बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष

नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है, हमें यह भी समझने की ज़रूरत है कि आशाओं के साथ निराशाएँ भी आती हैं। जीवन द्वंद्व का खेल है और नया साल भी इसका अपवाद नहीं है। यदि हम ‘बीते वर्ष’ पर ईमानदारी से विचार करें, तो हमें एहसास होगा कि हालांकि यह आवश्यक नहीं है कि वर्ष ने वह प्रदान किया हो जो हमने उससे चाहा था, लेकिन इसने हमें कुछ बहुमूल्य सीख और अनुभव अवश्य दिए। ये अलग से बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं लग सकते हैं, लेकिन संभवतः ये प्रकृति का हमें उस उपहार के लिए तैयार करने का तरीक़ा है जो उसने हमारे लिए रखा है जिसे वह अपनी समय सीमा में वितरित करेगी। साथ ही, अगर साल ने हमसे कुछ बहुत कीमती चीज़ छीन ली है, तो निश्चित रूप से उसने उसकी समान मात्रा में भरपाई भी कर दी है। वर्ष के अंत में, हमें एहसास होता है कि हमारी बैलेंस शीट काफ़ी उचित है। तो, आइए हम आने वाले वर्ष में इस विश्वास के साथ प्रवेश करें कि नए साल का जादू यह जानने में निहित है कि चाहे कुछ भी हो, हर निराशा के लिए मुआवजा होगा, हर इच्छा की पूर्ति के लिए एक सीख होगी।

 

डॉ. सत्यवान सौरभ

 बीत गया ये साल तो, देकर सुख-दुःख मीत।
क्या पता? क्या है बुना? नई भोर ने गीत॥
जो खोया वह सोचकर, होना नहीं उदास।
जब तक साँसे ये चले, रख खुशियों की आस॥*

हर साल, साल-दर-साल, हम अपने दिल में एक गीत और कदमों में वसंत के साथ नए साल में प्रवेश करते हैं। हमें विश्वास है कि जादुई वर्ष अपने साथ हमारी सभी समस्याओं का समाधान लाएगा और हमारी सभी इच्छाएँ पूरी करेगा। चाहे वह सपनों का घर हो, सपनों का प्रस्ताव हो, सपनों की नौकरी हो, सपनों का साथी हो, सपनों का अवसर हो… और भी बहुत कुछ बेहतर हो। लेकिन जैसे-जैसे साल शुरू होता है और हम जो कुछ भी सामने आता है उससे निपटते हैं, नए साल की नवीनता, नए संकल्प, नई शुरुआत पहली तिमाही तक लुप्त होने लगती है। वर्ष के मध्य तक हम बहुत अधिक सामान्यता और कई फीकी आशाओं की चपेट में होते हैं, जो उस वादे से बहुत दूर है जिसके साथ हमने शुरुआत की थी और आखिरी तिमाही तक हम अपनी वास्तविकता से इतने अभिभूत हो जाते हैं कि हम साल ख़त्म होने का इंतज़ार नहीं कर सकते। हम वर्तमान वर्ष को छोड़ते हुए और एक और ‘नया साल’ मनाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं और शुभकामनाएँ बांटते है-

*बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष।
आनंद उत्कर्ष बढ़े, हर चेहरे हो हर्ष॥
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख॥*

नववर्ष वह समय है जब हमें अचानक लगता है कि ओह, एक साल बीत गया। हम कुछ पलों के लिए स्तब्ध हो जाते हैं कि समय कितनी जल्दी बीत जाता है और फिर हम वापिस अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। मजेे की बात यह है कि ऐसा साल में लगभग एक बार तो होता ही है। यदि हम आश्चर्य के इन क्षणों की गहराई में जाएँ, तब हम पाएंगे कि हमारे भीतर कुछ ऐसा है जो सभी घटनाओं को साक्षी भाव से देख रहा है। हमारे भीतर का यह साक्षी भाव अपरिवर्तित रहता है और इसीलिए हम समय के साथ बदलती घटनाओं को देख पाते हैं। जीवन की वे सभी घटनाएँ जो बीत चुकी हैं, एक स्वप्न बन गई हैं। जीवन के इस स्वप्न-जैसे स्वभाव को समझना ही ज्ञान है। यह स्वप्न अभी इस क्षण भी चल रहा है। जब हम यह बात समझते हैं तब हमारे भीतर से एक प्रबल शक्ति का उदय होता है और फिर घटनाएँ व परिस्थितियाँ हमें हिलाती नहीं हैं। हालांकि, घटनाओं का भी जीवन में अपना महत्त्व है। हमें घटनाओं से सीखना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए। नया साल नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य और नए आइडिया की उम्मीद देता है, इसलिए सभी लोग ख़ुशी से बिना किसी मलाल के इसका स्वागत करते हैं-

