चरण सिंह
सत्ता के लिए बाबा आसाराम और राम रहीम के पैरों में पड़ने वाले और आज़ादी की लड़ाई का विरोध करने वाली सोच के लोगों से और क्या उम्मीद की जा सकती है ? जब इनकी नजरों में अंग्रेजों की हैवानियत भी देश हित में लगती थी तो राम मंदिर में चोरी इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। राम मंदिर में चोरी को लेकर हिंदुओं का पैसा हिंदुओं के पास ही तो गया है, कहने वाले लोग धर्मांध ही हो सकते हैं। कल ये लोग रेप गैंगरेप, हत्या, लूट, डकैती के मामलों में भी ऐसी ही भाषा बोलने लगें तो किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ये तो यही बोलेंगे कि हिंदुओं ने हिंदुओं के साथ ही तो किया है। जिन लोगों की सोच को आजादी की लड़ाई में अनगिनत शहादत न बदल पाई।
आज़ादी के दीवानों पर बरती जाने वाली यातनाएं न बदल पाई। इनकी सोच अब खुद अपने ही राज में कैसे बदल सकती है ? यह इन लोगों द्वारा बनाया जा रहा समाज ही है कि कोई किसी कोई कहीं भी मार दे रहा है। अपराध करते हुए वीडियो बनाकर वायरल की जा रही हैं। बच्चे रात दिन मेहनत कर परीक्षा के लिए तैयार होते हैं। पता चलता है कि पर्चा लीक हो गया है, इसलिए परीक्षा रद्द कर दी गई। क्या मनोस्थिति होती होगी इन बच्चों और इनके अभिभावकों की ? पर्चा कौन खरीद सकता है ? संपन्न आदमी न ? फिर कोई आम आदमी अच्छे पद पर जाने का सपना कैसे देख सकता है। सरकार सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की हालत बद से बदतर करती जा रही है। प्राइवेट स्कूलों में आम आदमी अपने बच्चों को पढ़ा नहीं सकते। अस्पतालों में इलाज करा नहीं सकते। मतलब आम आदमी के मरने की पूरी तैयारी कर दी गई है।
दरअसल राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने कहा है कि हिंदुओं का पैसा हिंदुओं के पास गया है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये की कथित चोरी के इस गंभीर मामले को लेकर समाज और कानून के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। पिंकी चौधरी ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि चंदे का पैसा किसी अन्य धर्म के संस्थान में जाने के बजाय हिंदू लोगों के पास ही रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर पर आपत्ति जताने वाले लोग खुद कितना दान देते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पूछताछ में करोड़ों की चोरी की बात कबूल की है। आरोपियों के पास से नकदी और अवैध संपत्ति के सुराग मिले हैं। आम भक्तों और अयोध्या के कई साधु-संतों ने इस बयान और चोरी की घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि दान का पैसा भगवान रामलला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए था, न कि किसी की निजी चोरी को सही ठहराने के लिए।







