चरण सिंह
यूजीसी के नियमों में बदलाव होने पर केंद्र सरकार पर नाराजगी बरतने वाले सवर्ण समाज के लोग भले ही पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आग उगल रहे हों पर ये लोग अभी भी योगी आदित्यनाथ के प्रति आस्था व्यक्त कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ का असली चेहरा आंदोलन के बड़ा होने पर पर दिखाई देगा। दूसरे आंदोलनों की तरह यह आंदोलन भी डंडे के बल दबाया जाएगा। आंदोलनकारियों पर एनएसए लगने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। आंदोलन किसी का भी हो, सीएम योगी की प्राथमिकता यह होती है कि आंदोलन बड़ा रूप न ले पाए। इस बात को इसलिए बल मिल रहा है क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आइना दिखाने के बाद भी योगी सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा।
दरअसल नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता अमृता चौधरी पर एनएसए लगाने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एनएसए को अवैध बताकर गौतमबुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम को पांच लाख रुपए का मुआवजा अपने वेतन से देने का आदेश दिया तो योगी सरकार बोखला उठी। अब योगी सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रही है मतलब गलती को सुधारना नहीं है सही साबित करना है।
यह बात लोगों की समझ में आ जानी चाहिए कि नोएडा की फैक्ट्रियों में भी श्रमिकों का जमकर शोषण होता है। यदि श्रमिकों 10-12 हजार रुपए में 18-18 घंटे काम लिया जा रहा था। इन श्रमिकों ने आंदोलन कर क्या गलत किया था ? अमृता चौधरी ने आंदोलनकारी श्रमिकों का साथ देकर क्या किया था ? उसने श्रमिकों को हक़ की लड़ाई के लिए ही तो प्रेरित किया था। अमृता चौधरी पर नोएडा पुलिस प्रशासन ने एक विशेष विचारधारा से जुड़े होने और श्रमिकों को भड़काने का आरोप लगाया था।
अमृता चौधरी पर भगत सिंह और दूसरे क्रांतिकारियों की किताब मिलने पर आपत्ति जताई थी। इन सब बातों में क्या गलत था ? अब जब नोएडा प्रशासन और योगी सरकार की किरकिरी हो गई तो अपनी बात सही साबित करने के लिए योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट जा रही है। मतलब इन सरकारों के खिलाफ कोई बोल न दे। सरकार बनाएंगे जनता के समर्थन से और जनता के सामने बचाव करेंगे ब्यूरोक्रेट्स का। यह बात हर किसी को समझ लेनी चाहिए। बीजेपी सरकार को किसी वर्ग से कोई मतलब नहीं है। किसी भी तरह से साम्प्रदायिक सौहार्द ख़राब कर सत्ता कब्जानी है। बीजेपी हिन्दू-मुस्लिम इसलिए नहीं करती क्योंकि उसे हिन्दुओं से कोई हमदर्दी है। मुस्लिमों के खिलाफ नफरत पैदा कर उसे हिन्दुओं का वोट चाहिए। पूंजीपतियों के धन के बल पर सत्ता हासिल कर पूंजीपतियों को देश के संसाधन लुटाने हैं।
2014 से अब तक इतनी धनराशि जनता पर खर्च नहीं की गई जितनी कि पीएम मोदी के विदेशी दौरों पर और उनकी ब्रांडिंग पर खर्च की गई है। सरकारी तंत्रों के माध्यम से। गोदी मीडिया के माध्यम से। पूंजीपति पीएम मोदी की ब्रांडिंग करते हैं और मोदी इस अहसान को उतारने के लिए जनता का मुर्ख बनाकर इन पूंजीपतियों को देश लुटा रहे हैं। यदि योगी आदित्यनाथ को वास्तव में जनता की चिंता है तो खुलकर केंद्र सरकार की गलत नीतियों का विरोध करें। यूपी में लोकतांत्रिक ढंग से होने वाले आंदोलन होने दें। यूजीसी एक्ट के खिलाफ चल रहे आंदोलन को भी तो योगी डंडे के बल पर दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ के मोह में फंसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ भी बीजेपी से अलग नहीं हैं। वह कितनी भी नैतिक साहस की बात करें पर बीजेपी की नीतियों से अलग हटकर वह भी कोई कदम नहीं उठा सकते हैं। उल्टे आंदोलन के खिलाफ दिल्ली जंतर मंतर से भी ज्यादा आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। वह खुद कितनी बार बोल चुके हैं कि यूपी में कोई आंदोलन करके दिखाए। अब बारी यूजीसी एक्ट खिलाफ चल रहे आंदोलन की है। देखते हैं कि इन आंदोलनकारियों के प्रति योगी का क्या रुख रहता है ?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रही है, जिसमें आकृति चौधरी पर लगाए गए एनएसए (NSA) को रद्द कर दिया गया था। [1 मुख्य बिंदु:हाई कोर्ट का फैसला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा के मजदूर आंदोलन के दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था। [1] सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि राज्य सरकार हाई कोर्ट के इस आदेश और टिप्पणियों के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में अपील दाखिल कर रही है।






