‘जंतर मंतर की जगह…’, दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए इस्तेमाल होने वाले जंतर-मंतर को लेकर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने मांग की कि प्रदर्शन के लिए कोई दूसरी जगह तय की जाए, क्योंकि जंतर-मंतर अब ऐसे आयोजनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है। याचिका में कहा गया कि जंतर-मंतर पर आने-जाने में लोगों को काफी परेशानी होती है, वहां चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसी वजह से प्रदर्शन के लिए किसी नए और बेहतर स्थान का चयन किया जाना चाहिए। ,

सुनवाई के दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वह इस मामले में सरकार से निर्देश लेकर अपना जवाब दाखिल करें। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रस्तावित मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर बड़े स्तर पर फिर से प्रदर्शन या मार्च होता है तो 20 जुलाई जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है. इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभालना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का काम है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है. अब अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
 

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर ने क्या कहा?

 

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि वह PIL पर निर्देश लें और उस याचिका का जवाब दें, जिसमें विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का अनुरोध किया गया है. उच्चतम न्यायालय में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है और जरूरी सामान की आपूर्ति में बाधा आती है।

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