अखिलेश यादव पर लगाया चाचा का अपमान करने का आरोप
द न्यूज 15

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लखनऊ । समाजवादी पार्टी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव में फिर ठन गई है। मतलब जो चाचा भतीजा चुनाव से पहले गलबहियां कर रहे थे वे अब एक दूसरे को देखना नहीं चाहते हैं। इसी बीच मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम यादव की एंट्री हुई है। हरिओम यादव ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि अखिलेश यादव और सैफई के शकुनी ने शिवपाल यादव का बहुत अपमान किया है। उन्होंने शिवपाल यादव को भाजपा ज्वाइन करने की सलाह दी है।
दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद जब शिवपाल यादव को अखिलेश यादव ने विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया तो शिवपाल यादव नाराज हो गए। यह नाराजगी इतनी बढ़ गई कि शिवपाल यादव भाजपा के दिल्ली नेतृत्व और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल आये। शिवपाल यादव को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसी बीच सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम यादव ने शिवपाल यादव को सुझाव दिया है कि वे भाजपा में शामिल होकर योगी और मोदी के हाथों को मजबूत करें। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि सपा समाप्ती के कगार पर है। शिवपाल यादव का सैफई के एक शकुनी और अखिलेश यादव ने बहुत अपमान किया है।दरअसल पूर्व विधायक हरिहोम यादव चुनाव से पहले ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। हरिओम यादव ने कहा है कि शिवपाल यादव प्रदेश के बड़े नेता हैं। प्रदेश के नेता और जनता दोनों उनका सम्मान करते हैं। अखिलेश यादव के पार्टी की कमान संभालते ही उन्होंने समाजवादी पार्टी में बहुत अपमान झेला है।
दरअसल मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह यादव के बेटे रणवीर यादव की शादी हरिओम यादव के भाई राम प्रकाश नेहरू की बेटी मृदुला यादव से हुई है। वह सैफाई की ब्लॉक प्रमुख और पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव की मां हैं। हरिओम यादव एक बार शिकोहाबाद तो दो बार सिरसागंज से विधायक रहे हैं। शिवपाल यादव के अलग पार्टी बना लेने के बाद उनकी पार्टी में जाने पर उन्हें सपा से निष्काशित कर दिया गया था।
शिवपाल का ट्वीट : भाजपा में शामिल होने अटकलों के बीच शिवपाल सिंह यादव ने ट्वीट किया, “प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥भगवान राम का चरित्र ‘परिवार, संस्कार और राष्ट्र’ निर्माण की सर्वोत्तम पाठशाला है। चैत्र नवरात्रि आस्था के साथ ही प्रभु राम के आदर्श से जुड़ने व उसे गुनने का भी क्षण है।”








