श्रमिक एवं किसान राष्ट्रीय सम्मेलन में सीटू गौतमबुद्धनगर से सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भागीदारी

तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, क्षेत्रीय फेडरेशन और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर श्रमिक एवं किसान राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सीटू गौतमबुद्धनगर के नेता कामरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा, मुकेश कुमार राघव, राम स्वारथ, सुनील पंडित, अरुण कुमार पटेल, रामसागर आदि के नेतृत्व में जनपद से सैकड़ों मजदूर-किसानों ने हिस्सा लिया। कन्वेंशन को सीटू के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद करीम, अध्यक्ष सुदीप दत्ता, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड बीजू कृष्णा, किसान नेता अशोक धवले, राकेश टिकैत सहित विभिन्न मजदूर-किसान संगठनों के राष्ट्रीय नेताओं ने संबोधित किया।
सम्मेलन में केंद्र की जनविरोधी, कारपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ और मजदूर-किसानों के अधिकारों के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र सर्वसम्मति से पारित किया गया।
कन्वेंशन में पारित घोषणापत्र / प्रस्ताव की मुख्य बातें
1. चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग: सरकार द्वारा थोपी गई 4 श्रम संहिताओं (वेज कोड 2019 सहित) को तत्काल रद्द कर 44 श्रम कानूनों को बहाल किया जाए। ये संहिताएं मालिकों के हित में हैं और मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलती हैं।

2. निजीकरण और ठेकाकरण पर रोक: रेल, बैंक, बीमा, बिजली, कोयला, रक्षा, दूरसंचार सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण, विनिवेश और ठेका/फिक्स टर्म रोजगार पर पूर्ण रोक लगाई जाए। राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचना बंद किया जाए।

3. कृषि विरोधी कानून और बिजली बिल वापस लो: किसानों के लिए C2+50% के आधार पर सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी (2013 के अधिग्रहण कानून के तहत), कर्ज मुक्ति, बिजली संशोधन विधेयक 2022 को रद्द करना और मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक।

4. मनरेगा और शहरी रोजगार गारंटी: मनरेगा में 200 दिन काम और 700 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित हो। शहरों के लिए भी रोजगार गारंटी कानून बनाया जाए।

5. सभी असंगठित और स्कीम वर्कर्स को न्याय: आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे-मील, आशा सहित सभी स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित कर 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और ग्रेच्युटी दी जाए।

6. सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा: शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण पर रोक, सभी के लिए मुफ्त स्वास्थ्य, सभी मजदूरों के लिए यूनिवर्सल सामाजिक सुरक्षा, पुरानी पेंशन बहाली।

7. महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण: बढ़ती महंगाई पर अंकुश, खाली पड़े करोड़ों पदों पर स्थायी भर्ती, अग्निपथ योजना रद्द कर सेना में स्थायी भर्ती बहाल करना।

8. संवैधानिक मूल्यों की रक्षा: देश में बढ़ती नफरत, सांप्रदायिकता और संविधान पर हो रहे हमलों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का संकल्प।

सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि इन मांगों को लेकर 21 नवंबर 2025 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल / ग्रामीण बंद को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए गांव-गांव, फैक्ट्री-फैक्ट्री में व्यापक प्रचार और तैयारी अभियान चलाया जाएगा। जब तक सरकार जनविरोधी नीतियां वापस नहीं लेती, तब तक संयुक्त संघर्ष जारी रहेगा।

अपनी मांगों को पूरा करने और संघर्ष को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रगति, एक ऐसे समाज की प्राप्ति के लिए जो सभी के लिए समानता और न्याय पर आधारित हो, यह संकल्प संयुक्त रूप से अपनाया गया।

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