बिहार की पहल को देशभर में सराहा गया
पटना। जलचरों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर पटना में आयोजित दो दिवसीय “एशियन वॉटरबर्ड सेंसस इंडिया कोऑर्डिनेटर मीटिंग” का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया तथा बिहार राज्य पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त प्रयास से किया गया।
बैठक में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों – गोवा, कर्नाटक, झारखंड, मणिपुर, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, उत्तराखंड, केरल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली – के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में राज्य समन्वयक, वन विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक, वेटलैंड विशेषज्ञ और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
मीटिंग में एडब्ल्यूसी डेटा की गुणवत्ता, नागरिकों की भागीदारी, नीतिगत निर्णयों में डेटा उपयोग, तथा प्राथमिक आर्द्रभूमियों की राष्ट्रीय पहचान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। इसका उद्देश्य भारत में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (AWC) की वर्तमान स्थिति की समीक्षा, राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान और निगरानी रणनीति का समन्वय करना था।
यह पहल रामसर कन्वेंशन, कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज और जैव विविधता संधि जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों को भी समर्थन देती है।
बैठक में बिहार की भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया। राज्य ने वर्ष 2022 से लगातार चार वर्षों तक पूरे बिहार में सुनियोजित एडब्ल्यूसी सर्वेक्षण कर एक मिसाल कायम की है, जिससे उसे अन्य राज्यों के मुकाबले अलग पहचान मिली है। ज्ञात हो कि बिहार सरकार द्वारा पक्षी संरक्षण के लिए पूर्व में भी कई उल्लेखनीय प्रयास किए जा चुके हैं।








