भारतीय लोकतंत्र पर भारी पड़ रहा सुब्रत राय का सहारियन तिलिस्म !

चरण सिंह राजपूत 
ब किसी संस्था ने निवेशकों का हजारों करोड़ रुपये ठग लिया हो। जब किसी संस्था के चेयरमैन ने कारगिल में शहीद हुए सैनिकों की मदद के नाम पर अपने ही कर्मचारियों को इमोशनल ब्लैकमेल किया हो। जब किसी संस्था के खुद के एजेंट अपने चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। कितने एजेंटों ने आत्महत्या कर ली हो। जब उस संस्था के मुखिया का परिवार उस संस्था के धन के धन से विदेश में जाकर कारोबार करने लगा हो। विदेश की नागरिकता ले ली हो। जब उस संस्था के दूसरे एक निदेशक ने अपने हिस्से का पैसा बाबा रामदेव के कारोबार में लगा दिया हो। जब देश की कितनी ट्रेड यूनियनें, कितने सामाजिक और राजनीतिक संगठन उसके खिलाफ सड़कों पर हों। कितने जिलों में एफआईआर दर्ज की जा रही हों, जब देश की राजधानी दिल्ली में उसके खिलाफ संसद सत्याग्रह चल रहा हो। जब वह व्यक्ति पांच साल से पैरोल पर जेल से बाहर घूम रहा हो। तमाम देनदारी के बावजूद जिस व्यक्ति की कोई संपत्ति नीलाम न हुई हो। जिस पर न कोई राज्य सरकार हाथ डाल पा रही हो और न ही केंद्र सरकार। जिसका न तो सेबी कुछ बिगाड़ पा रही हो और न ही सुप्रीम कोर्ट। यह व्यक्ति उल्टा आंदोलन कराकर सेबी से पैसे मांग रहा है। तो ऐसे व्यक्ति के बारे में क्या कहा जाएगा ?
जी हां बात हो रही है सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय की। यह कोई कहानी नहीं है। यह जमीनी हकीकत है। सुब्रत राय का सहारियन तिलिस्म ऐसा है कि देश का लोकतंत्र चौंधिया जा रहा है। यह ऐसे ही नहीं हुआ है। सुब्रत राय वह व्यक्ति है कि जिसने बॉलीवुड से लेकर नौकरशाह और राजनेताओं में जबर्दश्त पैठ बना रखी है। यह इस व्यक्ति का ही दिमाग है कि सहारा इंडिया को भारत का स्विस बैंक माना जाता था। इस व्यक्ति के ठाठबाँट देखो तो लगता है कि जैसे कहीं का राजा हो। बात भी राजाओं जैसी। भले ही सहारा में निवेश करने वाले लोग पैसा ने मिलने की वजह से अपनी बेटियों की शादी न कराये पाए हों पर सुब्रत रॉय के बेटों की शादी न केवल देश बल्कि विदेश में भी चर्चा का विषय बनी थी।  2004 में जब सुब्रत राय ने अपने बेटों सीमांतो राय और सुशांतो रॉय की शादी में  लखनऊ के सहारा शहर में की तो देश विशेष कर उत्तर प्रदेश के नौकर शाह और राजेताओं को बुलाकर भव्य स्वागत किया था। महीने भर से ज्यादा शादी का जश्न चला था। जनता का हजारों करोड़ इन शादियों में फूंक दिया गया था।  इन शादियों में सुब्रत राय ने  राज नेताओं के अलावा फ़िल्मी हस्ती, खेल हस्ती के अलावा हर क्षेत्र के लोगों को बुलाया था। शादी में हजारों करोड़ रुपए फूंक डाले थे। इन शादियों की कवरेज ने देश ही नहीं बल्कि विदेश के लोगों का ध्यान भी आकर्षित किया था। इन शादियों के बाद ही सत्ता की तिरछी निगाहें सहारा की ओर हुई थी। कांग्रेस और सहारा विवाद यहां के बाद शुरू हुआ था। दरअसल बताया जाता जाता है कि 2004 में सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले मुलायम सिंह, सुषमा स्वराज के साथ ही सुब्रत राय भी थे। जिन लोगों ने सोनिया गांधी को विदेशी बताकर प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को पत्र भेजा था उनमें सुब्रत राय भी थे। सहारा में अय्यारी ऐसी कि चंद्रकांता उपन्यास के अय्यारों को भी पीछे छोड़ दे। सुब्रत राय ने वरिष्ठ आईएएस ब्रजेश सहाय से लेकर चुनाव आयुक्त रहे टीएन शेषन और वरिष्ठ साहित्यकार नामवर सिंह से भी सहारा में नौकरी करा ली। बताया जाता है कि जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को एबीसीएल में भारी घाटा हो गया तो तत्कालीन सपा महासचिव अमर सिंह ने सहारा से 100 