सैनिकों की शहादत को लेकर देश और संसद को गुमराह करना बहुत आपत्तिजनक

शहादत छिपाना शहीदों का अपमान

सदन को गुमराह करने के आरोप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बर्खास्त किया जाए : अजय खरे

रीवा । समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि साल भर पहले सीमा पार से हुई आतंकवादी गतिविधियों के जवाब में भारत के द्वारा मई 2025 में पाक अधिकृत कश्मीर पर किए गए ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा 28 जुलाई 2025 को लोकसभा में झूठी जानकारी देने पर इधर विरोध के स्वर मुखर हैं। यह विशेषाधिकार हनन का मामला है। विदित हो कि 28 जुलाई 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद (लोकसभा) में’ऑपरेशन सिंदूर’ पर बहस के दौरान, विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा था: “आपको सवाल पूछना है तो ये पूछिए कि इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज़ सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है तो उसका उत्तर है नहीं।

श्री खरे ने बताया कि अभी यह जानकारी है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान छ: भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए। जबकि 11 माह पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में यह बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की कोई सैनिक क्षति नहीं हुई है।श्री खरे ने कहा कि रक्षा मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठकर सदन और देश को गुमराह करना अत्यंत आपत्तिजनक बात है। सदन को गुमराह करना किसी भी सदस्य के लिए, वह प्रधानमंत्री ही क्यों ना हो, उसकी सदस्यता छीने जाने का कारण बन सकता है। यह भी हो सकता है कि इस सवाल पर विशेषाधिकार हनन का मामला आने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपनी सदस्यता बचाने के लिए सदन में माफी मांगे या फिर इस गलत बयानबाजी को देश हित में झूठ बोलने की जरूरत बताएं। लेकिन वीर जवानों की शहादत को छिपाने पर उन्हें माफ नहीं किया जाना चाहिए।

श्री खरे ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में चीन के द्वारा 20 अक्टूबर 1962 को किए गए विश्वासघाती हमले के दौरान भारतीय सेना को पीछे हटना पड़ा था। चीनी सेना के मुकाबले भारतीय सैनिक रणभूमि में अधिक संख्या में शहीद हुए थे। लेकिन तब सदन को गुमराह नहीं किया गया बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहल पर 14 नवंबर 1962 को संसद के बुलाए गए संयुक्त अधिवेशन में हड़पे गए भारतीय भूभाग को चीन से वापस लेने के लिए सर्व सम्मत संकल्प पारित किया गया था।

लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि वीरगति प्राप्त जवानों के बारे में संसद और देश को समय पर जानकारी नहीं देना उनकी शहादत का अपमान है। देश को अपने जवानों के बलिदान पर हमेशा गर्व होता है। सन 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ  पाकिस्तान के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अत्याधुनिक सात अमेरिकी पैटर्न टैकों को अपनी जान की बाजी लगाकर भारतीय सेना के हवलदार अब्दुल हमीद ने 10 सितंबर के दिन पंजाब के तरनतारन जिले के चीमा गांव (खेमकरण सेक्टर) में टैंकों का कब्रिस्तान बना दिया था। इस दौरान शहीद हुए अब्दुल हमीद की शहादत को छिपाया नहीं गया। शहीद अब्दुल हमीद को भारतीय सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत) दिया गया था। यह भारी विडंबना है कि झूठी आंकड़ेबाजी के लिए वीर जवानों की शहादत को भी छिपाया जा रहा। किसी भी सरकार को ऐसा काम करने से बाज आना चाहिए।

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