तीर्थ किसको कहते हैं?

डीएस आर्य 

गया में श्राद्ध करने से पितरों का पाप छूटना, श्राद्ध करने के प्रभाव से पितरों के स्वर्ग में जाने की कल्पना, कलकत्ते की काली और गुवाहाटी की कामाख्या देवी, जगन्नाथ जी का कलेवर बदलना, दक्षिण समुद्र किनारे रामेश्वर में गंगोत्री जल चढ़ाने के समय लिंग का बढ़ जाना तथा लिंग का नाम रामेश्वर रख देना, दक्षिण में ही कालियाकांत की मूर्ति, मदुरई में मीनाक्षी मंदिर, दक्षिण में तिरुपति बालाजी का वेंकटेश्वर मंदिर,पश्चिम में द्वारका में ठाकुर जी की मूर्ति, द्वारका जी के रणछोड़ जी की मूर्ति,पश्चिम में ही सोमनाथ जी का मंदिर,(जब मुसलमानों की फौज ने आकर मंदिर को घेर लिया तब वे पोप पुजारी वहां से भाग गए थे ।उनके कुछ पुजारी और चेले पकड़े गए।

पुजारियों ने 30000000 रुपया देने और मंदिर को नहीं तोड़ने की मुसलमानों से प्रार्थना की ,परंतु मुसलमानों ने कहा कि हम बुत परस्त नहीं बल्कि हम मूर्तिभंजक हैं। उन्होंने तुरंत मंदिर तोड़ दिया। जब मंदिर टूटा तो ऊपर की तरफ जो चुंबक लगा रखी थी वह भी टूट गई। उससे पाषाण मूर्ति तुरंत पृथ्वी पर गिर पड़ी । इससे सोमनाथ का सत्य लोगों के समक्ष आ गया तथा पोपो का भांडा फूट गया) ,ज्वालामुखी पंजाब के कांगड़ा जिले में, बलूचिस्तान के लासबेला राज्य में हिंगलाज नदी के तीर पर हिंगलाज (जिस की नकल जो दूसरे स्थान पर की जाती है) उन 51 शक्तिपीठों में सेएक जहां पार्वती देवी की जीभ गिरी थी, का एकमात्र शक्तिपीठ, उत्तर में ही जम्मू के पास वैष्णो देवी, अमृतसर का अमृत रूप तालाब,(अमृतसर संवत् 1631 में बसाया गया था। उस समय इसका नाम गुरुचक रखा गया था। गुरु अर्जुन ने तालाब बनवाया था।उस समय नाम बदलकर रामदासपुर रखा गया।

संवत 1641 में तालाब को पक्का कराया गया ।उसका नाम अमृतसर रखकर धीरे-धीरे समस्त नगर का नाम ही अमृतसर प्रसिद्ध हो गया ।1645 संवत में हरीमंदिर बनवाया गया। उसकी आधारशिला लाहौर के मुसलमान फकीर मियां मीर से रखवाई गई थी । संवत 1818 में अहमद शाह दुर्रानी ने हरी मंदिर गिरवा दिया और तालाब भरवा दिया । संवत 1821 में पुनः बनाया। आधारशिला जस्सा सिंह अहलूवालिया ने रखी। रावी नदी से नहर निकालकर तालाब में जल डलवाया गया। यह नहर उदासी साधुओं ने ग्राम निवासियों की सहायता से बनवायी थी ।उस समय उदासी साधु हरिमंदिर के पुजारी थे। यह घटना 1838 की है ) रेवालसर में बेड़ा पार करने की कारीगरी, अमरनाथ के बर्फ के पहाड़ में लिंग का बनना, हरिद्वार स्वर्ग का द्वार, देवप्रयाग गंगोत्री में गोमुख, उत्तर में गुप्तकाशी, केदारनाथ, बद्रीनारायण, महादेव का मुख नेपाल में पशुपति, कटि अंग (अर्थात मध्य शरीर भाग) केदारनाथ,सोमनाथ में जानू और पैर अमरनाथ में होना, केदार और बद्री से सीधे स्वर्ग जाना, तपोवन, गंगा, देवप्रयाग, पंचमुखी, विंध्याचल की विंध्यवासिनी( काली अष्टभुजा वाली देवी), गंगा- यमुना के संगम में स्नान करने से इच्छा सिद्धि का प्रयाग तीर्थराज, तीन लोक से निराली मथुरा, कृष्ण जी के लीला स्थान वृंदावन, गोवर्धन तथा ब्रज यात्रा, सूर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र में स्नान करना, अयोध्या, काशी(जिसके विषय में कहा जाता है कि अन्य क्षेत्र कृतम् पापम काशी क्षेत्र विनश्यति),नैमिषारण्य, पुष्कर, गोमुख,तप्त कुंड,चामुंडा देवी, अर्बुदाचल का आबू पर्वत पर मंदिर, जैनियों का गिरनार, पालिटाना ,शिखर ,शत्रुंजय और आबू का तीर्थ, बौद्धों का सारनाथ, सांची का स्तूप,
राम, कृष्ण, शिव, भगवती ,आदि का महात्म्य, शिव लिंग के दर्शन, 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन शिव पुराण में जो लिखे हैं, मनुष्य कृत पाषाण मूर्ति की पूजा से सात जन्मों का पाप छूट जाना, आदि को तीर्थ स्थान मानना और इसी पर विश्वास करने वाले लोग आंख के अंधे और गांठ के पूरे , तिलक, छाप और माला धारण करने वाले,इस लोक और परलोक का नाश करते हैं। क्योंकि यजुर्वेद में 32 / 3 में आया है कि
” ना तस्य प्रतिमा अस्ति ,”