करोड़ रुपये अमिताभ बच्चन को दिलवाये  थे। यह सुब्रत राय का प्रभाव ही था कि जब सुब्रत रॉय के अमिताभ बच्चन के घर में पहुंचे तो उन्होंने बोला था कि सहारा श्री के आने से उनका घर जगमगा उठा। जिस सहारा शहर में कितने नौकरशाह और नेता पहुंचे वह सहारा शहर भी मुलायम सिंह यादव की शह पर किसानों की जमीन को हथियाकर बनाया गया था। जिन बाबा रामदेव का कारोबार आज आसमान छू रहा है। उनके हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ की स्थापना के अवसर पर 100 करोड़ रुपए सुब्रत राय ने दिए  थे। बताया जाता है सहारा के दूसरे निदेशक ओपी श्रीवास्तव के बेटा पतंजलि योग पीठ में डायरेक्टर है। देश के कितने नेताओं के सुरक्षा गार्ड आज भी सहारा के हैं। अमर सिंह, जया प्रदा, राजबब्बर के अलावा न जाने कितने नेताओं की तीमारदारी में सहारा की गाड़ियां, गेस्ट हॉउस लगे रहते थे। कहा जाता है कि सहारा इंडिया में नेताओं, ब्यूरोक्रेट और राजनेताओं का ब्लैक मनी भी जमा होता था। कहा तो यह जाता है कि रक्षा मंत्री राजनाथ का पैसा भी सहारा में लगा है। मुलायम सिंह यादव के अलावा अमर सिंह की सुब्रत राय के साथ दोस्ती जगजाहिर है। राज बब्बर, जया प्रदा, जया बच्चन, कपिल देव जैसे धुरंधर सहारा में डायरेक्टर रह चुके हैं।
सहारा ग्रुप के चर्चे समय-समय पर होते रहे हैं। इस ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत राय जो अपने को संस्था में अभिभावक होने का दावा करते हैं, उनके तो अनगिनत किस्से हैं। यह उनकी सियासत के क्षेत्र में मजबूत पैठ ही है कि जब मोदी सरकार सब कुछ ठीक करने का दावा करते घूम रही है वहीं यह व्यक्ति पांच से पैरोल पर जेल से बाहर रहकर सत्ता और न्यापालिका को अपनी ताकत का एहसास करा रहा है। यह व्यक्ति न केवल सेबी बल्कि सुप्रीम कोर्ट के वजूद को भी धता बता रहा है। यह सुब्रत राय की सत्ता में पैठ ही है कि सेबी के तमाम प्रयास के बावजूद सहारा की एक पैसे की संपत्ति नीलाम न हो सकी।

सहारा देश का पहला संस्थान होगा जहां पर कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के लिए ‘कर्त्तव्य काउंसिल’ का गठन किया गया था। कहने को तो इस काउंसिल में कई रिटायर्ड जज थे पर वह बात दूसरी है कि इस काउंसिल से कभी किसी कर्मचारी को कोई न्याय न मिल सका। उल्टे जब कोई कर्मचारी काउंसिल में जाता तो उसका शोषण और बढ़ जाता था। उसकी वजह यह थी कि संबंधित अधिकारी को उसकी शिकायत का पता काउंसिल के माध्यम से ही चल जाता था।
सुब्रत राय ऐसे चैयरमैन हैं जिन्होंने अपने को जेल से छुड़ाने के नाम पर अपने ही कर्मचारियों से सैकड़ों करोड़ रुपए ठग लिये थे। इतना ही नहीं, 1999 में कारिगल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों की मदद के नाम पर, 2003 में गुजरात में आए भूकंप के नाम पर, सहारा वेलफेयर के नाम, सहारा परिवार की मैगजीन के नाम पर यह व्यक्ति अपने ही कर्मचारियों को ठगता रहा है। सहारा में 10 साल तक कारगिल में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को मदद देने के नाम से कर्मचारियों के पैसे काटे गए। सहारा का दावा रहा है कि उनका विश्व का सबसे बड़ा परिवार है। सहारा हमेशा  अपने को 10 लाख से ऊपर सदस्यों का परिवार बताता रहा है। इससे ही अंदाजा लगा लीजिये कि कितना पैसा 10 साल में जमा होगा होगा और कितना पैसा सहारा ने कारगिल में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को दिए हैं। जनता को कितना ठगा होगा बताने की जरूरत नहीं है।
