अड़ानी की जागीर नहीं यह मध्यप्रदेश हमारा है : एड. आराधना भार्गव
किसान संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव ने सिंगरौली में जोर जबरदस्ती से किये जा रहे विस्थापन को अन्यायपूर्ण, अनैतिक एवं असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि बांसी बेरदहा में अडानी द्वारा 8 गांव के आदिवासियों की भूमि फर्जी मुकदमे दर्ज कर और जेल भेजकर अधिग्रहित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी किसी भी कीमत पर जमीन देने को तैयार नहीं है। सोनमती सिंह, सलामसिंह, सुभरी सिंह खैरवाल, भगवानी देवी, काशी सिंह मरकाम, हिरमन सिंह, रूपनारायण सिंह मरकाम, प्रेमसिंह, बद्धे सिंह, शीतल सिंह, सुदर्शन सिंह, पहलवान सिंह, राम सुरेश सिंह, धर्मपाल सिंह, भगवान सिंह, विदेह सिंह, धर्मराज सिंह, रामदयाल आदि 19 परिवारों द्वारा इस आशय के दिए गए वीडियो बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासियों ने जब वहां 14 जून को अपनी बैठक रखी थी तब उसके पहले अखिलेश शाह पर फर्जी मुकदमें लगाकर जेल भेज दिया गया।
प्रदेश अध्यक्ष एड. आराधना भार्गव ने कहा कि यह आश्चर्यजनक एवं शर्मनाक है कि लंघा डोल थाना प्रभारी द्वारा यह आपत्ति लगाई गई कि मुख्यमंत्री के दौरे होने तक जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अडानी के आईफा ट्रकों से सुहिरा और अमिलिया गांव के दो व्यक्तियों की कुचलकर मौत हो गई थी। उनमें से प्रजापति परिवार के आठ व्यक्तियों को आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया गया है। वे तीन माह से जेल में बंद है। एड आराधना भार्गव ने कहा कि यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि मृतक के परिवारजनों को जेल में डाल दिया गया। उसी तरह मोरवा में 1 लाख व्यक्तियों को जोर जबरदस्ती से एन सी एल द्वारा विस्थापित किया जा रहा है।
एड आराधना भार्गव ने बताया कि 14 जून को जब किसान संघर्ष समिति द्वारा विंध्य क्षेत्र में आयोजित किसान मजदूर आदिवासी अधिकार यात्रा बांसी बेरदहा पहुंची तब सोनमती सिंह, रामरत सिंह, भगवती देवी, सरोज सिंह आदि ने अखिलेश शाह की बिना शर्त रिहाई को लेकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम को सौंपा गया , मैंने भोपाल में मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया परन्तु मिलने का समय नहीं दिए जाने के कारण ग्रामीणों का पत्र ईमेल से मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेजा गया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वें मध्य प्रदेश और देश के विस्थापन संबंधी कानून का पालन कराएं तथा जोर जबरदस्ती से सिंगरौली और प्रदेश में अन्य स्थानों पर किये जा रहे विस्थापन को रोकें।
एड आराधना भार्गव ने कहा कि प्रदेश में सरकार की आदर्श पुनर्वास नीति 2002 के तहत पुनर्वास किया जाना चाहिए, अडानी की नीति से नहीं।
अडानी की जागीर नहीं यह मध्यप्रदेश हमारा है!