अर्थात उस ईश्वर की कोई मूर्ति नहीं हो सकती। जब मनुष्यों का ज्ञान और सामर्थ्य कम हो गया और परमेश्वर को ध्यान में नहीं ला सके तो मूर्ति में ईश्वर का ध्यान लगाने के लिए अज्ञानीयों ने मूर्ति पूजा प्रारंभ कर दी। जो विद्वानों के लिए त्याग करने के योग्य है। इसके विपरीत आचरण वेदों के विरुद्ध है। ऐसे ही लोगों को नास्तिक कहा जाता है।
जबकि यथार्थ तीर्थ महर्षि दयानंद ने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में एकादश समुल्लास में निम्न प्रकार बताएं हैं।

वेद आदि सत्य शास्त्रों का पढ़ना पढ़ाना, सत्यवादी, पुरुषार्थी, उदार, धर्मात्मा, निंदा स्तुति में हर्ष, शोक रहित , विद्या, धर्म की निरंतर उन्नति करने हारे, निर्भय, उत्साही, योगी ,ज्ञानी ,सृष्टि कर्म वेद आज्ञा, ईश्वर के गुण कर्म स्वभाव अनुसार वर्तमान करने वाले, न्याय की रीति युक्त ,पक्षपात रहित, सत्य उपदेश ,किसी की लल्लू पत्तों न करने वाले ,प्रश्नों के यथार्थ समाधान कर्ता ,अपने आत्मा के तुल्य दूसरों का भी सुख दुख हानि लाभ समझने वाले, अविद्या ,क्लेश, दुराग्रह, अभिमान रहित, अमृत के समान अपमान और विष के समान मान को समझने वाले संतोषी, जो कोई प्रीति से जितना देवे उतने से ही प्रसन्न, एक बार आपातकाल में मांगे भी न देने व मना करने पर भी दुखी या बुरी चेष्टा नहीं करना, वहां से झट लौट जाना, उसकी निंदा नहीं करना ,सुखी पुरुषों के साथ मित्रता ,दुखियों पर करुणा, पुण्य आत्माओं से आनंद और पापियों से उपेक्षा अर्थात राग द्वेष रहित रहना, निष्कपट, ईर्ष्या द्वेष रहित, गंभीराश्य , सत्पुरुष, धर्म से युक्त और सर्वथा दुष्प्रचार से रहित ,अपने तन मन धन को परोपकार में लगाने वाले, पराए सुख के लिए अपने प्राणों को भी समर्पित कर्ता, दुर्भिक्ष के समय दूसरों की सेवा करना,धार्मिक विद्वानों का संग, परोपकार, धर्मानुष्ठानों, योगाभ्यास ,निर्वैर, निष्कपट, सत्य भाषण, सत्य का मानना, सत्य को अपने जीवन में धारणा अर्थात सत्य ही करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, आचार्य अतिथि एवं माता-पिता की सेवा करना, परमेश्वर की स्तुति, प्रार्थना, उपासना करना, शांति पूर्वक जीवन यापन करना,जितेंद्रियता, सुशीलता, धर्म युक्त पुरुषार्थ ,ज्ञान विज्ञान आदि शुभ गुण, कर्म ही‌ दुखों से उतारने वाले होने से तीरथ हैं।
क्योंकि “जना यैस्तरन्ति तानि तीर्थानि,

अर्थात तीर्थ उसे कहते हैं जिसके करने से दुखों से जन तर सकें। जल स्थल तारने वाले नहीं बल्कि डूबा कर मारने वाले हैं ।इससे तो नौका अच्छी है जो समुद्र को तारने में सहायक होती है ।वह तीर्थ हो सकती है।

