मोदी जी यह कैसी सादगी ? लंदन में कानून मंत्री घुमा रहे 75 जजों को!

क्या भारत में नहीं सकती थी सेकेंड इंटरनेशनल बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप ?

घरेलू गैस सिलेंडर पर 29 रुपए रुपए बढ़ाने जरुरी हैं पर कानून मंत्री के साथ 75 जजों का लंदन दौरा नहीं रोका जा सकता

चरण सिंह 
वाह मोदी जी आपने सभी प्रवचन भोली भाली जनता को ही देने के लिए हैं ? आप तो कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से विदेशी दौरे कम करने की अपील कर रहे थे। इस अपील के अगले ही दिन आप खुद तो विदेशी दौरे पर चले ही गए थे। अब कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को 75 जजों और कुछ सीनियर वकीलों की मौज-मस्ती के लिए लंदन भेज दिया। यदि देश पर आर्थिक संकट है तो क्या यह बैडमिंटन टूर्नामेंट अपने देश में नहीं हो सकता था ? यदि आर्थिक संकट के चलते रसोई गैस सिलेंडर पर 29 रुपए बढ़ाना जरूरी हो गया था फिर क्या जरूरत थी कानून मंत्री को इन जजों और वकीलों को लंदन ले जाने की।
जज तो हर साल अपने परिवारों के साथ जून में छुट्टियां मनाने जाते हैं। सरकार की ओर से यह दौरा क्यों ? क्या ऐसे में इन जजों पर सरकार के दबाव में फैसले प्रभावित करने के आरोप नहीं लगेंगे ? क्या जो कारपोरेट घराने इस बैडमिंटन चैंपियनशिप को करा रहे हैं  वे इन जजों से फैसलों को प्रभावित नहीं कराएंगे ? मतलब सब सीख जनता को ही देंगे ? सरकार देश को बताएं कि सरकार ने न जजों और वकीलों को किस बात का अर्वाड दिया है ?
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत बेरोजगारों को तो कॉकरोच बोल रहे थे। बेरोजगारों के आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर और मीडिया में जाकर सिस्टम के खिलाफ लड़ने की बात कर रहे थे। जस्टिस सूर्यकांत लंदन के इस दौरे को लेकर बताएं कि क्या इससे न्यायपालिका प्रभावित नहीं होगी ?

दरअसल लंदन के साउथ हॉल में आयोजित ‘सेकेंड इंटरनेशनल बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप’ लगभग 75 भारतीय जजों के भाग लेने की खबर सामने आ रही है। इस बैडमिंटन चैंपियनशिप का उद्घाटन समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के शामिल होने की बात सामने आ रही है।

जानकारी मिल रही है कि इस  बैडमिंटन चैंपियनशिप को कानून मंत्रालय स्पॉन्सर कर रहा है। दूसरे स्पॉन्सर जिंदल ग्रुप समेत कई बड़ी कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं। प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण ने तो 150 जजों और कुछ वकीलों के इस बैडमिंटन चैंपियनशिप में शामिल होने की बात की है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री की सादगी की अपील का क्या हुआ? जजों के आचार संहिता का क्या हुआ? न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या हुआ?
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