*आते जाते साल है, करना नहीं मलाल।
सौरभ एक दुआ करे, रहे सभी खुशहाल॥
छोटी-सी है जिंदगी, बैर भुलाये मीत।
नई भोर का स्वागतम, प्रेम बढ़ाये प्रीत॥*

हालाँकि नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है, हमें यह समझने की ज़रूरत है कि आशाओं के साथ निराशाएँ भी आती हैं। जीवन द्वंद्व का खेल है और नया साल भी इसका अपवाद नहीं है। यदि हम ‘बीते वर्ष’ पर ईमानदारी से विचार करें, तो हमें एहसास होगा कि यह आवश्यक नहीं है कि वर्ष ने वह प्रदान किया हो जो हमने उससे चाहा था, लेकिन इसने हमें कुछ बहुमूल्य सीख और अनुभव अवश्य दिए। ये अलग से बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं लग सकते हैं, लेकिन ये संभवतः प्रकृति का हमें उस उपहार के लिए तैयार करने का तरीक़ा है जो उसने हमारे लिए रखा है जिसे वह अपनी समय सीमा में वितरित करेगी। साथ ही, अगर साल ने हमसे कुछ बहुत कीमती चीज़ छीन ली है, तो निश्चित रूप से उसने उसकी समान मात्रा में भरपाई भी कर दी है। वर्ष के अंत में, हमें एहसास होता है कि हमारी बैलेंस शीट काफ़ी उचित है। तो, आइए हम आने वाले वर्ष में इस विश्वास के साथ प्रवेश करें कि नए साल का जादू यह जानने में निहित है कि चाहे कुछ भी हो, हर निराशा के लिए मुआवजा होगा, हर इच्छा की पूर्ति के लिए एक सीख होगी, दर्द-दुखों का अंत होगा, अपनेपन की धूप होगी-

*छँटे कुहासा मौन का, निखरे मन का रूप।
सब रिश्तों में खिल उठे, अपनेपन की धूप॥
दर्द-दुखों का अंत हो, विपदाएँ हो दूर।
कोई भी न हो कहीं, रोने को मजबूर॥*

नए साल पर अपने लिए लक्ष्य निर्धारित कर लें। छात्र हों या नौकरीपेशा, सभी के लिए कोई न कोई लक्ष्य होना ज़रूरी होता है। भविष्य को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं और किस दिशा में प्रयास करना है, इन सब का निर्धारण करने के बाद उसे पूरा करने का संकल्प ले लें। आपका संकल्प हमेशा लक्ष्य को पूरा करने की याद दिलाता रहेगा। सभी ‘नए साल’ को जीवनकाल से जोड़ते हैं और हमारा जीवनकाल आशाओं और निराशाओं, सफलताओं और असफलताओं, खुशियों और दुखों के बारे में है और यह वर्ष भी कम जादुई नहीं होगा। तो इस वर्ष आप अपने संकल्पों को कैसे पूरा कर सकते हैं? इस बारे सोच समझकर आगे बढिये, दूसरों से समर्थन मांगें, अपने मित्रो और परिवार से आपका उत्साह बढ़ाने के लिए कहें। उन्हें अपने लक्ष्य बताएँ और आप क्या हासिल करना चाहते हैं। अपने लिए एक इनाम प्रणाली बनाएँ, अल्पकालिक लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें पूरा करने के लिए स्वयं को पुरस्कृत करें। अपने ऊपर दया कीजिये, कोई भी एकदम सही नहीं होता। अपने आप को कोसने की बजाय गहरी सांस लें और नव उत्कर्ष के प्रयास करते रहें-

