सुप्रीम कोर्ट ने परम बीर सिंह के वकील से पूछा- वो दुनिया के किस हिस्से या देश में हैं?

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के वकील को जबरन वसूली के एक मामले में एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा घोषित अपराधी घोषित किया और यह पूछा कि वह दुनिया के किस हिस्से या देश में है, इन विवरणों के बिना, अदालत सुरक्षा की मांग करने वाली उनकी याचिका पर विचार नहीं करेगी। न्यायमूर्ति एस.के. कौल ने सिंह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली से कहा, “आप कहां हैं, देश के भीतर या बाहर। सबसे पहले, मैं जानना चाहता हूं कि आप कहां हैं?”

बाली ने उत्तर दिया कि उनके मुवक्किल के ठिकाने के बारे में काउंसल-ऑन-रिकॉर्ड को पता चल जाएगा।

जस्टिस कौल ने काउंसल-ऑन रिकॉर्ड से जवाब मांगा, जिन्होंने जवाब दिया कि उन्हें सिंह के वर्तमान स्थान के बारे में जानकारी नहीं है।

पीठ ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से व्यवस्था में विश्वास की कमी होती है, “आप जांच में शामिल नहीं हुए, कोई नहीं जानता कि आप कहां हैं?”

पीठ ने एक उदाहरण दिया कि यदि यह मान लिया जाए कि सिंह देश से बाहर हैं और लौटने की शर्त के रूप में एक अनुकूल अदालत के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति कौल ने कहा, “केवल अदालत का आदेश आपके पक्ष में है, आप आएंगे, कोई सुरक्षा नहीं और कोई सुनवाई नहीं। पहले, जवाब दें कि वह कहां है। दुनिया या देश के कौन से हिस्से में हैं?”

शीर्ष अदालत सिंह की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कथित रंगदारी के एक मामले में सुरक्षा आदेश देने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने मामले को सोमवार को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया है और सिंह के वकील से उनके वर्तमान स्थान का खुलासा करने को कहा है।

इस हफ्ते की शुरूआत में, मुंबई में एक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सिंह को उनके और शहर के अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जबरन वसूली के एक मामले में ‘घोषित अपराधी’ घोषित किया था।

मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने यह कहते हुए उद्घोषणा की मांग की थी कि उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी उसका पता नहीं लगाया जा सका है।

पिछले मामले में, सीबीआई के खिलाफ महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि सिंह की अनुपस्थिति अच्छी स्थिति नहीं है और ऐसी चीजें न्यायिक प्रणाली में विश्वास की कमी का कारण बनती हैं।

शीर्ष अदालत ने देशमुख की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सीबीआई, ईडी द्वारा उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच के रिकॉर्ड पेश करने और कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के लिए एक एसआईटी के गठन के लिए सीबीआई को निर्देश देने की मांग की गई थी।

Related Posts

कैसे ओमानी पायलट के हाथ में थी फ्लाई दुबई की कमान? आतंकी साजिश की जांच करेगा UAE

UAE ने फ्लाई-दुबई फ्लाइट में हुई हाईजैकिंग की…

Continue reading
इजरायली PM ने UAE का किया सीक्रेट दौरा! राष्ट्रपति से नेतन्याहू ने की मुलाकात 

मीडिल ईस्ट में जारी तनाव और हूती विद्रोहियों…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

किसान सभा की मांग पर 64.7% अतिरिक्त मुआवजे के वितरण के आदेश लखनऊ से जारी

किसान सभा की मांग पर 64.7% अतिरिक्त मुआवजे के वितरण के आदेश लखनऊ से जारी

अपनी दुर्दशा पर रो रहा नयाबास का सरकारी स्कूल, महीनों गायब रहती हैं शिक्षका, पानी और शौचालय का दुरुस्त व्यवस्था नहीं  

अपनी दुर्दशा पर रो रहा नयाबास का सरकारी स्कूल, महीनों गायब रहती हैं शिक्षका, पानी और शौचालय का दुरुस्त व्यवस्था नहीं  

जंतर-मंतर पर पुलिसवालों के नेम टैग क्यों गायब? CPI सांसद ने अमित शाह को लिखा लेटर!

जंतर-मंतर पर पुलिसवालों के नेम टैग क्यों गायब? CPI सांसद ने अमित शाह को लिखा लेटर!

फॉर्म 6 पर SC की टिप्पणी से बवाल, कांग्रेस और CJP बोली- ‘…तो CEC ने झूठ बोला’

फॉर्म 6 पर SC की टिप्पणी से बवाल, कांग्रेस और CJP बोली- ‘…तो CEC ने झूठ बोला’

क्या लोकतंत्र शासकों के हुक्म का नाम है या लोगों के अधिकारों का?

क्या लोकतंत्र शासकों के हुक्म का नाम है या लोगों के अधिकारों का?

Rajya Sabha : बीजेपी ने घोषित किये 8 प्रत्याशी, बनाया जातीय समीकरण! 

Rajya Sabha : बीजेपी ने घोषित किये 8 प्रत्याशी, बनाया जातीय समीकरण!