इनके अतिरिक्त सभी पोप लीला पुजारी ,पाखंडी ,पाषाण पूजा करने वाले पुराणियों ने जठराग्नि शांत करने के लिए चलाई है। इन्हीं पुजारियों के पाप से आर्यावर्त देश दुखों में डूबा।
जैसे श्री कृष्ण जी का इतिहास महाभारत में अति उत्तम है। उनका गुण, कर्म, स्वभाव और चरित्र आप्त पुरुषों के सदृश है। जिसमें कोई अधर्म का आचरण श्री कृष्ण जी ने जन्म से मरण पर्यंत बुरा काम कुछ भी नहीं किया। परंतु भागवत वाले ने मध्यकाल में अनुचित मनमाने दोष लगाये। दूध, दही ,मक्खन आदि की चोरी और कुब्जा दासी से समागम, पर स्त्रियों से रास मंडल क्रीड़ा आदि मिथ्या दोष श्री कृष्ण जी में इन्हीं पाखंडियों ने लगाएं। इन सब को पढ़ कर श्री कृष्ण जी की निंदा करने का अनुभव होता है ।यह कोई उनकी प्रशंसा नहीं है। (बल्कि यह विधर्मीओं को उपहास करने का एक अवसर हमने दिया है ऐसे ही विधर्मीयों ने भाड़े के टट्टू से भागवत पुराण लिखवाई है)
अगर यह तीर्थ सनातन से चले आए होते तो इनका उल्लेख ब्राह्मण आदि ऋषि -मुनि कृत पुस्तकों में नाम अवश्य होता ।यह मूर्ति पूजा करीब ढाई हजार साल पहले वाममार्गी और जैनियों से चली है। इससे पहले आर्यावर्त में नहीं थी। यह तीर्थ भी नहीं थे। जब जैनियों ने गिरनार, पालिटाना आदि बनाए तो इनकी नकल से पुजारी पंडों ने भी बनाने प्रारंभ कर दिए।
इससे पहले का कोई लेख किसी भी ऋषि कृत पुस्तक में तीर्थों के विषय में नहीं मिलता। यह सभी आधुनिक हैं।
यह सभी ऐसे ही गुरु ने चेले और चेलियों से धन हरण करने के प्रयोजन से बनाए हैं।
लेकिन
गुरु लोभी चेला लालची दोनों खेले दांव।
भवसागर में डूबते बैठ पत्थर की नाव।

  • Related Posts

    डोनाल्ड ट्रम्प की गुगली में फंसे मोदी, भारत को बड़ा झटका देंगे अमेरिका के राष्ट्रपति ?
    • TN15TN15
    • June 19, 2026

    चरण सिंह  फ़्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन…

    Continue reading
    सरेआम‌‌ जम्हूरियत का कत्लेआम!
    • TN15TN15
    • June 19, 2026

    हर रोज खबरें मिल रही है कि ‌…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    महाराष्ट्र के परभणी हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत, मंदिर के मलबे में अभी भी कई फंसे, रेस्क्यू जारी!

    • By TN15
    • June 20, 2026
    महाराष्ट्र के परभणी हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत, मंदिर के मलबे में अभी भी कई फंसे, रेस्क्यू जारी!

    बिहार: भोजपुर में भरत तिवारी के एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच, CM सम्राट चौधरी का आदेश

    • By TN15
    • June 20, 2026
    बिहार: भोजपुर में भरत तिवारी के एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच, CM सम्राट चौधरी का आदेश

    जम्मू-कश्मीर में PM स्वास्थ्य योजना में बड़ा घोटाला, 103 सर्जरी पाई गईं संदिग्ध!

    • By TN15
    • June 20, 2026
    जम्मू-कश्मीर में PM स्वास्थ्य योजना में बड़ा घोटाला, 103 सर्जरी पाई गईं संदिग्ध!

    हॉलीवुड स्टार एंजेलिना जॉली संग स्क्रीन शेयर करती दिखेंगी प्रियंका चोपड़ा, एक्ट्रेस ने खुद किया खुलासा

    • By TN15
    • June 20, 2026
    हॉलीवुड स्टार एंजेलिना जॉली संग स्क्रीन शेयर करती दिखेंगी प्रियंका चोपड़ा, एक्ट्रेस ने खुद किया खुलासा

    शिक्षा व्यवस्था से वायरस भगाओ: जंतर-मंतर पर ‘थाली बजाओ’ अभियान, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी तेज मांग

    • By TN15
    • June 20, 2026
    शिक्षा व्यवस्था से वायरस भगाओ: जंतर-मंतर पर ‘थाली बजाओ’ अभियान, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी तेज मांग

    International Yoga Day : क्या इस्लामिक देशों के स्कूल-कॉलेज में होते हैं योगा टीचर, उनको कितनी मिलती है सैलरी?

    • By TN15
    • June 20, 2026
    International Yoga Day : क्या इस्लामिक देशों के स्कूल-कॉलेज में होते हैं योगा टीचर, उनको कितनी मिलती है सैलरी?