पुनर्विवाह

हम अपने जीवन से जुड़ी तमाम प्रश्नों के उत्तर ज्योतिष के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं| ज्योतिष हमारे जीवन का GPS है| आज इसी GPS के माध्यम से हम पुनर्विवाह के बारे में जानेंगे| कुंडली में बनने वाले योग को यदि दशा का समर्थन  मिल जाये और साथ ही गोचर साथ दे दे तो योग किस प्रकार फलीभूत होता है, आज इसे ही इस लघु कथा के माध्यम से कहने की कोशिश की गयी है

बी कृष्णा नारायण

वशिष्ठ बाबू आज सुबह से ही बहुत व्यस्त थे| सुबह जल्दी ही स्नान ध्यान करके अपना प्रिय परिधान पहन कर तैयार होकर नंदी को आवाज़ लगाते हुए बोले- नंदू,जाकर दुल्हिन को कहिये फटाफट नाश्ता देने|

काहे बाबा आज फटाफट काहे- नंदी ने उत्सुक होकर पूछा|

अरे भाई तुम बहुत सवाल करती हो| चलो जाओ जल्दी से नाश्ता लगवाओ नहीं तो मेरा बस छूट जायेगा|

इधर ओके बाबा कह कर नंदू भीतर चली उधर वशिष्ठ बाबू दस वर्ष पीछे पहुँच गए| अपने जिगरी दोस्त दामोदर के घर|  दामोदर  के बेटे की शादी थी| घर की बात कौन करे, पूरा गांव बेला और गुलाब के फूलों से सजाया गया था| दामोदर की हवेली दुल्हन की तरह सजाई गयी थी कलकत्ता से फूल सजाने वाले बुलाये गए थे| अवध के नामचीन हलवाई को बुलाया गया था| पटना से  मगही पान वाले को खास तौर पर बुलाया गया था|  अप्रतिम व्यवस्था थी|

आखिर हो भी क्यों न भाई| प्रतिष्ठित और नामी जमींदार दामोदर बाबू के एकलौते बेटे नीरव की शादी जो थी| नीरव एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में उच्चाधिकारी था| बहुत ही कम समय में नीरव नेअपनी योग्यता और क्षमता के बल पर यह मुकाम हासिल किया था|

वशिष्ठ बाबू दो दिन पहले ही अपने दोस्त के घर पहुँच गए थे| दोपहर में खाना खाने के बाद बातचीत की महफिल जमी| बातों बातों में मुखिया जी ने वशिष्ठ बाबू से कहा कि आप  तो ज्योतिष के अच्छे जानकार हैं,तो चलिए आप हमें  नीरव के वैवाहिक जीवन के बारे में बताईये| कैसा होगा इसका दाम्पत्य? वशिष्ठ बाबू ने कहा कि जब सारी तैयारी के साथ कुछ ही समय के पश्चात् बारात निकलने वाली है तो ऐसे में अब कुंडली की बात नहीं की जानी चाहिए| मुखिया जी ने जोर देते हुए कहा कि कोई बात नहीं| बारात निकलने वाली है तो क्या हुआ| यह रहा नीरव का कुंडली| आप बताईये| वहां उपस्थित अन्य सदस्यों के साथ साथ दामोदर ने भी कहा कि चलो बता भी दो| सब जब जोर देने लगे तब वशिष्ठ बाबू ने न चाहते हुए भी नीरव की कुंडली देखना आरम्भ किया| जैसे जैसे वे जन्म कुंडली और नवांश कुंडली का  सूक्ष्म विश्लेषण करने लगे उनके चेहरे का रंग बदलने लगा| उनके चेहरे के बदलते रंगों को देख कर सब ने एक साथ अधीर होकर पूछा- क्या हुआ? सब कुशल मंगल तो है?

वशिष्ठ बाबू ने धीरे से कहा कि हाँ सब कुशल मंगल है|

तो फिर आपके चेहरे का रंग क्यों उड़ा हुआ है ?

