हकीकत की ठोकरें हमें हमारे ख्वाबों की असली कीमत समझाने…

जरूरी यह नहीं है कि हम हर ख्वाब पूरा कर ही लें, जरूरी यह है कि हम उन्हें जिंदा..!!

 

जब हम अपनी आंखों में ख्वाब संजोते हैं, तो वह ख्वाब हमें इस दुनिया के हर कोने में कुछ नया खोजने की प्रेरणा देता है। इन्हीं ख्वाबों के सहारे हम अपने जीवन के भविष्य के महल मन ही मन बना लेते हैं, मानो हर मंजिल हमारी मुट्ठी में हो। उस समय हमें लगता है कि हम कुछ भी कर सकते हैं, कुछ भी पा सकते हैं, लेकिन क्या कभी हमने ठहरकर यह सोचा है कि इन ख्वाबों को पूरा करने का रास्ता उतना आसान नहीं होता, जितना हमें शुरुआत में लगता है?शुरुआत में हर ख्वाब हमें अपना-सा लगता है। वे ख्वाब हमारे मन में इतने गहरे बैठ जाते हैं कि हमें लगता है जैसे वे हमारी ही दुनिया हों। हर मंजिल हमसे बस कुछ कदमों की दूरी पर दिखाई देती है। हम ख्वाबों के रंगीन संसार में खो जाते हैं, जहां सब कुछ सुंदर होता है, सरल होता है। हम यह मान लेते हैं कि मेहनत करेंगे तो सब मिल जाएगा, कि हर बाधा को हम आसानी से पार कर लेंगे। उस समय हमारे भीतर आत्मविश्वास होता है, जोश होता है और भविष्य के प्रति एक अटूट विश्वास होता है, लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता है, हम हकीकत का सामना करने लगते हैं।बहकीकत की ठोकरें हमें हमारे ख्वाबों की असली कीमत समझाने लगती हैं। जिन रास्तों पर हमने फूलों की कल्पना की थी, उन्हीं रास्तों पर कांटे उग आते हैं। असफलताएं हमें घेर लेती हैं और हमारी उम्मीदें धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगती हैं। ऐसा आमतौर पर होता है कि जब कोई चीज हमें आसानी से मिल जाती है, तो हम उसकी कीमत समझने की कोशिश नहीं करते। इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति हमसे विनम्र और सद्भावपूर्ण व्यवहार करता है, हमें अपनी बात रखने या अपनी पसंद से आचरण करने की जगह मिलने पर कोई आपत्ति नहीं करता, तो हम वैसे व्यक्ति को हल्का मानकर उसकी अनदेखी करते हैं या उसे कम करके आंकते हैं। मगर यही जब हमारे व्यक्तित्व में घुल जाता है, तब हम ऐसे व्यवहार की आदी हो जाते हैं और हमारे भीतर एक विचित्र अहं अपने पांव पसारने लगता है। हमें इसका भान तब होता है, जब हम किसी के लिए कुछ करते हैं और उसकी कद्र करते हैं और वह हमें कोई महत्त्व नहीं देता। दरअसल, बात यहां यह है कि हमें दूसरों के प्रति ही वैसा व्यवहार करना चाहिए, उसकी कद्र करनी चाहिए, जो हम अपने लिए दूसरों से अपेक्षा करते हैं। वक्त का पहिया कभी रुकता नहीं। यह बिना किसी से पूछे हमें आगे धकेलता रहता है।
सपने हमें जीने की वजह देते हैं। वे हमें हर गिरावट के बाद उठने की ताकत प्रदान करते हैं। यह सच है कि ख्वाबों की राह आसान नहीं होती। इस राह में असफलताएं आती हैं, निराशा मिलती है, और कई बार खुद पर भी शक होने लगता है। मगर इन्हीं मुश्किलों से गुजर कर सपने साकार होते हैं। संघर्ष के बिना कोई भी सपना सच नहीं होता। जरूरी यह नहीं है कि हम हर ख्वाब पूरा कर ही लें, जरूरी यह है कि हम उन्हें जिंदा रखें।

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