विकसित भारत @ 2047: मोंटेक सिंह ने बताया मजबूत इकोनॉमी और नए PPP मॉडल का रास्ता

ABP India at 2047 Conclave: ABP Network की तरफ से आयोजित ‘India @ 2047Conclave Building Bharat’को अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष, मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने संबोधित कि इस दौरान उन्होंने ‘PPP को पुनर्जीवित करना – इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की नई सोच’ (Reviving PPP – Reimagining Infrastructure Financing) पर बात की, जिसमें भारत में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल्स के भविष्य और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग पर खास तौर पर फोकस किया गया।

PPF मॉडल का आधुनिकीकरण

कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लक्ष्य को सिर्फ बजटीय आवंटन या सरकारी खर्च के भरोसे पूरा नहीं किया जा सकता. इसके लिए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर्स जैसे कि हाईवे, रेलवे, पोर्ट्स और डिजिटल नेटवर्क को और मजबूत बनाना होगा. इन्हें ग्लोबल लेवल पर लाने के लिए निजी पूंजी (Private Capital) की भी बड़े पैमाने पर जरूरत होगी।

उनका यह कहना कि केवल सरकारी पैसों से वर्ल्ड क्लास हाईवे, एयरपोर्ट, रेलवे और स्मार्ट सिटी बनाना असंभव है. दुनिया भर में ट्रिलियन्स डॉलर की निजी पूंजी निवेश के सही मौके की तलाश में है. ऐसे में सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होगी, जिससे अंबानी, अडानी, टाटा जैसी निजी कंपनियां देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाने के लिए आगे आए।

 

इस दौरान उन्होंने पुराने पीपीपी मॉडलों में सुधार की भी मांग की, जहां निजी कंपनियों को अत्यधिक जोखिम उठाना पड़ता था. उन्होंने एक ऐसे नए फ्रेमवर्क की बात की, जहां सरकारी और निजी कंपनियों के बीच जोखिम और रिटर्न दोनों का एक समान बंटवारा हो।

जरूरी फैसले तुरंत जमीन पर उतरे

उन्होंने एक नीतिगत सुझाव दिया कि सरकार को महत्वपूर्ण और बड़े आर्थिक सुधारों को लागू करने के लिए केवल केंद्रीय बजट का इंतजार नहीं करना चाहिए. इस सिलसिले में उन्होंने 1991 के ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि जरूरी फैसले तुरंत जमीन पर उतारे जाने चाहिए और बाद में बजट के समय में संसद में उस पर चर्चाएं की जा सकती हैं. उन्होंने व्यापार में आने वाली अड़चनों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को ‘क्वॉलिटी कंट्रोल ऑडर्स’ की संख्या कम करनी चाहिए क्योंकि इनसे कारोबार का दायरा बढ़ाने में रुकावटें आती हैं.

GST का बढ़ें दायरा
इंफ्रास्ट्रक्चर्स को बनाने में होने वाले खर्च को निकालने के लिए उन्होंने सरकारी राजस्व को बढ़ाने पर जोर दिया. इसके लिए उन्होंने GST (वस्तु एवं सेवा कर) के ढांचे को सरल बनाने और मौजूदा समय में टैक्स-फ्री कैटेगरी में रखी गई वस्तुओं को इसके दायरे में लाए जाने की बात कही. उन्होंने गैर-रणनीतिक सार्वजनिक उपक्रमों (Non-Strategic PSUs) के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की भी सलाह दी, जिससे सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग के लिए अतिरिक्त मिल सके.

बैठक में मोंटेक सिंह की कही गई कुछ अहम बातें
”2047 का लक्ष्य अच्छा है, लेकिन मौजूदा संकट से निपटे बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं होगा.”
”भारत आज सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट का सामना कर रहा है.”
”ऊर्जा संकट 1973 के बाद का सबसे गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है.”
”अगर अमेरिका और ईरान आज समझौता कर लें, तब भी विश्व अर्थव्यवस्था को सामान्य होने में समय लगेगा.”
”रुपये को बचाने के लिए रिजर्व झोंक देना समझदारी नहीं होगी.”
”भारत को अब बड़े Current Account Deficit और घटते Capital Flows के साथ जीना सीखना होगा.”
”पेट्रोल की कीमतों में पारदर्शिता नहीं है, जनता को असली गणित बताया ही नहीं जाता.”
”जब तेल सस्ता था तब सरकार और कंपनियों ने फायदा अपने पास रखा, जनता तक नहीं पहुंचाया.”
”पेट्रोल सब्सिडी अमीरों को नहीं, गरीबों को सीधी मदद के रूप में मिलनी चाहिए.”
”Make in India सिर्फ संरक्षणवाद से सफल नहीं हो सकता.”
”1970 वाला स्वदेशी मॉडल भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक भूल थी.”
”भारत को दुनिया से कटकर नहीं, दुनिया के लिए उत्पादन करना होगा.”
”हमारी सबसे बड़ी समस्या खराब लॉजिस्टिक्स और बेहिसाब सरकारी परमिशन हैं.”
”Ease of Doing Business पर हम 30 साल से बात कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी बदलाव नहीं दिखता.”
”Quality Control Orders एक तरह की आर्थिक विकृति बन चुके हैं’”
”सरकारी रेगुलेशन और परमिशन सिस्टम उद्योग की वृद्धि रोक रहे हैं.”
”अगर 2047 तक विकसित भारत बनना है तो अगले 10 साल भारत को 9% ग्रोथ चाहिए.”
”Infrastructure और Logistics सुधार के बिना 2047 का लक्ष्य सिर्फ नारा बनकर रह जाएगा.”
”सरकार को सिर्फ मंत्रालयों की नहीं, बाहरी विशेषज्ञों और उद्योग जगत की भी सुननी चाहिए.”
”रुपये की कमजोरी डरने की नहीं, आयात शुल्क घटाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की वजह होनी चाहिए.”

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