कुछ नहीं बस यूं ही|

अरे कुछ कैसे नहीं| कुछ तो है जो आप हम सबसे छुपा रहे हैं|

चलिए  अब बताईये भी|

नीरव का दाम्पत्य सुखमय होगा| उत्तम संतान का भी योग है परन्तु इसकी कुंडली में दो शादी का योग है|

दो वर्ष बाद –

दो महीने के अवकाश में नीरव घर आया हुआ था| कई वर्षों के पश्चात् होली में वह घर आया था| उसकी पत्नी अपने सास के साथ रसोई में भांति भांति के पकवान तैयार करने में लगी  थी| उसकी पहली होली थी ससुराल में तो वह काफी उत्साहित थी|

आँगन से बड़की फुआ का आवाज़ सुनकर उसकी सास ने कहा – हम आते हैं बड़की फुआ को लेकर| सासु माँ को रसोई से बाहर गए मिनट भी नहीं हुआ था की एक जोर का धमाका हुआ| सब लोग भागे रसोई की तरफ | गैस सिलिंडर फटने से आग लगी थी | आग की लपटों में घिरी  नीरव की पत्नी जमीन पर पड़ी जोर जोर से चीख रही थी| वह बुरी तरह जल गयी थी|आनन फानन में सब उसे लेकर अस्पताल की और दौड़े| अस्पताल गांव से दूर शहर में था| वहां पहुँचते पहुँचते कुछ घंटे लग गए| डॉक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका|

आठ वर्ष बाद-

वशिष्ठ बाबू के सामने सारी घटनाएं एक चलचित्र की भांति एक के बाद गुजरने लगी|

अपने इसी जिगरी दोस्त दामोदर के बेटे नीरव का पुनर्विवाह होना तय हुआ था| ख़ुशी के इस पल में अपने दोस्त के पास जाकर दोस्त के साथ होने की उन्हें जल्दी थी|

बाबा ओ बाबा कहाँ खो गए? देखिए हम नाश्ता लेकर कब से खड़े हैं|

हाँ बाबूजी, कहाँ खो गए आप – उनके बड़े बेटे ने उन्हें झकझोड़ते हुए कहा|

झकझोड़ने से वशिष्ठ बाबू वर्तमान में आये|

कहा- अरे कुछ नहीं बउआ, नीरव का पुनर्विवाह होने वाला है| दामोदर के घर खुशियां आने वाली है| ज्योतिष का योग फलीभूत होने वाला है| वर्षों पहले उसकी कुंडली के विश्लेषण से जिस भवितव्य की जानकारी मिली थी उसके फलित होने का समय आ गया है| उसकी दूसरी शादी होने जा रही है| कुंडली से पुनर्विवाह किस प्रकार जाना आपने बाबूजी? उनके बेटे ने पूछा|

नीरव की कुंडली में,

लग्न कुंडली में सप्तमेश चतुर्थ भाव में है|

नवांश कुंडली में सप्तमेश एकादश भाव में नवमेश के साथ है|

लग्न कुंडली में शुक्र और शनि का योग बना हुआ है|

लग्न कुंडली में सप्तम भाव पाप कर्तरी में है| परन्तु नवांश में उसकी स्थिति अच्छी हो गयी है|

नवांश कुंडली में सप्तमेश पर गुरु की दृष्टि है|

ग्रहों की उपर्युक्त योग के साथ साथ नीरव की चलने वाली दशा और गोचर पुनर्विवाह को बल प्रदान कर रहे थे|

अब आगे कैसा रहेगा बाबूजी?

आगे सब अच्छा होगा|

नीरव अपने काम में भी खूब तरक्की करेगा और उसका वैवाहिक जीवन भी सुखमय होगा| यह शादी सुखमय होगा और उत्तम  संतान की प्राप्ति वाला होगा|

काम में तरक्की किस प्रकार जाना बाबा?

हमें भी बताईये- नंदी ने कहा|

हाँ नंदू बाबू हाँ आपको जरूर बताएँगे|

शादी से लौट कर आते हैं तब आपको यह बताएँगे|

ओके बाबा| शादी से लौटिएगा तब दामोदर बाबा से मेरे लिए खूब लड्डू और खाजा मांगकर लेते आइयेगा| नंदी ने खुश होते हुए कहा|

हाँ बाबू जरूर, वशिष्ठ बाबू ने हँसते हुए कहा|

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