दरअसल सेबी मामले में हुए विवाद के चलते जब सुब्रत राय तिहाड़ जेल गये तो उन्होंने अपने को जेल से छुड़ाने के नाम पर आर्थिक मदद के लिए एक पत्र संस्था के अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखा था। सहारा में कर्मचारी सुब्रत राय के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। यह पत्र तब लिखा गया था सहारा में 3-4 महीने से वेतन नहीं मिला था। किसी ने अपना पेट काटकर, किसी ने कर्जा लेकर, किसी ने जेवर बेचकर, जिससे जो बना, संस्था में पैसे जमा कराए। बताया जाता है चेयरमैन के इस पत्र पर संस्था में साढ़े 12 सौ करोड़ रुपये जमा हुए थे।
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिवसेना नेता गजानन कीर्तिकर के सवाल के लिखित जवाब में लोकसभा को सहारा के भुगतान के बारे में बताया कि एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल के वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर के आरएचपी के तहत जुटाई गई मूल राशि 25,781.37 करोड़ रुपये है, जिसके खिलाफ सेबी में केवल 15,485.80 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। सहारा रिफंड अकाउंट और सेबी उन निवेशकों को मूलधन और ब्याज के पुनर्भुगतान की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, जिन्होंने एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल के वैकल्पिक रूप से पूरी तरह से परिवर्तनीय डिबेंचर में निवेश किया है।
यदि सहारा की बात करें तो मूल रूप से बिहार के रहने वाले सुब्रत रॉय के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने 1978 में 2,000 रुपये की रकम लगाकर कारोबार शुरू किया था। उन्होंने लोगों से पैसा जमा करने की एक स्कीम से शुरुआत की। इस पर 1979-80 में पाबंदी लग गई और तुरंत पैसा वापस करना पड़ा। फिर उन्होंने हाउसिंग फाइनेंस कंपनी शुरू की, जिसके लिए बाजार से पैसा उगाहने की कोई सीमा नहीं थी। उनका यह काम चल निकला। बढ़ते-बढ़ते सहारा देश की टॉप की कंपनियों में शामिल हो गई। एक समय सहारा की कंपनियों में इंडियन रेलवे के बाद सबसे ज्यादा कर्मचारी काम करने का दावा दिया जाता था।  2013 में टाइम मैगजीन ने भी सहारा को भारतीय रेलवे के बाद दूसरी सबसे ज्यादा नौकरी देने वाली संस्था बताया था। इंडिया टुडे ने उनका नाम देश के 10 सबसे ताकतवर लोगों में शामिल किया था।
सुब्रत रॉय अक्सर देशप्रेम की बात कहते रहे हैं। सहारा में हर कार्यक्रम से पहले भारत माँ की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित करने की परम्परा है। सुब्रत राय ने भारतीय क्रिकेट टीम का स्पॉन्सर बनने के लिए भी देशप्रेम को आधार बनाया था। बीसीसीआई को एक विदेशी कंपनी से स्पॉन्सरशिप मिल गई थी, लेकिन सुब्रत रॉय ने बीसीसीआई के उस समय के प्रेसिडेंट जगमोहन डालमिया को फोन किया, देशप्रेम की दुहाई दी और 10 प्रतिशत ज्यादा रकम का ऑफर देते हुए स्पॉन्सरशिप ले ली।  कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले उन्होंने विज्ञापन दिया था। उन्होंने देश की इज्जत का हवाला देकर इन खेलों में घोटाले की जांच टालने की अपील की थी।
सहारा का बिजनेस फाइनेंस, इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड हाउसिंग, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, कंज्यूमर रिटेल वेंचर, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर में फैला हुआ था। सहारा ने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में 4400 करोड़ रुपए में दो होटल भी खरीदे। खरीदे गए दोनों ही होटल न्यूयॉर्क प्लाजा और ड्रीम न्यूयॉर्क दुनिया के नामी होटलों में शामिल हैं। सहाराश्री के पास मुंबई के एंबी वैली में 313 एकड़ जमीन का डेवलपमेंट राइट, मुंबई के वर्सोवा में 106 एकड़ की जमीन, लखनऊ में 191 एकड़ जमीन, देश के 10 अलग-अलग शहरों में 764 एकड़ जमीन है।

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