इधर अमरीका लगातार भारत का अपमान करता जा रहा है। पहले उसने गैर कानूनी रूप से अमरीका पहुंचे भारतीयों को हथकड़ी पहना कर मालवाहक जहाज से नरेन्द्र मोदी की अमरीका यात्रा के तुरंत पहले भारत भेजा। कोई स्वाभिमानी प्रधानमंत्री होता तो शायद अमरीका जाता ही नहीं।
फिर अमरीका ने भारत के उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगा दिया। यह दुनिया के किसी भी देश पर अमरीका द्वारा लगाए शुल्क में सबसे ज्यादा है। अमरीका का कहना है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता है जिसे अम्बानी परिष्कृत कर दुनिया के बाजार में काफी मंहगा बेच कर खूब मुनाफा कमा रहे हैं। वह मानता है कि जो पैसा हम रूस को दे रहे हैं उससे उसे यूर्केन के खिलाफ युद्व लड़ने में मदद मिल रही है। अब नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने चहेते पूंजीपति को पैसा कमाने का मौका देने का खामियाजा पूरा देश भुगतेगा। यह भारत के लिए अपमान की बात है लेकिन नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार बनी रहे इसके लिए देशहितों के साथ भी समझौता कर रहे हैं।
और अब अमरीका ने भारत से गए उन लोगों के लिए जो वहां काम करना चाहते हैं वीसा का शुल्क 1,00,000 डालर कर दिया है जो पहले मात्र 1,000-4,000 डालर था। वे नहीं चाहते कि भारत से लोग अमरीका जा कर काम करें और वहां के लोगों के लिए रोजगार का संकट पैदा करें।
अभी तक नरेन्द्र मोदी ने अमरीका की जितनी यात्राएं की हैं उनमें से सिर्फ एक में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया था। अब जब अमरीका ने नेरन्द्र मोदी का झटका दिया है तो वे चीन की शरण में गए हैं जिसने हमारी 4,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया हुआ है और 2020 में गलवान में हमारे 20 सैनिकों को मारा। लेकिन नरेन्द्र मोदी के प्रधान मंत्री रहते चीन के साथ हमारा आयात-निर्यात का अंतर दोगुना हो गया है यानी नरेन्द्र मोदी ने भारत की चीन पर निर्भरता बढ़ा दी है।
जाहिर है कि अमरीका और चीन दोनों ही भारत के बाजार का फायदा तो उठाना चाहते हैं लेकिन हमें बेइज्जत करके।
क्या जरूरी है कि हम अमरीकी कम्पनियों को अपने यहां काम करने दें या चीनी सामान यहां बिकने दें।
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) का मानना है कि कोका-कोला व पेप्सी जैसी कम्पनियां जो हमारा ही पानी हमे बेच कर भारी मुनाफा कमा रहीे हैं को भारत में व्यापार करने की छूट नहीं मिलनी चाहिए।






