दबाव है।
असफलता, बेरोज़गारी, प्रेम में धोखा, पारिवारिक तनाव और भविष्य की चिंता उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बना देती है।
कई युवा तनाव से बचने के लिए नशे का सहारा लेते हैं।
उन्हें लगता है कि नशा कुछ समय के लिए दुख भुला देगा, लेकिन वास्तव में यह दुख को और बढ़ा देता है।
बेरोज़गारी और निराशा—जब युवा मेहनत करने के बाद भी नौकरी नहीं पाते, तो उनमें निराशा बढ़ने लगती है।
खाली समय और हताशा उन्हें गलत आदतों की ओर धकेल सकती है।
कुछ युवा गलत लोगों के संपर्क में आकर ड्रग्स बेचने जैसे अपराधों में भी शामिल हो जाते हैं।
आसान उपलब्धता—आज कई स्थानों पर नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
स्कूल और कॉलेजों के आसपास भी तम्बाकू और सिगरेट की दुकानें दिखाई देती हैं।
यदि प्रशासन सख्ती से नियंत्रण करे, तो काफी हद तक इस समस्या को रोका जा सकता है।
नशे के दुष्परिणाम—स्वास्थ्य का विनाश—नशा शरीर को धीरे-धीरे खोखला कर देता है।
इससे फेफड़े, हृदय, लीवर और मस्तिष्क प्रभावित होते हैं।
कैंसर, हार्ट अटैक, मानसिक रोग और अवसाद जैसी गंभीर बीमारियाँ नशे के कारण बढ़ रही हैं।
मानसिक संतुलन बिगड़ना—नशा व्यक्ति की सोचने और समझने की शक्ति को कमजोर कर देता है।
वह चिड़चिड़ा, हिंसक और असामाजिक बनने लगता है।
कई युवा अवसाद और आत्महत्या तक की स्थिति में पहुँच जाते हैं।
परिवार का टूटना—नशेड़ी व्यक्ति केवल अपना जीवन ही नहीं, पूरे परिवार की खुशियाँ बर्बाद कर देता है।
घर में झगड़े, आर्थिक संकट और तनाव बढ़ने लगता है
माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर रोते हैं और कई परिवार टूट जाते हैं।
अपराध में वृद्धि—नशे की लत पूरी करने के लिए कई युवा चोरी, लूट, हिंसा और अन्य अपराध करने लगते हैं।
ड्रग्स माफिया भी युवाओं को अपने जाल में फँसाकर उनका उपयोग करते हैं।
राष्ट्र की शक्ति कमजोर होना—युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी पूँजी होते हैं।
यदि वही युवा नशे में डूब जाएँ, तो देश की प्रगति रुक जाती है
नशा केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे राष्ट्र का नुकसान करता है।कौन ज़िम्मेदार?—परिवार—परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
यदि माता-पिता बच्चों को संस्कार, प्रेम और सही मार्गदर्शन दें, तो बच्चे गलत रास्ते पर कम जाते हैं
बच्चों के मित्रों, दिनचर्या और व्यवहार पर ध्यान देना आवश्यक है।
समाज—समाज भी कहीं न कहीं ज़िम्मेदार है।
जब समाज में नशा “प्रतिष्ठा” या “स्टेटस” का प्रतीक बन जाए, तो युवा उससे प्रभावित होते हैं
शादियों और पार्टियों में शराब को सामान्य बनाना भी गलत संदेश देता है।
फिल्म और मनोरंजन उद्योग—मनोरंजन जगत को अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए।
यदि फिल्मों और वेब सीरीज़ में नशे को ग्लैमर की तरह दिखाया जाएगा, तो युवा निश्चित रूप से प्रभावित होंगे
सरकार और प्रशासन—सरकार का कर्तव्य है कि नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्त नियंत्रण रखे।
ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पूरी तरह बंद होनी चाहिए।
स्वयं युवा—अंततः सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी स्वयं युवाओं की भी है।
उन्हें समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है।
सच्ची बहादुरी नशा करने में नहीं, बल्कि उससे दूर रहने में है।
समाधान क्या है?-परिवार में संवाद बढ़े—माता-पिता बच्चों के मित्र बनें। उन्हें डाँटने के बजाय समझाएँ और उनकी समस्याएँ सुनें।
नैतिक शिक्षा—स्कूलों और कॉलेजों में नैतिक शिक्षा तथा नशा विरोधी अभियान चलाए जाने चाहिए। बच्चों को बचपन से ही नशे के दुष्परिणाम बताए जाएँ।
खेल और योग को बढ़ावा—युवाओं को खेल, योग और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन नशे से दूर रखते हैं।
. सख्त कानून—नशे के कारोबारियों पर कठोर दंड होना चाहिए।
केवल छोटे उपभोक्ताओं को पकड़ने से समस्या हल नहीं होगी; बड़े तस्करों पर कार्रवाई आवश्यक है।आज का युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति माना जाता है। युवा ही राष्ट्र का भविष्य होते हैं। उन्हीं के हाथों में समाज, संस्कृति और देश की उन्नति का मार्ग होता है। परन्तु आज वही युवा वर्ग धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में फँसता जा रहा है। शराब, सिगरेट, तम्बाकू, गांजा, चरस, अफीम, स्मैक, ड्रग्स और नशे के इंजेक्शन जैसे विषैले पदार्थ युवाओं के जीवन को बर्बाद कर रहे हैं।
. जागरूकता अभियान-समाज, मीडिया और सरकार को मिलकर जागरूकता फैलानी चाहिए। नशे के खिलाफ सामूहिक आंदोलन की आवश्यकता है।