*खोल दीजिये राज सब, करिये नव उत्कर्ष।
चेतन अवचेतन खिले, सौरभ इस नववर्ष॥
हँसी-खुशी, सुख-शांति हो, खुशियाँ हो जीवंत।
मन की सूखी डाल पर, खिले सौरभ बसंत॥*

ऐसा माना जाता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और ख़ुशी के साथ मनाया जाए, तो पूरा साल इसी उत्साह और खुशियों के साथ बीतेगा। हालांकि भारतीय परम्परा के अनुसार नया साल एक नई शुरुआत को दर्शाता है और हमेशा आगे बढऩे की सीख देता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, एक नई उम्मीद के साथ आगे बढऩा चाहिए। ताकि इस वर्ष की एक सुखद पहचान बने-

*खिली-खिली हो जिंदगी, महक उठे अरमान।
आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान॥
छेड़ रही है प्यार की, मीठी-मीठी तान।
नए साल के पँख पर, ख़ुशबू भरे उड़ान॥*

—डॉ सत्यवान सौरभ

  • Related Posts

    दलित पैंथर्स: संस्थापकों की लड़ाई से परे
    • TN15TN15
    • July 11, 2026

    आनंद तेलतुंबडे   अर्जुन डांगले द्वारा ओरिएंट ब्लैकस्वान,…

    Continue reading
    1963 की गणतंत्र दिवस की परेड में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को परेड में शामिल क्यों किया?
    • TN15TN15
    • July 11, 2026

    कुंठा, बौखलाहट से भरे सोशल मीडिया के ये…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    मुंबई के लोग तय करेंगे कि मैं रील्स स्टार हूं या रियल स्टार, कोस्टल रोड वीडियो पर ट्रोलिंग के बाद बोलीं रितु तावड़े

    • By TN15
    • July 11, 2026
    मुंबई के लोग तय करेंगे कि मैं रील्स स्टार हूं या रियल स्टार, कोस्टल रोड वीडियो पर ट्रोलिंग के बाद बोलीं रितु तावड़े

    राम कपूर की ‘हरकत’ देख चढ़ा इंटरनेट का पारा, बीवी गौतमी कपूर ने भी किया पोस्‍ट, लोग बोले- ये नहीं सुधरेंगे

    • By TN15
    • July 11, 2026
    राम कपूर की ‘हरकत’ देख चढ़ा इंटरनेट का पारा, बीवी गौतमी कपूर ने भी किया पोस्‍ट, लोग बोले- ये नहीं सुधरेंगे

    चमोली में सरकारी अस्पताल की जर्जर दीवार गिरने से दर्दनाक हादसा, चिकित्सा प्रभारी की मौत

    • By TN15
    • July 11, 2026
    चमोली में सरकारी अस्पताल की जर्जर दीवार गिरने से दर्दनाक हादसा, चिकित्सा प्रभारी की मौत

    ‘पिछले जनम में सांप थी क्या?’ रवि किशन की बेटी रीवा पर भड़कीं उर्फी जावेद, बहन डॉली के कारण बवाल

    • By TN15
    • July 11, 2026
    ‘पिछले जनम में सांप थी क्या?’ रवि किशन की बेटी रीवा पर भड़कीं उर्फी जावेद, बहन डॉली के कारण बवाल

    ’15 जुलाई को पाकिस्तान से आजादी का करेंगे ऐलान’, PoK के नेताओं ने शहबाज को दिया अल्टीमेटम   

    • By TN15
    • July 11, 2026
    ’15 जुलाई को पाकिस्तान से आजादी का करेंगे ऐलान’, PoK के नेताओं ने शहबाज को दिया अल्टीमेटम   

    युजवेंद्र चहल की एक्स वाइफ धनाश्री वर्मा ने इस भोजपुरी एक्ट्रेस संग किया गजब डांस 

    • By TN15
    • July 11, 2026
    युजवेंद्र चहल की एक्स वाइफ धनाश्री वर्मा ने इस भोजपुरी एक्ट्रेस संग किया गजब डांस