सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति (SC/ST) का दर्जा समाप्त हो जाएगा। इसका मतलब है कि धर्म बदलने के बाद व्यक्ति SC/ST एक्ट के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
फैसले के मुख्य बिंदु:
SC/ST का दर्जा समाप्त: धर्म बदलने के बाद, व्यक्ति अब अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं माना जाएगा। SC/ST एक्ट का लाभ नहीं: धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा।
जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक: कोर्ट ने जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को देश की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक माना है। धर्मांतरण विरोधी कानून पर नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में 12 राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों की वैधता की जांच के लिए नोटिस जारी किए हैं। यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दिया गया है, जिसमें एक ईसाई बने व्यक्ति को SC/ST का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था।
जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक: कोर्ट ने जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को देश की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक माना है। धर्मांतरण विरोधी कानून पर नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में 12 राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों की वैधता की जांच के लिए नोटिस जारी किए हैं। यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दिया गया है, जिसमें एक ईसाई बने व्यक्ति को SC/ST का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था।
फैसले का प्रभाव
इस फैसले से उन लोगों पर प्रभाव पड़ेगा जो धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST का लाभ उठाना चाहते हैं। -यह फैसला धर्म परिवर्तन के मामलों में एक महत्वपूर्ण दिशा निर्देश प्रदान करेगा।
-इस फैसले से धर्मांतरण विरोधी कानूनों की वैधता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
-इस फैसले से धर्मांतरण विरोधी कानूनों की वैधता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।








