किसान संघर्ष मोर्चा ने यमुना एक्सप्रेसवे टोल मैनेजमेंट के विरुद्ध किया प्रदर्शन

आज किसान संघर्ष मोर्चा के तीनों घटक संगठनों—किसान एकता संघ, अखिल भारतीय किसान सभा एवं भारतीय किसान परिषद—के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जेवर टोल कंपनी के जनरल मैनेजर द्वारा किसान संगठनों को “असामाजिक तत्व” कहे जाने के विरोध में प्रदर्शन किया तथा जेवर के उपजिलाधिकारी दुर्गेश सिंह को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की कि जनरल मैनेजर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा कंपनी द्वारा किसानों के टोल पास बंद करने के लिए भेजे गए नोटिस तत्काल वापस लिए जाएं।

 

आज 10:30 सैकड़ों कार्यकर्ता जेवर अंडरपास के नीचे एकत्रित हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय तक मार्च किया।

भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय सचिव उदल आर्य ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट बनने के बाद किसानों को हवाई जहाज की सैर कराकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि गौतम बुद्ध नगर के किसान एयरपोर्ट से खुश हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक ने एयरपोर्ट कंपनी, अन्य कंपनियों और प्राधिकरण के साथ मिलकर प्रभावित गांवों को गांव की परिभाषा से बाहर करवा दिया, जिससे किसानों का मुआवजा नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार चार गुना ना मिल सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नौ वर्षों तक सर्किल रेट का पुनरीक्षण नहीं होने दिया गया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। किसानों के रेट ₹15000 प्रति वर्ग मीटर की जगह केवल ₹3300 प्रति वर्ग मीटर ही रह गए।

किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि आज जो भी किसान, मजदूर, पत्रकार या नागरिक सरकार, कंपनियों और प्रशासन के गठजोड़ के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे पुलिस दमन का सामना करना पड़ता है। उन्होंने हाल ही में मुनेंद्र प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही उजागर करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। मुनेंद्र ने एक नोएडा के बहुचर्चित इंजीनियर युवराज मेहता को डूबने से बचाने की कोशिश की थी बहादुरी का परिचय दिया था जिससे प्रशासन की किरकिरी हुई थी और प्रशासन के लापरवाही सामने आई थी पुलिस ने इसी बात से चिढ़कर मुनेंद्र का दमन करने के मकसद से जेल भेजा है किसान संघर्ष मोर्चा इसकी कड़ी निंदा करता है।

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा के तीनों संगठनों ने दिसंबर 2024 में 10 प्रतिशत प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने और आबादी निस्तारण की मांग को लेकर एक महीने से अधिक समय तक आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि 6 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा सर्किल रेट के पुनरीक्षण और आबादी निस्तारण का वादा किया गया था, लेकिन अब तक कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ है।

किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ हजारों करोड़ रुपये की अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और विभिन्न एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है। इस मामले में मनोज गोद को ईडी ने जेल भी भेजा है। सुरक्षा ग्रुप की भी मिली भगत के सबूत मिले हैं।उन्होंने कहा कि ऐसी फ्रॉड कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को “असामाजिक तत्व” कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और किसान इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

किसान संघर्ष मोर्चा ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि कंपनी के जनरल मैनेजर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तथा टोल पास बंद करने के नोटिस वापस नहीं लिए गए, तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

धरना-प्रदर्शन का संचालन प्रमोद शर्मा ने किया। इस अवसर पर अशोक भाटी, सुशांत भाटी, अभय भाटी, संदीप भाटी, सुशील सोनपुर, प्रशांत भाटी, बुधपाल यादव, मनोज यादव, भोजराज रावल, देशराज राणा, करतार नागर, नरेश नागर, आकाश नागर, सुरेंद्र भाटी, पप्पू ठेकेदार, रोहित भाटी, निरंकार प्रधान, अशोक आर्य, राहुल नागर, संदीप चौहान, सचिन एडवोकेट, जयप्रकाश आर्य, प्रेमपाल चौहान, पवन पतला खेड़ा, दुर्गेश शर्मा, सहित सैकड़ों किसान, कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे।

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