जय किसान आंदोलन ने बिंदुवार तरीके से स्पष्ट किया था कि प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, छोटे खंडसारी एवं कोल्हू उद्योगों, बाजार प्रतिस्पर्धा और राज्यों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से एथेनॉल को मुख्य उत्पाद की श्रेणी में शामिल करने, मिलों के बीच दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने, किसानों पर अतिरिक्त ढुलाई खर्च डालने तथा राज्यों के SAP निर्धारण अधिकारों को सीमित करने जैसे प्रावधानों का व्यापक विरोध किया गया था।
अब केंद्र सरकार द्वारा 29 मई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से इस मसौदा आदेश को वापस लेना यह साबित करता है कि किसानों की लोकतांत्रिक आवाज और तथ्यपूर्ण हस्तक्षेप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जय किसान आंदोलन मानता है कि यह केवल एक आदेश की वापसी नहीं, बल्कि किसान हितों की रक्षा के लिए चल रहे व्यापक संघर्ष की महत्वपूर्ण सफलता है। यह किसानों के प्रति जय किसान आंदोलन के सजग, जिम्मेदार और निरंतर प्रयासों का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। जय किसान आंदोलन केंद्र सरकार से मांग करता है कि भविष्य में गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले किसान संगठनों, राज्य सरकारों और कृषि विशेषज्ञों के साथ व्यापक संवाद किया जाए, ताकि कृषि नीतियां किसान केंद्रित और न्यायपूर्ण बन सकें।








