सत्ता में बैठे लोगों और उनके समर्थकों को तो आंदोलन बुरा लगता है। उन्हें उस आंदोलन में नक्सलवाद, आतंकवाद और पाकिस्तान की बू आने लगती है। यह बात हर किसी को समझने की है कि हर आंदोलन से देश और समाज को कुछ न कुछ फायदा जरूर होता है। सीजेपी आंदोलन भी फायदा देकर गया है। एक तो शिक्षा सुधार की ओर एक कदम बढ़ा है। अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और नेहा के रूप में देश को कई युवा नेता मिले हैं। पर्चे लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने के बाद सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने बोल भी दिया है कि एक भी तो एक विकेट ही गिरा है।
पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट से गाड़ियों में खराबी होने की खबरें आ रही है। आप संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने तो लगते हाथ नितिन गडकरी को हटाने की मांग प्रधानमंत्री से कर दी है। उनकी मांग पर गौर न होए पर एक अगस्त को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक अगस्त को बड़ा कार्यक्रम करने के ऐलान किया है।
दरअसल जो जनकारी मिल रही है उसके अनुसार उसके अनुसार पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट संगठनों द्वारा मुख्य रूप से माइलेज में कमी देखी जा रही है। इंजन में कंपन व पिकअप धीमा होना, और मेंटेनेंस खर्च बढ़ना जैसी शिकायतें आ रही हैं।
वाहन चालकों की मुख्य समस्याएं घटता माइलेज
वाहन मालिकों का दावा है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों की एवरेज (किलोमीटर प्रति लीटर) पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। इंजन पर असर: पुरानी गाड़ियों या बिना E20 कंपैटिबल इंजन वाले वाहनों में पिकअप कम होने, वाइब्रेशन (कंपन) बढ़ने और स्पार्क प्लग या इंजेक्टर जल्दी खराब होने की दिक्कतें बताई जा रही हैं।
मेंटेनेंस खर्च: बार-बार इंजन के पुर्जों में खराबी आने से वाहन सुधारने का खर्च बढ़ रहा है।पेट्रोल पंप और स्टोरेज से जुड़ी दिक्कतेंपानी की नमी और मिलावट: एथेनॉल की पानी सोखने की प्रवृत्ति के कारण मानसून के दौरान भूमिगत टैंकों में पानी मिलने और ईंधन खराब होने की शिकायतें पेट्रोल पंप डीलर्स ने उठाई हैं।
जंग का खतरा: पुराने टैंकों और पाइपलाइनों में नमी के कारण जंग लगने की आशंका जताई गई है। सरकार का पक्ष सरकार और संबंधित मंत्रालयों ने संसद में स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल से देश के वाहनों के व्यापक रूप से खराब होने के कोई पुख्ता या आधिकारिक प्रमाण नहीं मिले हैं।सरकार का मानना है कि यह नीति पर्यावरण के अनुकूल है और इससे किसानों व देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई20 (E20) एथनॉल नीति को लेकर अपने और अपने परिवार पर लगाए जा रहे झूठे आरोपों तथा डीपफेक वीडियो के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। कानूनी कदम: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे मेटा और एक्स के खिलाफ सिविल सूट की अनुमति दी।मुख्य आरोप: गडकरी और उनके परिवार को एथनॉल उत्पादन से व्यक्तिगत लाभ मिलने का भ्रामक प्रचार। मंत्री की सफाई: एथनॉल नीति पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन आती है और उनका इसमें कोई निजी आर्थिक लाभ या हितों का टकराव नहीं है।