ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) 1988 में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मालदीव में एक तख्तापलट की कोशिश को नाकाम करने के लिए चलाया गया एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था। यह अभियान मालदीव सरकार के अनुरोध पर शुरू किया गया था, जब तमिल भाड़े के सैनिकों और मालदीव के कुछ असंतुष्ट समूहों ने तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश की थी।
पृष्ठभूमि
तारीख: 3 नवंबर 1988
स्थान: मालदीव, विशेष रूप से राजधानी माले
घटना: श्रीलंका के तमिल उग्रवादी संगठन PLOTE (People’s Liberation Organisation of Tamil Eelam) के भाड़े के सैनिकों और मालदीव के व्यवसायी अब्दुल्ला लुथुफी के नेतृत्व में लगभग 80-200 सशस्त्र हमलावरों ने माले पर कब्जा करने की कोशिश की।
उद्देश्य: मालदीव की सरकार को उखाड़ फेंकना और एक समर्थक सरकार स्थापित करना।
भारतीय सेना की प्रतिक्रिया
मालदीव के राष्ट्रपति गयूम ने भारत से तत्काल सहायता मांगी। भारत ने तेजी से कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन कैक्टस शुरू किया।
तैनाती:
भारतीय सेना की 50वीं स्वतंत्र पैराशूट ब्रिगेड, जिसमें 6 पैरा बटालियन और 17 पैरा फील्ड रेजिमेंट शामिल थी, को तुरंत मालदीव भेजा गया।
भारतीय वायुसेना के IL-76 विमानों ने आगरा से सैनिकों को माले तक पहुंचाया, जो लगभग 2,000 किलोमीटर की दूरी थी।
अभियान का नेतृत्व ब्रिगेडियर फारुख बलसारा और कर्नल सुभाष जोशी ने किया।
कार्रवाई:
3 नवंबर 1988 की सुबह भारतीय सैनिक माले पहुंचे। उन्होंने तेजी से हुलहुले हवाई अड्डे पर नियंत्रण स्थापित किया।
माले में तख्तापलट करने वालों ने राष्ट्रपति गयूम को बंधक बनाने की कोशिश की, लेकिन वह सुरक्षित स्थान पर चले गए थे।
भारतीय सेना ने माले के प्रमुख ठिकानों पर कब्जा किया और विद्रोहियों को खदेड़ दिया।
विद्रोही एक व्यापारी जहाज (MV प्रोग्रेस लाइट) पर भागने की कोशिश कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कुछ बंधकों को भी ले लिया था।
नौसेना की भूमिका:
भारतीय नौसेना के जहाज INS बेतवा और INS गोदावरी ने भागते हुए विद्रोहियों का पीछा किया।
नौसेना ने जहाज को घेर लिया और विद्रोहियों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया। बंधकों को सुरक्षित छुड़ाया गया।