  • ऊषा शुक्ला
  • Related Posts

    के अन्नामलाई के BJP छोड़ने पर संजय सिंह का बड़ा बयान, ‘सभी को लगता है कि वो विजय की तरह…’

    Sanjay Singh News: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा…

    Continue reading
    BJP से इस्तीफे के बाद के अन्नामलाई ने किया नई पार्टी बनाने का ऐलान, बोले – ‘मेरे मन में PM मोदी के लिए…’

    तमिलनाडु BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    शिक्षा पर कसा नवउदारवादी शिकंजा

    • By TN15
    • June 6, 2026
    शिक्षा पर कसा नवउदारवादी शिकंजा

    ‘वो शिक्षक नहीं माफिया….पैसे का घमंड है’, खान सर के मामले में आया गांव वाले चाचा का बयान

    • By TN15
    • June 6, 2026
    ‘वो शिक्षक नहीं माफिया….पैसे का घमंड है’, खान सर के मामले में आया गांव वाले चाचा का बयान

    अंतरराष्ट्रीय विश्व पर्यावरण दिवस व बाल दिवस पर जनवादी महिला समिति ने किया पौधरोपण, बच्चों में बांटी पर्यावरण की समझ

    • By TN15
    • June 6, 2026
    अंतरराष्ट्रीय विश्व पर्यावरण दिवस व बाल दिवस पर जनवादी महिला समिति ने किया पौधरोपण, बच्चों में बांटी पर्यावरण की समझ

    कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले जंतर-मंतर बना छावनी, युवाओं की भारी भीड़ जुटी

    • By TN15
    • June 6, 2026
    कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले जंतर-मंतर बना छावनी, युवाओं की भारी भीड़ जुटी

    के अन्नामलाई के BJP छोड़ने पर संजय सिंह का बड़ा बयान, ‘सभी को लगता है कि वो विजय की तरह…’

    • By TN15
    • June 5, 2026
    के अन्नामलाई के BJP छोड़ने पर संजय सिंह का बड़ा बयान, ‘सभी को लगता है कि वो विजय की तरह…’

    US-Pakistan Relations: ‘मजबूत पाकिस्तान अमेरिका के लिए…’, ट्रंप की दूत नताली ने क्या कहा, चौड़ी हो गई शहबाज शरीफ की छाती

    • By TN15
    • June 5, 2026
    US-Pakistan Relations: ‘मजबूत पाकिस्तान अमेरिका के लिए…’, ट्रंप की दूत नताली ने क्या कहा, चौड़ी हो गई शहबाज शरीफ की छाती