भारत के सामने भीख मांग रहा अमेरिका, जंग के बीच जानें ऐसा क्यों बोले ईरान के विदेश मंत्री अराघची

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने हाल ही में (14 मार्च 2026) X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में अमेरिका पर तीखा हमला बोला और कहा कि “अमेरिका भारत समेत पूरी दुनिया के सामने रूसी तेल खरीदने की भीख मांग रहा है”।

 

अराघची का ठीक-ठीक बयान क्या था?

 

उन्होंने लिखा: “The US spent months on bullying India into ending oil imports from Russia. After two weeks of war with Iran, White House is now begging the world—including India—to buy Russian crude.” (अनुवाद: अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए महीनों तक धमकाया। ईरान के साथ दो हफ्ते की जंग के बाद अब व्हाइट हाउस दुनिया से—भारत सहित—रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है।)

यह बयान इजरायल-अमेरिका vs ईरान जंग (जो लगभग 28 फरवरी 2026 से चल रही है) के बीच आया है।

 

 

ऐसा क्यों बोले अराघची? पूरा बैकग्राउंड

 

पहले की स्थिति (अमेरिका का पुराना रुख): यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस पर तेल प्रतिबंध लगाए और भारत (जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहा था) पर भारी दबाव डाला। ट्रंप प्रशासन ने भारत को धमकियां दीं कि रूसी तेल खरीदना बंद करो, वरना टैरिफ या सैंक्शन लगेंगे। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने इसमें “महीनों बर्बाद” किए।
अब जंग के बाद पलटी (दो हफ्ते में सब बदल गया): ईरान-अमेरिका/इजरायल जंग में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (दुनिया का 20% तेल गुजरता है) और खार्ग द्वीप जैसे इलाकों पर हमले किए। इससे मध्य पूर्व से तेल सप्लाई बाधित हो गई, ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़ गए और एनर्जी क्राइसिस खड़ी हो गई।
अमेरिका का नया रुख: अब ट्रंप प्रशासन ने 30 दिन का वेवर (छूट) दे दिया है—पहले भारत को, फिर दूसरे देशों को भी—ताकि रूसी तेल खरीदा जा सके। अमेरिका खुद दुनिया से अपील कर रहा है कि रूसी क्रूड खरीदो, ताकि बाजार स्थिर रहे। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस को रोज़ 15 करोड़ डॉलर का फायदा हो रहा है।

अराघची ने इसी डबल स्टैंडर्ड (दोहरे मापदंड) पर तंज कसा है—कल तक भारत को “रोको” कह रहे थे, आज “खरीदो” की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने यूरोप पर भी हमला बोला कि उन्होंने ईरान के खिलाफ “गैर-कानूनी जंग” का साथ दिया, लेकिन अब रूस के तेल पर अमेरिका का समर्थन मांग रहे हैं।

 

क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?

 

ईरान इस जंग में अमेरिका को कमजोर दिखाना चाहता है। भारत को “सफल” दिखाया गया है—जो पहले दबाव में था, अब अमेरिका खुद उससे तेल खरीदने को कह रहा है। वैश्विक स्तर पर यह दिखाता है कि युद्ध के 2 हफ्ते में ही अमेरिका की नीति कितनी तेजी से पलट गई।

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