महिलाओं को मिला किसान का दर्जा, विधानसभा से महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक पास

महाराष्ट्र विधानसभा ने राज्य की महिलाओं के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है।  विधानसभा में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक’ सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। कृषि मंत्री दत्ता भरणे ने यह विधेयक सदन में पेश किया, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला. हालांकि, चर्चा के दौरान कुछ विधायकों ने इसकी कुछ धाराओं पर सवाल भी उठाए और संशोधन के सुझाव दिए। इस नए कानून के तहत केवल खेतों में काम करने वाली महिलाओं को ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और कृषि से जुड़े अन्य व्यवसायों में काम करने वाली महिलाओं को भी किसान के रूप में मान्यता मिलेगी। खास बात यह है कि अगर किसी महिला के नाम पर सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) दर्ज नहीं है, तब भी वह किसान प्रमाणपत्र हासिल कर सकेगी।

सरकार ने बताया विधेयक का उद्देश्य

कृषि मंत्री दत्ता भरणे ने सदन में कहा कि इस कानून का मकसद महिलाओं के नाम पर जमीन का मालिकाना हक देना नहीं है। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को आधिकारिक पहचान देना है, जो लंबे समय से खेती और कृषि से जुड़े काम कर रही हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में किसान नहीं मानी जातीं, उन्होंने कहा कि किसान का दर्जा मिलने के बाद महिलाएं राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदान और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।

दत्ता भरणे ने बताया कि फिलहाल राज्य में केवल 15 से 20 प्रतिशत महिलाओं के नाम पर ही सातबारा रिकॉर्ड दर्ज है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं खेती और उससे जुड़े कामों में बराबर की भागीदारी निभाती हैं। ऐसे में यह कानून महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विपक्ष ने उठाए कई सवाल

विधेयक पर चर्चा के दौरान उद्धव सेना के विधायक कैलास पाटिल ने पूछा कि क्या दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आकर कृषि मजदूरी करने वाली महिलाओं को भी इस कानून का लाभ मिलेगा. इस पर कृषि मंत्री ने साफ किया कि दूसरे राज्यों की महिलाओं को किसान प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा।

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल ने सुझाव दिया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उनके नाम पर सीधे जमीन दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने पति के नाम पर दर्ज 50 प्रतिशत जमीन महिलाओं के नाम करने का भी प्रस्ताव रखा और महिला किसानों को ऋण देने की प्रक्रिया पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

जमीन नहीं होने पर किसान का दर्जा कैसे मिलेगा?

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक भास्कर जाधव ने भी एक अहम सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य में किसान की मान्यता के लिए कम से कम आधा एकड़ जमीन होना जरूरी माना जाता है। ऐसे में जिन महिलाओं के नाम पर कोई जमीन नहीं है, उन्हें किसान का दर्जा किस आधार पर दिया जाएगा, इस पर सरकार को स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को उनकी मेहनत के आधार पर पहचान दिलाना और उन्हें कृषि क्षेत्र में बराबरी का अधिकार देना है।
  • Related Posts

    आखिर 38 मौतों के सौदागर का संरक्षक कौन है?

    सागर शराब त्रासदी मौतों के पीछे किसका संरक्षण,…

    Continue reading
    पंजाब सीएम के OSD के खिलाफ CBI जांच पर सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कब होगी सुनवाई?

    पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    लोकतंत्र बचाओ–देश बचाओ अभियान के तहत डीएम कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

    लोकतंत्र बचाओ–देश बचाओ अभियान के तहत डीएम कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

    10% विकसित प्लॉट के मुद्दे पर 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण पर किसान संघर्ष मोर्चा का महापड़ाव

    10% विकसित प्लॉट के मुद्दे पर 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण पर किसान संघर्ष मोर्चा का महापड़ाव

    विपक्षी सांसदों का अब राजघाट तक मार्च 

    विपक्षी सांसदों का अब राजघाट तक मार्च 

    नाना पाटेकर के निधन पर भावुक हुए सचिन तेंदुलकर, यूं दी अंतिम श्रद्धांजलि

    नाना पाटेकर के निधन पर भावुक हुए सचिन तेंदुलकर, यूं दी अंतिम श्रद्धांजलि

    गांव की मिट्टी में रमे थे नाना पाटेकर, जन्मभूमि से थी अंतिम विदाई की इच्छा! 

    गांव की मिट्टी में रमे थे नाना पाटेकर, जन्मभूमि से थी अंतिम विदाई की इच्छा! 

    अपने गांव से अंतिम विदाई चाहते थे नाना पाटेकर! 

    अपने गांव से अंतिम विदाई चाहते थे नाना पाटेकर!